Explained: इंटरनेट की वो अंधेरी दुनिया, जहां बिकने लगे वैक्सिनेशन के फर्जी सर्टिफिकेट

डार्कनेट पर कोविड वैक्सिनेशन के फर्जी सर्टिफिकेट बिक रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

डार्कनेट पर कोविड वैक्सिनेशन के फर्जी सर्टिफिकेट बिक रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)

डार्कनेट (dakr-net) पर न केवल कोरोना वैक्सीन मनचाहे दामों पर बेची जा रही है, बल्कि वैक्सिनेशन के नकली सर्टिफिकेट (coronavirus vaccine fake certificate on sale) भी जारी हो रहे हैं. ये उन लोगों के लिए हैं, जो वैक्सीन लगाए बगैर रुटीन में लौटना चाहते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 8:35 AM IST
  • Share this:
कोरोना के एकाएक बढ़े मामलों ने देशों की चिंता दोबारा बढ़ा दी हैं. इस बीच तेजी से चलते टीकाकरण अभियान के बीच एक नई समस्या दिख रही है. दरअसल इंटरनेट पर कोरोना के नकली सर्टिफिकेट बेचे जा रहे हैं ताकि वैक्सीन से डरे हुए लोग बगैर टीकाकरण के ही इंटरनेशल ट्रैवल कर सकें, या फिर सामान्य रुटीन पर लौट सकें. साइबर सिक्योरिटी डार्क नेट के इस खतरे को लेकर काफी डरी हुई है.

मुश्किलों के बीच साइबर हमला 

कोरोना महामारी ने सालभर में दुनियाभर की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा दी है. अब इससे उबरने के लिए टीकाकरण ही एकमात्र तरीका सोचा जा रहा है. ज्यादा से ज्यादा लोगों में एंटीबॉडी बनने के बाद बड़ी आबादी में हर्ड इम्युनिटी आ जाएगी. इससे वायरस का ग्राफ अपने-आप नीचे होते हुए खत्म हो सकता है. यही कारण है कि देश एक-दूसरे से वैक्सीन खरीदकर तेजी से वैक्सिनेशन ड्राइव चला रहे हैं. दूसरी ओर साइबर क्रिमिनिल्स ने इसमें भी फायदा खोज लिया.

ये भी पढ़ें: कोविशील्ड के डोज में फर्क के बीच नई गाइडलाइन जारी, जानिए सभी सवालों के जबाव 
क्या-क्या बिक रहा है यहां 

डार्कनेट पर न केवल कोविड की वैक्सीन, बल्कि नकली सर्टिफिकेट भी बिक रहे हैं. अलग-अलग देशों की वैक्सीन के विज्ञापन यहां मिलेंगे, जिनकी कीमत अलग-अलग है. फिलहाल ये बात पक्की नहीं हो सकी है कि चुपके से बिक रही ये वैक्सीन भी असली हैं या नहीं. ऐसे में लोग अगर वैक्सीन लेते भी हैं तो वे नकली वैक्सीन के कारण बीमारी के खतरे में रहेंगे.

vaccine certificate darknet
ये बात पक्की नहीं हो सकी है कि चुपके से बिक रही ये वैक्सीन भी असली हैं या नहीं- (Photo- news18 English via AP)




सर्टिफिकेट की भी बिक्री 

इससे भी बड़ा खतरा ये है कि डार्कनेट पर कोविड वैक्सिनेशन के फर्जी सर्टिफिकेट बिक रहे हैं. इसका अंदेशा पहले भी लगाया जा चुका था कि वैक्सीन लेना नापसंद करने वाले समुदाय के लिए साइबर क्रिमिनल्स ऐसा कर सकते हैं. वे एंटी-वैक्सर्स (वैक्सीन के खिलाफ खड़े लोग) की भावनाओं का फायदा उठाते हुए नकली कागज बेचने में लगे हैं.

ऐसे लुभाया जा रहा एंटी-वैक्सर्स को 

कई विक्रेताओं ने दावा किया कि वो कोविड-19 टेस्ट की फर्जी रिपोर्ट दे सकते हैं. वो दावा करते हैं कि विदेश जाने वालों के लिए या नौकरी के लिए आवेदन करने वालों के लिए वे नेगेटिव कोविड टेस्ट रिपोर्ट देते हैं. दो नेगेटिव टेस्ट रिपोर्ट खरीदें और एक रिपोर्ट मुफ्त पा सकते हैं. बता दें कि फिलहाल जितने भी इंटरनेशनल ट्रैवल शुरू हुए हैं, उनमें कोविड-निगेटिव या वैक्सिनेशन की रिपोर्ट मांगी जा रही है. इसी का फायदा अपराधी लगा रहे हैं. क्लाइंट को केवल अपना नाम, पहचान के लिए कोई ID और वो तारीख सुझानी होती है, जिसमें वे खुद को वैक्सीन लगी दिखाना चाहते हों.

ये भी पढ़ें: Explained: वैक्सीन आने के बावजूद क्यों बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले? 

पहले भी आया था डार्कनेट का जिक्र 

कोरोना के पीक की शुरुआत में भी डार्कनेट का नाम उछला था. ऐसी कई घटनाएं हुईं, जिनमें डार्क नेट पर अपराधी कोरोना से रिकवर हुए मरीज का खून और मास्क, वेंटिलेटर जैसी जरूरी चीजें तक बेचते दिखे हैं. Australian Institute of Criminology ने डार्क नेट पर इस खून की अवैध बिक्री का खुलासा किया था. साथ ही अपराधी मास्क जैसी जरूरी चीजें अस्पताल से चुराकर ऊंची कीमत पर यहां बेचते रहे.

vaccine certificate darknet
डार्कनेट पर वे लोग हैं, जिनके मस्तिष्क में किसी भी तरह की खुराफात रहती है- सांकेतिक फोटो (pixabay)


क्या है डार्कनेट और कैसे काम करता है

यह इंटरनेट की दुनिया का ऐसा सीक्रेट संसार है, जहां कुछ ही ब्राउजर के जरिए पहुंचा जा सकता है और ये सर्च इंजन में भी नहीं आता है. नेट का ये खुफिया संसार काफी फैला हुआ है. साल 2015 में लंदन की किंग्स यूनिवर्सिटी ने इसपर 5 हफ्ते तक शोध किया. इतने ही दिनों में 2,723 डार्क वेब साइट्स का पता लग गया. वक्त के साथ-साथ हालात और बिगड़े.

तेजी से बढ़ी अपराधियों की संख्या

साल 2019 की एक रिसर्च, जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ सर्रे के डॉक्टर माइकल मैकगुर्वेस ने किया था, इसमें कई बातें निकलकर आईं. जैसे साइबर क्रिमिनल्स की तेजी से बढ़ी संख्या और गलत कामों की ओर युवाओं का बढ़ता रुझान. Tor Internet के जरिए लगातार दुनियाभर के लोग इससे जुड़ने लगे हैं, जिनके मस्तिष्क में किसी भी तरह की खुराफात रहती है.

ये भी पढ़ें: Explained: क्या है वैक्सीन का बूस्टर शॉट और क्यों जरूरी है?    

क्या चलता है इंटरनेट की इस अंधेरी दुनिया में

डार्क नेट पर अपराधी क्रेडिट कार्ड खरीदते हैं और लाखों का चूना लगा जाते हैं. यहां दुनिया की किसी भी किस्म का नशा मिल पाता है. यहां कंप्यूटर और कई तरह के अकाउंट हैक हो सकते हैं. यहां पर हैकर्स भी मिल जाते हैं. यहां तक कि लाइफटाइम नेटफ्लिक्स प्रीमियम अकाउंट भी खरीदा जा सकता है, जो चोरी से यहां पर उपलब्ध होता है.

डार्क वेब की दुनिया अपने-आप में काफी रहस्यमयी है. इसका इस्तेमाल खुद में अवैध नहीं क्योंकि अज्ञात होने के बाद भी आपके पास एनक्रिप्शन होता है लेकिन डार्क वेब के जरिए आप जिस काम से जुड़ रहे हों, वो अवैध हो सकता है. जैसे किसी के क्रेडिट कार्ड का पासवर्ड लेना, नशे की खरीद-फरोख्त से जुड़ना या पोर्नोग्राफी में शामिल हो जाना. अब कोरोना महामारी ने अपराधियों को नया मौका दे दिया है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज