AI ने बताया कैसे विशाल ग्रहों में धातु बन गया हाइड्रोजन

AI ने बताया कैसे विशाल ग्रहों में धातु बन गया हाइड्रोजन
विशाल ग्रहों (Gaint planets) के आंतरिक भागों में बहुत अधिक दबाव से गैसीय हाइड्रोजन (Hydrogen) धातु में बदल जाता है. (तस्वीर: Pixabay)

हाइड्रोजन (Hydrogen) आम तौर एक गैस का रूप है, लेकिन शोधकर्ताओं ने आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस (artificial intelligence) से पता लगाया कि यह विशाल ग्रहों के अंदर धातु (Metal) के रूप में रहती है.

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  • Last Updated: September 11, 2020, 10:41 AM IST
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हाइड्रोजन (Hydrogen) ब्रहाण्ड का सबसे प्रमुख, अहम और प्रचुर तत्व है. पृथ्वी पर पानी का खास होने से यह जीवन का भी अहम हिस्सा है. आमतौर पर हाइड्रोजन गैसीय रूप में ही पाया जाता है. लेकिन कई बड़े ग्रह ऐसे हैं जहां हाइड्रोजन ठोस रूप में एक धातु की तरह मौजूद है. इस तरह के हाइड्रोजन का अध्ययन करना बहुत ही मुश्किल है, लेकिन आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस (artificial intelligence) यानि एआई (AI) और  क्वांटम मैकेनिक्स (quantum mechanics) की मदद से शोधकर्ताओं ने इस बारे में खास जानकारी हासिल की है.

मशीन लर्निंग ने की मदद
शोधकर्ताओं ने जाना है कि कैसे हाइड्रोजन इन ग्रहों में अत्याधिक दबाव के हालातों में धातु बन गया. यह बहुत घना हाइड्रोजन इस अवस्था में विद्युत सुचालक तक का बर्ताव करता है. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी, आईबीएम रिसर्च और EPFL ने मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग कर हाइड्रोजन परमाणुओं की अंतरक्रिया की हूबहु नकल की जिससे अति शक्तिशाली सुपरकम्प्यूटर के आकार और समय की सीमाओं से उबरा जा सके.

कहां पाया जाता है ऐसा हाइड्रोजन
उन्होंने पाया कि हाइड्रोजन परमाणु तेजी से बदलने के बजाए धीरे और आराम से बदलते हैं. इस शोध के नतीजे नेचर जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. ब्रह्माण्ड में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाले इस तत्व में एक एक प्रोटोन और एक इलेक्ट्रॉन होता है, लेकिन यह हमारे सौरमंडल के विशाल ग्रहों के आंतरिक हिस्सों में भी प्रमुखता से पाया जाता है. गुरू, शनि, यूरेनस और नेप्चूयन ग्रहों के अलावा ये बाह्यग्रहों में इस तरह से मौजूद रहता है.



कैसे बदलता है हाइड्रोजन
इन विशाल ग्रहों की सतह पर तो हाइड्रोजन एक आणविक गैस के रूप में ही मौजूद होता है, लेकिन ग्रहों के अंदर जाने पर लाखों गुना वायुमंडलीय दाब बन जाता है और हाइड्रोजन बदलाव की अवस्था में जाने लगता है . इस अत्याधिक दबाव के कारण हाइडोजन अणुओं के अंदर के कोवलेंट बॉन्ड टूट जाते हैं और गैस एक ऐसी धातु में बदल जाती है जो विद्युत सुचालक होती है.

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हमारे सौरमंडल (Solar System) के गुरू, शनि, यूरेनस और नेप्चूयन ग्रहों के अंदर हाइड्रोजन (Hydrogen) धातु रूप में है. तस्वीर: Pixabay)




क्या परेशानी आ रही थी अब तक
इस शोध के प्रमुख लेखक और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की कैवेंडिश लैबोरेटरी के डॉ बिंगक्विंग चेंग ने बताया, “हाइड्रोजन की धातु रूप में उपस्थिति एक शताब्दी पहले ही सैद्धांतिक तौर पर बता दी गई थी, लेकिन हम यह नहीं जान सके थे कि उसके धातु बनने की प्रक्रिया होती कैसी है. इसके लिए हमारे सामने लैब की परिस्थितियों में बहुत ही ज्यादा दबाव बनाने वाले हालात बनाने की मुश्किलें थीं जैसा की विशाल ग्रहों के आंतरिक हिस्सों होती हैं. इससे विशाल हाइड्रोजन के सिस्टम का पूर्वानुमान लगाना बहुत जटिल हो गया था.”

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एक बड़ी समस्या ये भी
प्रयोगकर्ताओं ने एक हीरे के एनविल सेल का उपयोग कर घने हाइड्रोजन का अन्वेषण करने का प्रयास किया, जिसमें दो हीरे एक संकुचित नमूने पर बहुत ही ज्यादा दबाव डालते हैं. वैसे तो हीरा पृथ्वी का सबसे कठोर पदार्थ है, लेकिन यह भी अत्याधिक दबाव और उच्चतम तापमान में यह उपकरण भी नाकाम हो जाता है, खासतौर पर जब यह हाइड्रोजन के संपर्क में आता है. इसी वजह से यह प्रयोग बहुत ही मुश्किल और खर्चीला भी हो गया था.

सैद्धांतिक रूप से आई ये चुनौती
सैद्धांतिक रूप से अध्ययन करना भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं था. क्वांटम मैकेनिक्स के समीकरणों से तो हाइड्रोजन परमाणुओं की गति को हल किया जा सकता था, लेकिन इस सिस्टम के बर्ताव की गणना करने के लिए बहुत ही शक्तिशाली कम्प्यूटर की जरूरत थी. इस सिस्टम में कुछ हजार परमाणुओं से कुछ ही नैनोसेकंड्स से ज्यादा की गणना होनी थी जो दुनिया के सबसे तेज सुपरकम्प्यूटर के बस की बात भी नहीं थी.

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वैज्ञानिकों ने पहले दो हीरों (Daimond) का उपयोग कर हाइड्रोजन (Hydrogen) पर अत्याधिक दबाव डालने की नाकाम कोशिश की थी. (तस्वीर: Pixabay)


ऐसे मिला रास्ता
इस अध्ययन में चेंग और उनके साथियों ने मशीन लर्निंग के जरिए हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच की अंतरक्रियाओं की नकल की जिससे की भारी गणनाओं की सीमा से उबरा जा सके. चेंग ने बताया कि उनकी को चौंकाने वाला नतीजा मिला और उन्होंने घने तरल हाइड्रोजन में आणविक स्तर पर धीरे धीरे लगातार और सहज बदलाव हो रहा है.

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इससे उन्हें इस बात का अंदाजा हो सकता कि ग्रहों के आंतरिक भागों में दबाव बढ़ते रहने से हाइड्रोजन कैसे धातु में धीरे-धीरे लेकिन लगातार बदलते रहे होंगे और उन्होंने अंततः एक विद्युत सुचालक धातु का आकार ले लिया होगा. यह अध्ययन मशीन लर्निंग, क्वांटम  मैकेनिक्स और सांख्यकीय मैकेनिक्स के बिना संभव नहीं था. अब शोधकार्ताओं का अगला लक्ष्य इस घने हाइड्रोजन से संबंधित अन्य सवालों के जवाब तलाशना है.
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