KBC सवाल: कौन-सी नदी तिब्बत, पाकिस्तान और भारत से होकर बहती है?

भारत और पाकिस्तान सिंधु नदी को साझा करते हैं
भारत और पाकिस्तान सिंधु नदी को साझा करते हैं

भारत और पाकिस्तान सिंधु नदी (Indus River) को साझा करते हैं, वहीं भारत और चीन के बीच ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra river) बहती है. अक्सर इन नदियों को लेकर देशों में बखेड़ा होता रहा है.

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  • Last Updated: October 20, 2020, 5:20 PM IST
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कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati) के 12वें सीजन में एक दिलचस्प सवाल नदी को लेकर पूछा गया कि कौन-सी नदी तिब्बत, पाकिस्तान और भारत से होकर बहती है. इसका जवाब है सिंधु नदी. अंग्रेजी में इंडस रिवर (Indus River) कहलाने वाली ये नदी एशिया की सबसे लंबी नदियों में से एक है, जो तीन देशों से होते हुए बहती है.

नदी कहां से घूमते हुए जाती है 
लगभग 3,180 किलोमीटर लंबाई वाली ये नदी तिब्बत के मानसरोवर के निकट सिन-का-बाब से निकलती है. यहां से होते हुए यह नदी तिब्बत और कश्मीर के बीच बहती है. यहां से दियामीर (नंगा पर्वत) के उत्तरी भाग से घूमते हुए नदी दक्षिण-पश्चिम में पाकिस्तान के बीच से होते हुए अरब सागर में मिल जाती है.

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कितना हिस्सा, किस देश में


झेलम, चिनाव, रावी, व्यास और सतलुज नामक पांच नदियां सिंध नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं. इनके अतिरिक्त गिलगिट, काबुल, स्वात, कुर्रम, टोची, गोमल, संगर जैसी कई सहायक नदियां और भी हैं. नदी का एरिया लगभग 11, 65,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसका 47 प्रतिशत पाकिस्तान में, जबकि 39 प्रतिशत भारत में है. इसके अलावा चीन में 8 प्रतिशत है. कुछ हिस्सा अफगानिस्तान भी जाता है, जो लगभग 6 प्रतिशत है.

झेलम, चिनाव, रावी, व्यास और सतलुज नामक पांच नदियां सिंध नदी की प्रमुख सहायक नदियां हैं


सबसे पुरानी सभ्यताओं की नदी है सिंधु
पाकिस्तान की सबसे लंबी और एक तौर पर राष्ट्रीय नदी, सिंधु का इतिहास काफी पुराना है. ये दुनिया की सबसे प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक थी. इसके आसपास अनेकों सभ्यताएं विकसित हुईं. हड़प्पा और मोहन जोदड़ो इसी नदी के आसपास फले-फूले. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक आज भी लगभग 30 करोड़ लोग इस नदी के आसपास रहते और इसी के जरिए अपनी गुजर-बसर करते हैं.

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सिंधु नदी की साझेदारी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक समझौता भी हुआ है. असल में आजादी और बंटवारे के बाद दोनों देशों में पानी को लेकर विवाद शुरू हो गया.

भारत-पाक के बीच नदी विवाद
आखिरकार साल 1960 में दोनों देशों के बीच सिंधु जल संधि हुई. संधि के तहत 6 नदियों के पानी का बंटवारा तय हुआ, जो भारत से पाकिस्तान जाती हैं. 3 नदियों, रावी, व्यास और सतलज के पानी पर भारत को पूरा हक मिला. वहीं सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के बहाव पर भारत किसी तरह की बाधा नहीं डालेगा, ये पक्का हुआ. 2 साल पहले पुलवामा में हुए फिदायीन (आत्मघाती) हमले में CRPF के 42 जवानों की शहादत के बाद भारत ने पानी रोकने की बात की थी, हालांकि ऐसा किया नहीं गया.

भारत और चीन ब्रह्मपुत्र नदी को साझा करते हैं


चीन के साथ भी बांटता है भारत एक नदी 
भारत और चीन ब्रह्मपुत्र नदी को साझा करते हैं. दक्षिणी तिब्बत से निकलने वाली इस नदी को वहां यारलुंग जागपो कहते हैं. वहां से होते हुए ये नदी कई धाराओं में बंटते हुए भारत के अरुणाचल प्रदेश में आती है. यहां इसे सियांग के नाम से जाना जाता है. वहां से आगे बढ़ते हुए नदी जब मैदानी इलाकों तक जाती है तो नाम बदलकर दिहांग हो जाता है. वैसे असम के लोग इसे ब्रह्मपुत्र के नाम से ही जानते हैं. नदी यहां से बहते हुए बांग्लादेश भी जाती है, जहां इसे जमुना कहते हैं. यहां से ये बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है.

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ब्रह्मपुत्र नदी लगभग 2900 किलोमीटर में फैली है. इसके साथ भारतीय हिंदू माइथोलॉजी के भी कई किस्से-कहानियां हैं. जैसे भारत में ये अकेला नद है, न कि नदी. वहीं भारतीय नदियों के नाम स्त्रीलिंग में होते हैं.

चीन ने ऊपर बना रखे हैं बांध
हर जगह अपनी दादागिरी दिखा रहा चीन ब्रह्मपुत्र नदी को लेकर भी अलग रवैया अपना रहा है. दरअसल उसने तिब्बत में इसके उद्गम के पास ही, जहां इसे यारलुंग जागपो कहा जाता है, वहां एक विशाल बांध बनाया है. यहीं चीन और भी बांध तैयार कर रहा है. इस तरह से नदी ऊपरी हिस्से में बंध गई है और अगर चीन की मंशा खराब हो तो वो अरूणाचल के हिस्से में भयंकर जल-प्रलय भी ला सकता है.

नदियों को लेकर साल 1966 में फिनलैंड में एक समझौता हुआ था- सांकेतिक फोटो (pxhere)


चीन ने दिखाई अपनी नीयत
चीन ने कुछ समय पहले इसे लेकर भारत के साथ कोई हाइड्रोलॉजिकल डाटा भी साझा करने से इनकार कर दिया. बता दें कि बांध बनाने के दौरान और उसके बाद भी जो देश नदी को साझा कर रहे हों, उन्हें सारी जानकारी दी जाती है. ये जानकारी पानी के स्तर को लेकर होती है ताकि अगर बारिश के साथ बाढ़ के हालात पैदा हों तो उससे बचाव के उपाय किए जा सकें. जानकारी मानसून और गैर-मानसून दोनों ही मौसमों में दी जाती है.

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कैसे होता है नदी के पानी का बंटवारा 
वैसे इस सबके बीच ये जानना भी जरूरी है कि आखिर नदी के पानी पर देश कैसे हक जताते हैं या नदी का बंटवारा कैसे होता है. तो बता दें कि राईपेरियन देश को ही नदी के पानी पर हक होता है. यानी वो देश जहां से नदी निकलती हो या जहां से उसका बड़ा हिस्सा बहता हो. किन्हीं भी दो या तीन देशों से बहने वाली नदियों को लेकर साल 1966 में फिनलैंड में एक समझौता हुआ था. इसे हेलसेंकी गाइडलाइन कहते हैं. इसी के आधार पर सारे अन्तरराष्ट्रीय जल विवाद निपटाए जाते हैं.
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