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आखिर क्‍या है सबरीमाला विवाद, सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला? यहां जानें

News18Hindi
Updated: November 14, 2019, 12:04 PM IST
आखिर क्‍या है सबरीमाला विवाद, सुप्रीम कोर्ट में कैसे पहुंचा मामला? यहां जानें
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर है विवाद.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केरल के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में सभी महिलाओं के प्रवेश (Women Entry) को फिलहाल जारी रखते हुए मामले को 7 जजों की बेंच को भेज दिया है. 7 जजों की यह बड़ी बेंच अब इस मामले पर फैसला सुनाएगी.

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  • Last Updated: November 14, 2019, 12:04 PM IST
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नई दिल्‍ली. केरल (Kerala) के सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में महिलाओं के प्रवेश के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने गुरुवार को सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में सभी महिलाओं के प्रवेश को फिलहाल जारी रखते हुए मामले को 7 जजों की बेंच को भेज दिया है. 7 जजों की यह बड़ी बेंच अब इस मामले पर फैसला सुनाएगी. आखिर सबरीमाला मंदिर विवाद है क्‍या. यह कैसे सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. इस बारे में यहां जानिए...

2006 में सामने आया विवाद
केरल में स्थित सबरीमाला मंदिर करीब 800 साल पुराना है. मान्यता है कि सबरीमाला मंदिर में विराजमान भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी हैं. इस कारण युवा महिलाओं का प्रवेश यहां वर्जित किया गया है. 2006 में मंदिर के मुख्य ज्योतिषि ने दावा किया था कि मंदिर में स्थापित भगवान अयप्पा अपनी शक्तियां खो रहे हैं. ऐसा इसलिए है कि मंदिर में शायद किसी कम उम्र की महिला ने प्रवेश किया है. भगवान इससे नाराज हैं. इसके बाद कन्नड़ अभिनेता प्रभाकर की पत्नी जयमाला ने दावा किया था कि उन्होंने अयप्पा की मूर्ति को छुआ है.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, बोर्ड ने दिया जवाब

जयमाला के दावे पर केरल में काफी हंगामा हुआ. इस हंगामे के चलते ही लोगों का ध्‍यान इस मुद्दे पर गया. 2006 में केरल के वकीलों की एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ याचिका दायर की. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के ट्रस्ट त्रावणकोर देवासम बोर्ड से जवाब मांगा. बोर्ड की ओर से मामले में बताया गया कि भगवान अयप्पा ब्रह्मचारी थे और इस वजह से मंदिर में बच्चियों और महिलाओं के प्रवेश पर रोक है.

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये रोक केवल मासिक धर्म वाली महिलाओं पर ही लागू है. यानी कि जिन बच्चियों का मासिक धर्म शुरू नहीं हुआ है या फिर वैसी महिलाएं जिनका मासिक धर्म ख़त्म हो चुका है उन पर यह लागू नहीं होता है. इसके बाद 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने मामला संविधान पीठ को सौंप दिया था. 2018 में पांच जजों की बेंच ने मामले की सुनवाई शुरू की थी.

सबरीमाला मंदिर में फिलहाल जारी रहेगी महिलाओं की एंट्री.
सभी महिलाओं को दी प्रवेश की अनुमति
28 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सबरीमाला मंदिर में सभी महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने यह साफ किया कि हर उम्र की महिलाएं अब मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हमारी संस्कृति में महिलाओं को देवी की तरह पूजा जाता है और मंदिर में प्रवेश से रोका जा रहा है. यह स्वीकार्य नहीं है.

करीब 65 पुनर्विचार याचिकाएं दायर
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी थी. अदालत के इसी फैसले पर कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट में ऐसी कुल 65 याचिकाएं दायर की गईं. इन्‍हीं पर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई की और मामले को 7 जजों की बेंच को भे‍ज दिया. मामले की सुनवाई सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने की.

विष्णु और शिव के संगम से हुआ है अयप्पा का जन्म
एक लेख में एमए देवैया ने बताया है कि पुराणों के अनुसार अयप्पा विष्णु और शिव के पुत्र हैं. यह किस्सा उनके अंदर की शक्तियों के मिलन को दिखाता है न कि दोनों के शारीरिक मिलन को. इसके अनुसार देवता अयप्पा में दोनों ही देवताओं का अंश है. जिसकी वजह से भक्तों के बीच उनका महत्व और बढ़ जाता है. पुरानी कथाओं के अनुसार, अयप्पा अविवाहित हैं. और वो अपने भक्तों की प्रार्थनाओं पर पूरा ध्यान देना चाहते हैं. साथ ही उन्होंने तब तक अविवाहित रहने का फैसला किया है जब तक उनके पास कन्नी स्वामी (यानी वे भक्त जो पहली बार सबरीमाला आते हैं) आना बंद नहीं कर देते."

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First published: November 14, 2019, 11:30 AM IST
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