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कर्नाटक में गहराया जलसंकट, बेंगलुरु का रियल एस्टेट कारोबार भी आ सकता है चपेट में!

जलसंकट पर न्यूज़18 क्रिएटिव इलस्ट्रेशन

जलसंकट पर न्यूज़18 क्रिएटिव इलस्ट्रेशन

कर्नाटक में भीषण जलसंकट के मद्देनज़र नए निर्माण पर पाबंदी लगाने के मूड में आई राज्य सरकार से रियल एस्टेट कारोबारी नाखुश नज़र आ रहे हैं. ये भी जानिए कि कर्नाटक में कितना गहरा गया है जलसंकट.

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    कर्नाटक में सूखे का संकट गहरा चुका है और इसकी बानगी ये है कि हाईटेक सिटी कहे जाने वाले बेंगलुरु में पीने के पानी की भीषण समस्या पैदा हो गई है. अब शहर का रियल एस्टेट कारोबार जलसंकट की मार झेलने वाला है और सरकार पाबंदी लगाने के मूड में आ गई है. जलसंकट इतना भीषण हो चुका है कि स्कूलों में बच्चों के लिए पीने का पानी न होने के चलते छुट्टी करने, मिड डे मील बंद करने और किसानों द्वारा अपने दुधारू पशु बेचे जाने की खबरें भी आ चुकी हैं. जानें क्या है रियल एस्टेट पर ताज़ा संकट और कनार्टक में जलसंकट के हालात.

    पढ़ें : Exclusive: बंगलुरु में 5 साल के लिए नए कंस्ट्रक्शन लगाई जा सकती है रोक

    जलसंकट के मद्देनज़र हो सकता है कि बेंगलुरु में अगले पांच साल तक नए अपार्टमेंट भवनों का निर्माण न हो. कर्नाटक सरकार इस योजना पर विचार कर रही है कि नए भवनों को मंज़ूरी न दी जाए. उप मुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा है कि सरकार इस तरह के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, इस बात को ध्यान में रखते हुए कि कैसे अपार्टमेंट पानी उपलब्ध होने की सुनिश्चितता के बगैर बिके हैं.

    उधर, मौसम भी अन्य कई राज्यों की तरह ही कर्नाटक पर भी मेहरबान नहीं दिख रहा है. मौसम विभाग ने पहले 15 जून तक मानसून आने की बात कही थी, लेकिन अब 30 जून तक या उसके बाद बारिश होने की उम्मीद जताई गई है. तटीय कर्नाटक में ज़रूर कुछ बारिश हुई है, लेकिन जलसंकट से उबरने के लिए कनार्टक की निर्भरता अच्छी बरसात पर ही है.

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    सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है कि रिहायशी अपार्टमेंट्स के निर्माण पर पाबंदी लगाई जाए.


    क्या नए अपार्टमेंट नहीं बनेंगे?
    परमेश्वर ने गुरुवार को कहा, 'शहर में कई अपार्टमेंट्स हैं, लेकिन जब ये बेचे जाते हैं तो पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधा को लेकर कोई भरोसा नहीं दिलाया जाता. जलसंकट के चलते, ऐसे में लोगों को पीने का पानी टैंकरों से खरीदना पड़ता है जिससे त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा होता है. ऐसे में, इस प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है कि अगले पांच सालों तक के लिए शहर में नए अपार्टमेंट्स बनाने की मंज़ूरी न दी जाए'.

    परमेश्वर ने ये भी कहा कि राज्य सरकार के अफसर जल्द ही डेवलपरों से मिलकर इस प्रस्ताव पर बातचीत करेंगे और किसी नतीजे पर पहुंचेंगे. उनके मुताबिक 'पांच साल के बाद अपेक्षा के अनुसार शहर में कई स्रोतों से पर्याप्त पानी की व्यवस्था होगी और इस मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा'. हालांकि इस प्रस्ताव की चर्चा को लेकर डेवलपर इसे ज़ोर का झटका मान रहे हैं और खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं.

    सरकार के इस कदम से नाखुश हैं डेवलपर
    स्टर्लिंग डेवलपर्स के निदेशक रामनि शास्त्री का कहना है, 'बेंगलुरु अपनी ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ चुका है लेकिन योजना अधिकारियों को योजना बनानी होगी. वो अपना काम ज़रूर कर रहे हैं लेकिन 'मंज़ूरी नहीं दी जाएगी', ये कह देना बहुत आसान है. मुझे नहीं लगता कि ये कारगर कदम होगा. ये हमारा संवैधानिक अधिकार है'.

    शास्त्री ने ये भी कहा, 'मुझे नहीं लगता कि कोई भी बिल्डर कर्नाटक बिजली बोर्ड, सीवरेज बोर्ड और बेंगलुरु जल आपूर्ति विभाग के नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट के बगैर बिल्डिंग निर्माण कर रहा है. इसका मतलब ​कि सरकार को पहले ही पता होता है कि किस बिल्डिंग का प्रोजेक्ट चालू है और वो कब तक बनेगी. हम केवल मांग के मुताबिक अपनी सेवा देने वाले लोग हैं. सरकार को अपनी क्षमताएं खुद बढ़ाने की ज़रूरत है'.

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    कर्नाटक में भूमिगत जलस्तर बेहद नीचे जाने के कारण जलसंकट गहरा चुका है.


    कर्नाटक में भीषण जलसंकट के सबूत
    जून 2019 की शुरूआत में ही आ चुकी खबरों के हवाले से न्यूज़18 हिंदी ने बताया था कि राज्य के एमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के मुताबिक राज्य के 26 ज़िलों और 996 गांवों में राहत के तहत टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है. कर्नाटक के राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी सेंटर के मुताबिक राज्य के सभी 13 प्रमुख बांधों में पानी की कमी है और इसी कारण मौजूदा जलसंकट गहराता जा रहा है. भूमिगत जलस्तर में भी भारी कमी हुई है, इसलिए पिछले चार सालों से राज्य सूखे की समस्या से जूझ रहा है.

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    पहले कर्नाटक ने महाराष्ट्र से गुज़ारिश की थी कि कोएना और वारना रिज़र्वायर से उसके बेलागावी, विजयपुरा और बगलकोट ज़िलों में पेयजल आपूर्ति के लिए पानी दिया जाए. इसके बाद अब हाल में, महाराष्ट्र ने अलामट्टी डैम से पानी छोड़ा है ताकि कलबुर्गी, रायचूर और यादगीर ज़िलों में पानी की ज़रूरत पूरी हो सके.

    नदियां सूख चुकी हैं, मानसून पर नज़र
    न्यूज़ 18 की ही गत 16 मई की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार अब तक 3122 क्षेत्रों को भारी जलसंकट से ग्रस्त घोषित कर चुकी है, और इस संख्या में लगातार इजाफ़ा हो रहा है. एक चार्ट राज्य के प्रमुख जलस्रोतों में जलस्तर के संकट की सूचना देता है. इस खबर में केएसएनडीएमसी की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया गया कि कोस्टल बेल्ट की सभी प्रमुख नदियों नेत्रावती, फाल्गुनी, स्वर्णा, चक्रा, वारही, श्रावती, अघनाशिनी और काली में प्रवाह रुक चुका है.

    साथ ही, ग्राउंडवाटर लेवल यानी भूमिगत जलस्तर 30 से 40 मीटर तक नीचे जा चुका है, जो मेंगलुरु के जलस्तर की तुलना में ज़्यादा खतरनाक स्थि​ति है. उत्तर कर्नाटक को अब पूरी उम्मीद बारिश से है. अगर मानसून जल्दी आता है तो उत्तर कर्नाटक को उम्मीद रहेगी कि उन्हें महाराष्ट्र से पानी मिले.

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