ईमानदार इंजीनियर से ‘देशद्रोही’ बनने की दिलचस्प कहानी

जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) खत्म करने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहली बार बड़ी कार्रवाई की है और एक विधायक इंजीनियर राशिद (Engineer Rashid) को गिरफ्तार किया है. इंजीनियर राशिद को Terror Funding के मामले में गिरफ्तार किया गया है...

News18Hindi
Updated: August 10, 2019, 11:25 AM IST
ईमानदार इंजीनियर से ‘देशद्रोही’ बनने की दिलचस्प कहानी
इंजीनियर राशिद को टेरर फंडिंग के मामले में गिरफ्तार किया गया है
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Updated: August 10, 2019, 11:25 AM IST
जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Article 370) खत्म करने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहली बार सबसे बड़ी कार्रवाई की है. एनआईए ने नॉर्थ कश्मीर से स्वतंत्र रूप से चुनकर आए विधायक इंजीनियर राशिद (Engineer Rashid) को गिरफ्तार किया है. अनुच्छेद 370 हटने के बाद एनआईए ने पहली बार किसी सक्रिय नेता और विधायक को गिरफ्तार किया है.

इंजीनियर राशिद को टेरर फंडिंग के एक मामले में गिरफ्तार किया गया है. राशिद से एनआईए पिछले एक हफ्ते से पूछताछ कर रही थी. उनपर आरोप है कि कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने पाकिस्तान से पैसे लिए. पैसे दिने वालों में लश्कर ए तैयबा का मुखिया हाफिज सईद का नाम भी है.

देश के सबसे बड़े दुश्मन हाफिज सईद से पैसे लेकर इंजीनियर राशिद ने घाटी में गड़बड़ी फैलाने का काम किया. अनुच्छेद 370 के खात्मे के बाद कानून और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन तौर पर कश्मीर के 800 नेताओं को हिरासत में लिया गया है. एनआईए के पास इंजीनियर राशिद के खिलाफ पुख्ता सबूत हैं.


कश्मीर के बड़े नेता रहे हैं इंजीनियर राशिद

इंजीनियर राशिद कश्मीर के हंदवाड़ा में लंगेट से विधायक हैं. उन्हें कश्मीर के दिग्गज नेताओं में से एक माना जाता है. 2008 में वो पहली बार सक्रिय राजनीति में उतरे थे. पहली बार में ही उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के बड़े नेता शरीफ दिन शरीक और पीडीपी के नेता मुहम्मद सुल्तान को हराया था. 2015 में वो उसी विधानसभा क्षेत्र से एक बार फिर जीते. वो जम्मू-कश्मीर आवामी एत्तिहाद पार्टी के सर्वेसर्वा हैं.

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इंजीनियर राशिद के खिलाफ NIA के पास पुख्ता सबूत हैं


इंजीनियर राशिद ने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज सोपोर से पढ़ाई की है. उन्होंने 1991 में गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज से 3 साल की डिप्लोमा इंजीनियरिंग की है. वो जम्मू-कश्मीर कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन में जूनियर इंजीनियर के पद पर काम कर चुके हैं. काम के दौरान उनकी छवि एक ईमानदार इंजीनियर की थी. 2008 में कंस्ट्रक्शन इंजीनियर की नौकरी छोड़कर उन्होंने राजनीति में कदम रखा.
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2005 में इंजीनियर राशिक को एक आंतकवादी को सपोर्ट करने के आरोप में एसओजी ने गिरफ्तार किया था. उनपर देशद्रोही गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगा था. बाद में श्रीनगर की अदालत ने मानवीय आधार पर उन्हें सारे आरोपों से बरी कर दिया था. उस वक्त इंजीनियर राशिद ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने उनसे डेढ़ लाख रुपए लेकर उन्हें छोड़ा था. डेढ़ लाख रुपए के लिए उन्हें अपनी गाय और कुछ जमीन बेचनी पड़ी थी.

विधानसभा में हुई थी इंजीनियर राशिद की पिटाई

जम्मू कश्मीर विधानसभा में इंजीनियर राशिद की बीजेपी विधायकों ने पिटाई कर दी थी. उन्होंने बीफ बैन होने के बावजूद गवर्नमेंट सर्किट हाउस में बीफ पार्टी दी थी. जिसकी वजह से बीजेपी के नेता नाराज थे. दिल्ली के प्रेस क्लब में भी उनपर काली स्याही फेंकी गई थी. उन्होंने कश्मीर के उधमपुर में हुई एक लिचिंग की घटना पर विवादित बयान दिया था. जिसकी वजह से उन्हें नाराजगी झेलनी पड़ी.

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इंजीनियर राशिद बारामूला से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं


इंजीनियर राशिद पर अलगाववादियों के साथ सांठगांठ के पहले भी आरोप लगते रहे हैं. वो कश्मीर में जनमत संग्रह के हिमायती रहे हैं. उन्होंने बारामूला से लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे. कश्मीर से पूर्व आईएएस अफसर और नेता शाह फैसल ने भी उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया था. राशिद ने बड़ी-बड़ी रैलियां करके केंद्र सरकार पर हमले किए थे. लेकिन इसके बावजूद वो हार गए.

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First published: August 10, 2019, 9:50 AM IST
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