जानिए अशोका यूनिवर्सिटी के बारे में? जो प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे के बाद चर्चाओं में है

हरियाणा के सोनीपत में अशोका यूनिवर्सिटी कला और विज्ञान संस्थान है (Photo- Ashoka university website)

हरियाणा के सोनीपत में अशोका यूनिवर्सिटी कला और विज्ञान संस्थान है (Photo- Ashoka university website)

आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के स्टूडेंट्स ने एक ऐसी यूनिवर्सिटी के बारे में सोचा, जहां से निकले युवा नोबल पुरस्कार की ओर बढ़ सकें. इस सोच के साथ ही अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) की नींव तैयार हुई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 23, 2021, 7:33 PM IST
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अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) में एक साथ दो प्रोफेसरों के इस्तीफे के विरोध में छात्र एकजुट हो गए हैं. वे आरोप लगा रहे हैं कि इस्तीफा राजनैतिक दबाव के कारण दिया गया और ये यूनिवर्सिटी में अभिव्यक्ति की आजादी पर वार है. प्रोफेसरों की वापसी के मांग के बीच अशोका यूनिवर्सिटी चर्चा में है. वैसे अपने अलग वैचारिक मॉडल के कारण साल 2014 में बनी ये यूनिवर्सिटी देश के नामी-गिरामी संस्थानों में गिनी जा रही है, जो उच्च शिक्षा में काम कर रहे हैं.

IIT के युवाओं ने एक सोच पर बात शुरू की

हरियाणा के सोनीपत में अशोका यूनिवर्सिटी कला और विज्ञान संस्थान है. ये निजी यूनिवर्सिटी है, जिसे यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) से मान्यता मिली हुई है. इस यूनिवर्सिटी की शुरुआत बड़े ही अलग ढंग से हुई. हुआ यूं कि IIT दिल्ली से पढ़े युवाओं के बीच चर्चा शुरू हुई कि देश के बाकी शैक्षणिक संस्थानों से इतर एक अलग तरह का संस्थान शुरू हो, जो उच्च शिक्षा में ज्यादा बेहतर ढंग से काम कर सके.

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कहा गया प्रोजेक्ट नोबल 

साथ ही साथ इसमें अभिव्यक्ति की आजादी कुछ इस तरह से मिले और आकार ले कि यहां पढ़कर निकले बच्चे आगे चलकर नोबल पुरस्कार तक पहुंच सकें. इस सोच के साथ इस प्रोजेक्ट को प्रोजेक्ट नोबल नाम दिया गया. IIT के युवा इस प्रोजेक्ट को लेकर पहुंचे इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के डीन प्रमथ राज सिन्हा के पास. इस बीच दो और शिक्षाविद प्रमथ के पास इसी तरह का विचार लेकर पहुंचे. शिक्षाविद और उद्योगपति प्रमथ ने दोनों विचारों को जोड़ दिया और इस तरह से यूनिवर्सिटी की नींव डली.



iit delhi
आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi)


लिबरल आर्ट में शिक्षा 

शुरुआत में यूनिवर्सिटी को इंजीनियरिंग और तकनीक से जुड़ा संस्थान बनाने की सोची गई लेकिन फिर ये कला की ओर ज्यादा मुड़ गया. इसका मकसद युवाओं को केवल नौकरी पाने के लायक बनाना नहीं, बल्कि देश और हालातों को लेकर ज्यादा से ज्यादा जागरूक बनाना हो गया. खासतौर पर लिबरल आर्ट्स में विशेष काम करने के मामले में ये देश के चुनिंदा संस्थानों में है. लिबरल आर्ट्स यानी यहां इतिहास, लेखन, समाज शास्त्र, मनोविज्ञान और तर्क शास्त्र सिखाया जाता है.

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25 एकड़ में फैला है कैंपस 

अब बात करते हैं कि यूनिवर्सिटी के इंफ्रास्ट्रक्चर की. सोनीपत की राजीव गांधी एजुकेशन सिटी में बनी ये यूनिवर्सिटी लगभग 25 एकड़ में फैली हुई है. यूनिवर्सिटी का डिजाइन अमेरिकी वास्तु संस्था पर्किंसन्स इस्टमैन ने बनाया. काफी व्यवस्थित ढंग से बनी इस यूनिवर्सिटी में क्लासरूम और हॉल जैसे स्ट्रक्टचर के अलावा हरियाली का भी उतना ही ध्यान रखा गया है ताकि पढ़ने वाले लोग प्रकृति से जुड़े रहें.

Pratap Bhanu Mehta
दुनिया के कई ख्यात विश्वविद्यालय प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे को दुखद बता रहे हैं


छात्रों और प्रोफेसरों के बीच कोई भेदभाव नहीं

वैसे इन तमाम खूबियों के बीच सबसे खास बात ये है कि अशोका यूनिवर्सिटी पूरी तरह से डोनेशन यानी दान पर चलती है. इसके अलावा यहां पढ़ने-पढ़ाने के दौरान कोई भेदभाव नहीं होता. जिसे भी किसी बात की जानकारी है, वो इसे साझा करेगा और प्रोफेसर भी उसे सुनेंगे. अशोका यूनिवर्सिटी की वेबसाइट के अनुसार यहां फिलहाल 2250 बच्चे कैंपस में हैं, जो कि 30 राज्यों से हैं. इनके अलावा यहां विदेशी युवा भी डिग्री लेने आ रहे हैं, जो 27 अलग-अलग देशों से हैं.

इसलिए है चर्चा में 

यूनिवर्सिटी की फाउंडिंग बॉडी में 70 उद्योगपति जुड़े हुए हैं. इनमें से ज्यादातर का शिक्षा के क्षेत्र में सीधा दखल रहा है और वे जाने-माने शिक्षाविद रहे हैं. ये सदस्य लगातार राजनीति और सामाजिक बदलावों पर खुलकर बोलने के लिए जाने जाते रहे. हालांकि इस बीच ही ताजा विवाद उठ खड़ा हुआ, जिसमें दो प्रोफेसरों, प्रताप भानु मेहता और अरविंद सुब्रमण्यन ने एक के बाद एक इस्तीफा दे दिया. प्रोफेसर मेहता लगातार अखबारों में कॉलम लिखते रहे, जिनमें वो इस बात पर मुखर रहे कि मौजूदा सरकार की नीतियां अभिव्यिक्ति की आजादी का हनन कर रही हैं. उन्होंने एकाएक इस्तीफा दे दिया. इसके तुरंत बाद ही यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरविंद सुब्रमण्यम ने भी इस्तीफा दे दिया.

प्रोफेसरों के इस्तीफे के बाद से अशोका यूनिवर्सिटी सुर्खियों में आ गई. यहां तक कि दुनिया के कई ख्यात विश्वविद्यालय जैसे हार्वर्ड और येल जैसे संस्थान प्रताप भानु मेहता के इस्तीफे को दुखद बता रहे हैं. इसी कड़ी में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी बयान दे दिया कि उनका जाना देश में अभिव्यक्ति की आजादी के घटने का प्रतीक है.
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