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क्या है सुन्नी वक्फ बोर्ड, जिसे राममंदिर मामले में 5 एकड़ जमीन दी जा रही है

News18Hindi
Updated: February 6, 2020, 12:03 PM IST
क्या है सुन्नी वक्फ बोर्ड, जिसे राममंदिर मामले में 5 एकड़ जमीन दी जा रही है
अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन के लिए जगह चिन्हित कर ली गई है

राम मंदिर निर्माण के लिए सरकार द्वारा ट्रस्ट बना देने के साथ मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन भी मंदिर स्थल से 22 किलोमीटर दूर दी गई है. ये जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी गई है. ये वक्फ बोर्ड कौन है

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  • Last Updated: February 6, 2020, 12:03 PM IST
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) ने अयोध्या (Ayodhya) में मस्जिद (Masjid) निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन के लिए जगह चिन्हित कर ली है. 5 फरवरी, बुधवार को ये फैसला हुआ. मस्जिद के लिए जमीन ग्राम धनीपुर, तहसील सोहलावलपुर के थाना रौनाही मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर दी जाएगी. यहां मस्जिद निर्माण सुन्नी वक्फ बोर्ड की देखरेख में किया जाएगा. जानते हैं, क्या है सुन्नी वक्फ बोर्ड जिसे इतना महत्वपूर्ण दारोमदार दिया गया है.

वक्फ बोर्ड एक कानूनी निकाय है. इसका गठन साल 1964 में सरकार ने वक्फ कानून 1954 के तहत किया था.वक्फ उस संपत्ति को कहा जाता है जो अल्लाह के नाम पर धार्मिक और चैरिटेबल कार्यों के लिए दान में दी जाती है. कानूनी नजरिए से अगर कोई शख्स अपनी चल या अचल संपत्ति को अपनी मर्जी से इस्लाम के पवित्र कार्यों में लगाने के लिए दान करता है, तो उसे वक्फ कहते हैं. किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित किया जा सकता है अगर उसका इस्तेमाल लंबे समय के लिए इस्लाम से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों या चैरिटेबल वजहों से किया जा रहा हो. वक्फ की संपत्ति का इस्तेमाल आमतौर पर धार्मिक स्कूल चलाने, कब्रिस्तान बनाने, मस्जिद बनाने या फिर शेल्टर होम बनाने के लिए किया जाता है.

मस्जिद के लिए आवंटित जमीन के बगल में फैजाबाद की प्रसिद्ध शहजाद शाह की दरगाह है


वक्फ बोर्ड के बनने का मकसद देश में इस्लामिक इमारतों, संस्थानों और जमीनों के रखरखाव और उसके इस्तेमाल को देखना था. इस संस्था में एक अध्यक्ष और बतौर सदस्य 20 लोग होते हैं. इन लोगों की केंद्र सरकार नियुक्त करती है. भारत के प्रत्येक राज्य में अलग-अलग वक्फ बोर्ड है. फिलहाल देशभर में 28 राज्यों/यूनियन टेरिटरी में कुल 30 वक्फ बोर्ड हैं. कुछ राज्यों जैसे गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और दमन-दीव में कोई वक्फ बोर्ड नहीं. जम्मू-कश्मीर में भी Waqf Act 1995 लागू नहीं है.

वैसे वक्फ बोर्ड 2 प्रकार का होता है- पब्लिक और प्राइवेट. इस वक्फ से होने वाला अतिरिक्त मुनाफा आर्थिक रूप से कमजोर तबके में बांट दिया जाता है. दूसरी ओर प्राइवेट वक्फ प्रॉपर्टी किसी की भी हो सकती है. वक्फ प्रमाणीकरण अधिनियम 1913 के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए प्राइवेट वक्फ बना सकता है.

कोई भी वक्फ नहीं बना सकता, बल्कि इसका हक केवल मुस्लिम धर्म मानने वालों के पास है. कोई भी मुस्लिम शख्स वसीयत बनाकर अपनी संपत्ति दान कर सकता है. लेकिन इसके लिए शर्त ये है कि दानकर्ता व्यस्क होना चाहिए साथ ही दिमागी तौर पर स्वस्थ भी होना जरूरी है. जब कोई अपनी प्रॉपर्टी के डोनेशन की सार्वजनिक घोषणा करता है तो उसे वक्फ के लिए माना जाता है. डेथबेड पर आखिरी सांसें ले रहा शख्स भी ये दान कर सकता है लेकिन तब वक्फ के लिए अपनी पूरी प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि एक तिहाई हिस्सा ही दान कर सकते है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि आखिरी वक्त पर कई बार किसी खास भावना के अतिरेक में लिए फैसले परिवार के साथ नाइंसाफी हो सकते हैं.

वक्फ नहीं बना सकता, बल्कि इसका हक केवल मुस्लिम धर्म मानने वालों के पास है (प्रतीकात्मक फोटो)
वक्फ में कई चीजें शामिल होती हैं, जैसे चल-अचल संपत्ति, कंपनियों के शेयर, किताबें, पैसे, जमीनें , जेवर आदि. जब किसी प्रॉपर्टी को अनिश्चित समय के लिए चैरिटेबल मकसद के लिए इस्तेमाल किया जाता है, तो इसे वक्फ से जुड़ा मान लिया जाता है. ऐसी प्रॉपर्टी के दान की अलग से घोषणा की जरूरत नहीं होती है.

दिलचस्प बात ये है कि अयोध्या मामले में शियाओं ने भी अपना दावा किया था. उनका कहना था कि मीर बाकी शिया (Mir Baqi) था और शिया की बनाई गई मस्जिद कायदे से सुन्नी मुस्लिमों को नहीं दी जानी चाहिए. बोर्ड के वकील के अनुसार 1946 तक विवादित जमीन पर शियाओं का कब्जा था लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया. 9 नवंबर को फैसले के दौरान बाकी पक्षों पर राय रखते हुए सुप्रीम कोर्ट के जजों की 5 सदस्यीय समिति ने शिया बोर्ड की अपील खारिज करते हुए कहा कि ये वक्त theology में जाने का नहीं है.

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First published: February 6, 2020, 11:20 AM IST
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