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वायु प्रदूषण की वजह से कैसे मिला दुनिया का पहला मृत्यु का सर्टीफिकेट

वायु प्रदूषण की वजह से कैसे मिला दुनिया का पहला मृत्यु का सर्टीफिकेट

वायु प्रदूषण (Air Pollution)  दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन उसके कारण हो रही मौतें स्वीकारी नहीं जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वायु प्रदूषण (Air Pollution) दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन उसके कारण हो रही मौतें स्वीकारी नहीं जा रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

दुनिया में लाखों लोग हर साल वायु प्रदूषण (Air Pollution) के कारण मरते हैं. खुद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) इस बात को मानता है कि हर साल 42 लाख लोग वायु प्रदूषण के पैदा होने वाली बीमारियों मरते हैं. लेकिन अभी दुनिया में कहीं भी किसी व्यक्ति के मृत्य प्रमाण पत्र (Death Certificate) पर मौत का कारण वायु प्रदूषण नहीं लिखा जाता है. बल्कि अभी तक केवल एक ही बार ऐसा हुआ है जब किसी के मृत्यु प्रमाण पत्र में मौत की वजह से को वायु प्रदूषण लिखा गया है. लेकिन इसके लिए लड़ी कानूनी लड़ाई 7 साल तक खिंच गई थी.

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    इसी महीने हुए जलवायु परिवर्तन (Climate Change) पर हुए सम्मेलन में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने पर जोर दिया गया. दुनिया में हर तरफ वायु प्रदूषण भी भयावह स्थितियों में पहुंच रहा है. वायु प्रदूषण (Air Pollution) की वजह से बीमार होने वाले लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि तो हो ही रही है. इसकी वजह से मरने वालों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि दुनिया में एक ही बार किसी मौत के डेथ सर्टिफिकेट (Death Certificate) पर लिखा गया था कि मौत वायु प्रदूषण से हुई है. आइए जानते हैं कि क्या था वह मामला और यह कमाल कैसे हो गया.

    ऐसा कोई प्रावधान नहीं
    दुनिया के किसी भी देश में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि किसी के मरने के बाद उसके डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कारण वायु प्रदूषण लिखा जाता हो. लेकिन एक बार यह अनोखा काम हुआ है. साल 2013 ब्रिटेन में एक नौ साल की बच्ची को घातक अस्थमा की शिकायत हुई थी जिसके बाद उसके डेथ सर्टिफिकेट में उसकी मृत्यु का कारण वायु प्रदूषण लिखा गया.

    ऐतिहासिक फैसला
    लेकिन यह काम फौरन ही नहीं हो गया. लंदन में रहने वाली एला किसी डेबराह की मौत के सात साल बाद एक आदेश के जरिए उसके मृत्यु प्रमाण पर यह लिखने को कहा गया कि उसकी मौत की वजह वायु प्रदूषण था. इसके बाद ही एला का मृत्यु प्रमाण पत्र दुनिया का पहला ऐसा मामला हो गया जिरमें आधिकारिक तौर पर माना गया कि मृत्यु प्रदूषण की वजह से हुई थी.

    लड़नी पड़ी लंबी कानूनी लड़ाई
    माना जाने लगा था कि एला का मुत्यु प्रमाण पत्र उन लाखों लोगों के लिए एक बड़ी पहचान के रूप में सामने आएगा जो हर साल दुनिया भर में वायु प्रदूषण की वजह से मर रहे हैं. किकी डेबराह की मां रोजामंड ने अपने बेटी की मौत पर ब्रिटेन में प्रदूषण की समस्या पर लंबी लड़ाई लड़ी. 2014 में विशेषज्ञों ने ऐलान भी कर दिया था कि एला की मौद उसके श्वसन तंत्र की नाकामी की वजह से हुई थी. लेकिन रोजमंडल ने दूसरी जांच की मांग की और अंततः दिसंबर 2020 में उन्होंने यह लड़ाई जीती.

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    लंदन जैसे शहर में वाहनों से वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्तर तय मानकों से बहुत ही ज्यादा हो गया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    क्या साबित किया गया अदालत में
    अदालत के इस आदेश में माना गया कि एला की मौत भले ही गंभीर रूप से खराब हुए फेफड़ों के कारण हुई हो जो अस्थमा से पीड़ित थे, लेकिन उसकी वजह लंदन का वह वायु प्रदूषण था जो एला के इलाज के समय यूरोपीय यूनियन के मानकों के स्तर से कहीं ज्यादा खतरनाक था. एला को तीन साल के दौरान कम से कम तीस बार अस्पताल में ले जाना पड़ा.

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    अदालत ने माना पहली बार
    अदालत ने इस मामले में दिए फैसले में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि एला की मौत की प्रमुख वजह उसका ट्रैफिक उत्सर्जन को झेलना रहा था, इसी वजह से यह इस तरह का दुनिया का पहला और एकमात्र मामला हो गया था. दुनिया में वायु प्रदूषण की वजह से हर साल लाखों मौतें होती हैं. लेकिन ऐसा पहली बार ही हुआ था कि किसी के मृत्यु प्रमाण पत्र में वजह वायु प्रदूषण लिखी गई.

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    वायु प्रदूषण (Air Pollution) का स्वरूप रिहायशी इलाकों में खतरनाक होता जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े
    विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि हर साल वायु प्रदूषण की वजह से 70 लाख लोग मारे जाते हैं. जिस तरह की हवा में एला की मौत हुई, डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, वैसी हवा की वजह से स्ट्रोक, दिल की  बीमारी और फेफड़ों का कैंसर और लंबी श्वास की बीमारियां होती हैं जिनके कारण हर साल 42 लाख लोग मरते हैं. दिल्ली जैसे शहर में तो इस साल आपातकाल लागने की नौबत आ गई थी.

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    वहीं हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रीपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में हर पांच में एक मौत वायु प्रदूषण की वजह से होती है. एक अन्य शोध का कहना है कि साल 2017 तक हर साल दुनिया में 50 लाख लोग वायु प्रदूषण की वजह से मरते हैं और ये मौतें दुनिया में होने वाली कुल मौतों का 9 प्रतिशत है. लेकिन अभी तक डेथ सर्टिफिकेट पर वायु प्रदूषण को मौत का कारण लिखना शुरू नहीं किया गया है.

    Tags: Air pollution, Climate Change, Research, Science, UK

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