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AI तकनीक डॉक्टरों की करेगी मदद, संक्रमित मरीजों की गंभीरता का पता चलेगा जल्दी

AI तकनीक डॉक्टरों की करेगी मदद, संक्रमित मरीजों की गंभीरता का पता चलेगा जल्दी

नई तकनीक डॉक्टर और अस्पतालों का बोझ कम करने में मदद करेगी.

नई तकनीक डॉक्टर और अस्पतालों का बोझ कम करने में मदद करेगी.

कोरोना वायरस (Corona Virus) से लड़ने के लिए वैज्ञानिकों ने ऐसे आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस टूल (AI Tool) बनाया है जो डॉक्टरों को यह बताएगा कि संक्रमित मरीज की हाल बाद में कितनी गंभीर होने की संभावना है.

नई दिल्ली: दुनिया भर में कोरोना वायरस (Corona virus) के इलाज को लेकर तमाम तरह के शोध चल रहे हैं. कुछ के नतीजे उत्साहजनक हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में शोधों के नतीजों की व्यापकता जांचने के लिए समय चाहिए जिसकी बहुत कमी है. हाल में एक शोध में वैज्ञानिकों ने आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का एक टूल विकसित किया है जो नए संक्रमित रोगियों के बारे में इस बात की जानकारी देगा कि उनमें गंभीर श्वास रोग विकसित होने की कितनी संभावनाएं हैं.

क्या पाया गया शोध में
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार जर्नल ऑफ कम्पयूटर्स मटेरियल्स एंड कन्टीन्यूआ में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया है कि अभी तक जिन संकेतों/लक्षणों से यह पता लगाया जाता था कि मरीज की हालत गंभीर होने की कितनी संभवनाएं हैं वे गलत हैं. शोध में यह पाया गया कि वे कौन से संकेत हैं जिनसे यह पता लग सकता है कि मरीज की हालत गंभीर होने वाली है.

डॉक्टरों को मिल सकती है बड़ी मदद

न्यूयार्क यूनिवर्सिटी की क्लीनिकल असिस्टेंट प्रोफेसर मेगन कॉफी न कहा, “हालांकि हमारा मॉडल अभी स्वीकृत होना बाकी है, यह एक और टूल है जिससे रोगी के बारे में बताया जा सकता है कि वह वायरस से संक्रमित होने के लिए कितना ज्यादा कमजोर है. यह वायरल संक्रमण का इलाज कर रहे फिजीशियन के लिए मददगार हो सकता है.”

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दुनिया के कई देशों में अस्पतालों में मरीजों क संख्या क्षमता से ज्यादा हो गई है.


यह आसानी हो जाएगी डॉक्टरों को
यूनिवर्सिटी के एक और क्लीनिकल असिस्टेंट प्रोफेसर एनासे बारी ने कहा, “हमारा मकसद एआई क्षमताओं का उपयोग कर फिजीशियन की मदद करने वाले एक निर्णय उपकरण (Decision Tool) डिजाइन करना था. इससे वे कोरोना वायरस के मरीजों में आने वाली गंभीरताओं को चिन्हित कर सकेंगे. हमें उम्मीद है कि जब यह टूल पूरी तरह से तैयार होगा तो फिजीशियन के लिए तय करने में आसानी होगी कि किन मरीजों को भर्ती करने की जरूरत है और किन्हें घर जाने की इजाजत देनी है. यह इस माहौल में बहुत काम आएगा जबकि अस्पताल के संसाधन कम पड़ रहे हैं.“

ऐसे हासिल की गई जानकारी
इस अध्ययन के लिए चीन के दो अस्पतालों में जनवरी में ऐसे सार्स कोव-2 से संक्रमित 53 मरीजों की लैब, रोडियोलॉजी और जनसांख्यकीय जानकारी एकत्र की गई. इन मरीजों में तब लक्षण हलके थे जिसमें खांसी, बुखार, पेट खराब होने वाले लक्षण शामिल थे. बहुत कम मरीजों में एक सप्ताह के अंदर ही निमोनिया जैसे गंभीर लक्षण पाए गए.

यह उद्देश्य था अध्ययन का
अधय्यन का लक्ष्य यह पता करना था कि क्या एआई तकनीक मरीजों में एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) होने की संभावना को सही तरीके पहले से बता सकती है या नहीं. इस स्थिति में मरीज के फेफड़ों में पानी भर जाता है और उम्रदराज लोगों में यह जानलेवा तक हो जाती है.

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दुनियाभर में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या 11 लाख तक पहुंच गई है.


डेटा बढ़ने के साथ स्मार्ट हो जाते हैं प्रोग्राम
शोधकर्ताओं के डिजाइन किए गए कम्प्यूटर मॉडल में जानकारी दी जाती है और उसके आधार पर वे इस तरह के निर्णय लेते हैं, ज्यादा डेटा बनने पर ये प्रोग्राम ज्यादा स्मार्ट हो जाते हैं. प्रोग्राम विकल्पों में से चुने गए निर्णयों पर भी नजर रखते हैं. और हर तरह के लिए जा सकने वाले निर्णय के संभावित नतीजों के बारे में भी बता सकते हैं.

पुराने तरीके गलत हैं
शोधकर्ताओं को यह जानकर हैरानी हुई कि कोविड-19 को जाने माने लक्षण जैसे की फेफड़ों की तस्वीरों में कुछ पैटर्न, बुखार, तीखी प्रतिरोधी प्रतिक्रिया, यह पूर्वानुमान लगाने में उपोयगी साबित नहीं हुए कि हल्के लक्षणों वाले किन मरीजों में गंभीर फेफड़ों की बीमारी हो सकती है. इतना ही नहीं उम्र और लिंग से भी बीमारी की गंभीरता के बारे में पता नहीं चल सकता जबकि पहले के अध्ययनों में यह पाया गया है कि  60 साल से ज्यादा के मरीजों को ज्यादा खतरा है.

तो कैसे काम करता है यह टूल
इस नए एआई टूल ने तीन चीजों में खास बात पायी. पहला लीवर एंजाइम ऐलानाइन एमीनोट्रांसफेरीज (ALT) , बताया गया मायाल्जिया (Mayalgia) और हीमोग्लोबिन  (hemoglobin) स्तर. इन तीनों के बदलाव के आधार पर सटीकता से बीमारी की गंभीरता का अनुमान लगाया जा सकता है. टीम इस टूल की मदद से 80 प्रतिशत की सटीकता से इस ARDS के जोखिम के बारे में पूर्वानुमान लगाने में सफल रही.

जहां एएलटी स्तर जो हैपिटाइटिस में तेजी से बढ़ जाते हैं और लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं कोविड-19 के मरीजों में बढ़ी मात्रा में पाए गए. इससे भी कोविड-19 की आने वाली गंभीरता बारे में बताया जा सकता है.

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अभी तक कोविड-19 का इलाज नहीं ढूंढा जा सका है.


इन दो संकेतों की अहम भूमिका
मांसपेशियों में गहरा दर्द जिसे मायाल्जिया (Mayalgia) भी कहा जाता है, भी बढ़ने लगती है और इसके साथ ही हीमोग्लोबिन जो खून में ऑक्सीजन को लाने ले जाने का काम करती है, का भी बाद में होने वाली श्वास संबंधी तकलीफों से संबंध पाया गया.

यह टूल न्यूयार्क जैसे शहर के अस्पतालों के लिए बहुत कारगर हो सकता है जहां मरीजों की संख्या अस्पतालों की क्षमता से ज्यादा तेजी से बढ़ रही है.

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Tags: Artificial Intelligence, Corona, Corona Virus, Coronavirus, Health, Health Explainer, Science

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