एयरबैग, जो अब हर भारतीय कार में होंगे जरूरी और बचाएंगे हमारी जान

दुर्घटना की स्थिति में 70 प्रतिशत लोगों की बच जाती है जान

News18Hindi
Updated: April 15, 2019, 2:30 PM IST
एयरबैग, जो अब हर भारतीय कार में होंगे जरूरी और बचाएंगे हमारी जान
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Updated: April 15, 2019, 2:30 PM IST
कार खरीदने से पहले हर ग्राहक का पहला सवाल होता है, सेफ्टी फीचर्स क्या हैं. सेफ्टी फीचर्स का नाम आते ही पहली चीज जो जेहन में आती है वह होती है एयर बैग. क्रैश की किसी भी स्थिति में व्यक्ति को गंभीर चोट या फिर मौत से बचाने में एयरबैग का महत्वपूर्ण रोल होता है. मारुति सुजूकी की कार ऑल्टो के10 में बड़ा बदलाव कर एयरबैग देने जा रही है. कंपनी ने घोषणा की है कि ऑल्टो के10 जल्द ही एयरबैग व अन्य फीचर्स के साथ उपलब्‍ध होगी. आइये जानते हैं एयरबैग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य.

कैसे काम करता है एयरबैग
# एयरबैग कुल मिलाकर चार पार्ट्स से बनाया जाता है-ये हैं सेंसर, इग्नीशन सिस्टम, एक्सप्लोसिव डिवाइस और नायलॉन बैलून.

# कार के बंपर से सेंसर जुड़ा होता है. उसको इस तरह प्रोग्राम किया जाता है कि तेज गति की स्थिति में क्रैश होने पर ये इग्‍नीशन सिस्टम को सक्रिय कर दे.

# इग्नीशन सिस्टम से एक्सप्लोसिव डिवाइस में एक नियंत्रित विस्फोट होता है. डिवाइस में टैबलेट के आकार के विस्फोटक होते हैं, विस्फोट होते ही नायलॉन के बैलून में हवा भर जाती है.

# यह बैलून स्टियरिंग व्हील में लगा होता है. तेजी से हवा भरने की स्थिति में स्टियरिंग व्हील का सेंटर कवर हट जाता है और चालक बैलून पर झूल जाता है, इससे उसको चोट नहीं के बराबर लगती है.

# यह पूरी प्रकिया बहुत तेजी से महज 50 मिलीसेकेंड में पूरी हो जाती है,जिससे चालक के स्टियरिंग से टकराने से पहले ही एयरबैग पूरी क्षमता से खुल जाते हैं.
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# कर्टेन एयरबैग जिन गाड़ियों में लगे होते हैं उन गाड़ियों में सेंसर चारों दरवाजों और पीछे के बंपर में भी दिया जाता है.

क्या है देश में सेफ्टी को लेकर नए नियम
सड़कों पर लगातार गाड़ियों की संख्या बढ़ने के साथ ही दुर्घटनाओं का आंकड़ा भी बढ़ रहा है. 2017 में आंकड़ों के अनुसार 1,47,913 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हुई.  करीब चार लाख 70 हजार लोग घायल हुए.

इतने ज्यादा सड़क हादसों को देखते हुए सरकार ने अब देश में वाहनों के लिए सुरक्षा नियम कड़े कर दिए हैं. अब जुलाई 2019 से सभी गाड़ियों में एयरबैग के साथ ही, स्पीड वार्निंग, सीट बैल्ट अलर्ट, रियर पार्किंग सेंसर जरूरी कर दिया गया है. एयरबैग को हर गाड़ी में लगाने के पीछे सबसे बड़ा मकसद ये है कि इससे दुर्घटना में मौत के अवसर 70 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं.

कब हुआ था एयरबैग का आविष्कार
दुनिया के पहले एयरबैग का पेटेंट जर्मनी के वॉल्टर लिंडर और अमेरिका के जॉन हैडरिक के नाम है. 1950 में बने इस एयरबैग में कंप्रेस्ड एयर भरी थी. ये बंपर पर चोट लगने की स्थिति में खुल जाता था. खुद चालक भी इसे खोल सकता था.

हालांकि ये इतना कारगर नहीं था क्यों‌कि ये ज्यादा तेजी से काम नहीं करता था. हादसे की स्थिति में चालक को काफी चोट आती थी. इसके बाद ऐलन ब्रीड ने 1968 में क्रैश सेंसिंग टेक्नोलॉजी का आविष्कार किया. इस तकनीक को एयरबैग से जोड़ा गया. ये एक कारगर सेफ्टी फीचर के तौर पर सामने आया.



फोर्ड ने किया था पहली बार एयरबैग का इस्तेमाल
1971 में फोर्ड कार कंपनी ने पहली बार एयरबैग का इस्तेमाल किया.  लेकिन एयरबैग लगी गाड़ियों को टेस्ट के लिए ही रखा गया और बेचा नहीं गया. बाद में शैवरले ने पहली बार 1973 में सरकारी इस्तेमाल के लिए जिन गाड़ियों का निर्माण किया, उसमें एयरबैग दिया गया. इसके बाद पहली कार जिसमें आम लोगों के लिए भी एयरबैग का इस्तेमाल किया गया वह थी ओल्डमोबाइल टॉर्नेडो.
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