केदारनाथ त्रासदी: जब साल 2013 में सैकड़ों लोगों को उफनती नदी ने लील लिया

साल 2013 केदारनाथ धाम में भारी बारिश के बीच मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप दिखाया था

साल 2013 केदारनाथ धाम में भारी बारिश के बीच मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप दिखाया था

Uttarakhand floods: साल 2013 केदारनाथ धाम (Kedarnath shrine) में भारी बारिश के बीच मंदाकिनी नदी (mandakini river) ने विकराल रूप दिखाया था. जब सेना ने लाखों लोगों को रेस्क्यू किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 7, 2021, 7:22 PM IST
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mउत्तराखंड के चमोली में हिमखंड टूटने के कारण आई बाढ़ ने कहर बरपा दिया है. इससे हजारों लोगों के प्रभावित होने का अनुमान लगाया जा रहा है. इधर तबाही के लगातार आ रहे वीडियो केदारनाथ त्रासदी की याद दिला रहे हैं. साल 2013 केदारनाथ धाम में भारी बारिश के बीच मंदाकिनी नदी ने विकराल रूप दिखाया था. हादसे में 6 हजार से ज्यादा लोग लापता हो गए थे, जिसके कारण मारे जाने वालों का आधिकारिक आंकड़ा भी साफ नहीं.

क्या हुआ था आज से 7 साल पहले

तब जून 13 से लेकर 17 के बीच उत्तराखंड में काफी बारिश हुई थी. ये बारिश औसत से ज्यादा थी. इस दौरान वहां का चौराबाड़ी ग्लेशियर पिघल गया था, जिससे मंदाकिनी नदी का जलस्तर देखते ही देखते बढ़ने लगा. इस बढ़े हुए जलस्तर ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पश्चिमी नेपाल का बड़ा हिस्सा अपनी चपेट में ले लिया. तेजी से बहती हुई मंदाकिनी का पानी केदारनाथ मंदिर तक आ गया.

kedarnath uttarakhand floods
उत्तराखंड के चमोली में हिमखंड टूटने के कारण आई बाढ़ ने कहर बरपा दिया है

नदी के रास्ते हुए थे निर्माण 

यहां पर ये बात जानना जरूरी है कि मंदाकिनी सालों से पूर्वी ओर बहती आ रही थी. लेकिन बाढ़ में ये पश्चिमी वाहिका की ओर भी बढ़ी. इससे रास्ते में हो चुके निर्माण कार्य भी ध्वस्त होते चले गए. बता दें कि नदी की घाटी काफी चौड़ी रहती है. अगर नदी में सौ सालों के भीतर एकाध बार भी बाढ़ आई हो तो उसके बाढ़ग्रस्त रास्ते से सावधान रहने की जरूरत होती है लेकिन मंदाकिनी के मामले में हम थोड़ा लापरवाह हो चुके थे. रास्ते में होटल, लॉज से लेकर छोटे गांव भी बस चुके थे. तब केदारनाथ त्रादसी के समय इस लापरवाही का असर भी दिखा.

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भयावह था मंजर

इधर बारिश भी लगातार 5 दिनों तक होती रही, जिससे पहाड़ी नदियों का जलस्तर भी घटने का मौका नहीं मिला. इससे केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री और हेमकुंड साहिब जैसी जगहों पर कहर बरपा. सैकड़ों लोग मारे गए. हजारों लोग बह गए और लापता ही हैं. लाखों लोगों को रेस्क्यू किया गया. लगभग 110000 लोगों को सेना ने बचाया. लाखों का घर-बार सब खत्म हो गया.

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मंदिर को आंशिक नुकसान 

इस दौरान आठवीं सदी में बने केदारनाथ मंदिर को भी नुकसान पहुंचा था. मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से प्रमुख है, जिसमें करोड़ों लोगों की आस्था है. हालांकि ये नुकसान आंशिक ही था. बाद में कई शोध संस्थानों ने ये समझने की कोशिश की कि आखिर इतनी विकराल आपदा में मंदिर कैसे सुरक्षित रहा. इसके पीछे कई कारण दिए गए, जिसमें मंदिर की भौगोलिक स्थिति से लेकर कईयों ने दैवीय चमत्कार तक कह दिया.

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उत्तराखंड में तेजी से बहती हुई मंदाकिनी का पानी केदारनाथ मंदिर तक आ गया था


कई गांव हमेशा के लिए मिट गए

केदारनाथ आपदा ने कई गांवों को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था. जैसे केदारनाथ जाने वाला पैदल मार्ग रामबाड़ा और गरुड़चट्टी से होकर गुजरता था. त्रासदी के दौरान बाढ़ से मंदाकिनी नदी की उफनती लहरों ने रामबाड़ा का अस्तित्व ही खत्म कर दिया. इसके बाद सालों निर्माण कार्य चला और साल 2018 में ही ये रास्ता दोबारा तैयार हुआ.

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सेना ने किया था बचाव कार्य

आंकड़ों के बीच एक बार ये भी जानते हैं कि इस तबाही के समय में बचाव कार्य किस पैमाने पर चला. मंदाकिनी के उफनने की घोषणा होते ही तुरंत अलर्ट जारी हो गया. इसमें रेस्क्यू के लिए सेना से 10000 जवान, नेवी के गोताखोरों से लेकर एयरफोर्स के 45 विमान भी लगे. तस्वीरें दिखने पर आज भी रोमांच हो आता है कि कैसे जवान घायलों को बचाकर कंधे पर लादे ला, ले जा रहे थे. एक लाख से ज्यादा लोगों की जान सेना ने बचाई तो 30 हजार के आसपास लोगों को पुलिस ने मदद दी. ये राहत कार्य लगभग दो महीने तक चलता रहा था.

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केदारनाथ आपदा ने कई गांवों को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया था


साल 2019 में खूब तीर्थयात्री पहुंचे 

आपदा के दो सालों तक केदारनाथ दर्शन के आने वालों की संख्या में भारी गिरावट आई. लेकिन साल 2019 में पहली बार दस लाख से अधिक यात्री केदारनाथ धाम में दर्शनों के लिए पहुंचे. ये अब तक का सबसे बड़ी संख्या मानी जाती है. ये भी बता दें कि साल 2013 के बाद से केदारनाथ और आसपास के इलाकों में काफी बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हुए, जो कि पहले से ज्यादा समझ-बूझ से होने का दावा किया जा रहा है.

अब भी त्रादसी लोगों के जहन में ताजा है

इसपर समय-समय पर बात होती है कि आखिर आपदा की असल वजह क्या थी. ज्यादातर लोग बारिश और भूस्खलन को इसकी वजह मानते हैं, वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ों पर लोगों की बढ़ती आमद, प्रदूषण, नदियों में प्लास्टिक का जमा होना, नदियों के रास्ते (फ्लड-वे) में इमारतें बनाने को इस भयावह मंजर का जिम्मेदार मानते हैं. यानी विशेषज्ञों के मुताबिक ये कहर प्राकृतिक कम और मानवजन्य ज्यादा था.
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