ये थी पूरी दुनिया के 760 करोड़ लोगों की मां, जिसके कारण हम दुनिया में हैं

पूरी दुनिया में जीवित मनुष्यों की प्रजाति एक ही महिला की वंशज है. इस हिसाब से हमारे कजिन दुनियाभर में कहीं भी हो सकते हैं.

News18Hindi
Updated: April 1, 2019, 11:28 AM IST
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Updated: April 1, 2019, 11:28 AM IST
इस समय दुनिया की आबादी करीब 760 करोड़ है. 7 महाद्वीपों और 200 से अधिक देशों में बंटे हम इंसान एक दूसरे से रूप, रंग और बनावट में बहुत अलग हैं. लेकिन अगर आपसे कहा जाए कि इस वक्त पृथ्वी पर मौजूद 760 करोड़ लोगों की एक ही मां थी तो क्या आप इस बात पर यकीन करेंगे? और हम सब की यह 'मां' आज से महज 2 लाख साल पहले ही इस धरती पर मौजूद थी.

ये बात सच है कि 2 लाख साल कोई छोटा समय नहीं होता. हजारों पीढ़ियां पीछे जाने पर वैज्ञानिकों से यह सिद्ध किया है कि आज पूरी दुनिया में जीवित मनुष्यों की प्रजाति एक ही महिला की वंशज है. इस हिसाब से हमारे और आपके 50वें, 100वें और 1000वें कजिन दुनियाभर में कहीं भी हो सकते हैं. इस हिसाब से 'वसुधैव कुटुम्बकम' वाली बात को वैज्ञानिकों ने भी साबित कर दिया है.

कौन थी वो महिला, हम सब जिसकी पीढ़ी हैं?

वैज्ञानिकों का मानना है कि अफ्रीका में करीब 2 लाख साल पहले एक ऐसी महिला थी, जिसकी सभी संताने अपनी नस्लें आगे बढ़ा पाईं और इसी का नतीजा है कि आज पृथ्वी पर मानव जाति मौजूद है. इस महिला को वैज्ञानिकों ने नाम दिया, 'माइटोकांड्रियल ईव'. वैसे यह मानव इतिहास की पहली महिला नहीं थी, लेकिन यह वह महिला थी जिसने भविष्य का निर्माण किया.

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यह महिला कौन थी, अफ्रीका में कहां थी, कब पैदा हुई और कब मरी, इसकी ठीक-ठीक जानकारी अभी तक हासिल नहीं है, लेकिन इंसानी DNA बताता है कि वो गुफाओं में रहने वाली और शिकार करने वाली महिला थी.

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कुछ भूगर्भशास्त्रियों ने जेनेटिक वैज्ञानिकों का दावा खारिज करते हुए यह तर्क दिया था कि जब मनुष्य करोड़ों साल पहले आया था तो हम सबकी कॉमन मां यानी 'माइटोकांड्रियल ईव' इतनी नई कैसे हुई! इस बात का वैज्ञानिकों ने कुछ इस तरह से जवाब दिया. एक रिसर्च में कहा गया कि मानव का जन्म अफ्रीका में हुआ था. समय समय पर मानवों से झुंडों में अफ्रीका से पलायन किया. इस पलायन में ही लाखों साल लगे. इसे दौरान नहीं प्रजातियों का जन्म होता रहा.

करीब 2 लाख साल पहले अफ्रीका में, जब और जहां हमारी 'माइटोकांड्रियल ईव' रहती थी, उसके आस-पास अन्य प्रजातियां भी जरूर पाई जाती थीं. किसी तत्कालीन कारणों की वजह से उसी प्रजाति की बाकी किसी औरत की नस्लें आगे नहीं बढ़ पाईं. इसके पीछे का कारण 'नेचुरल सिलेक्शन' बताया जाता है.

मां ही क्यों, पिता क्यों नहीं:

अगर पूरी मानव प्रजाति की मां एक ही थी तो इसी हिसाब से एक ऐसा आदमी भी होना चाहिए जो हम सबका कॉमन पिता रहा हो! यह सवाल आपके जेहन में जरूर आ रहा होगा. इसके लिए थोड़ी सी बायोलॉजी समझनी होगी. इंसान के शरीर में क्रोमोजोम होते हैं जो एक पीढ़ी की जानकारी अगली पीढ़ी तक ले जाते हैं.

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हर प्रजाति के जीवों में एक निर्धारित संख्या के ही क्रोमोजोम पे जाते हैं. ये क्रोमोजोम हमारी कोशिकाओं के न्यूक्लियस में होते हैं. मानव प्रजाति की कोशिकाओं के न्यूक्लियस में 46 क्रोमोजोम होते हैं.

जब कोई बच्चा जन्म लेता है, उसके शरीर में अपने पिता से 23 और मां से 23 क्रोमोजोम आते हैं. बीती हजारों पीढ़ियों में माता और पिता के ये क्रोमोजोम इतनी बार मिक्स हो चुके हैं कि पिछली जनरेशन का पता लगाना असंभव है.

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लेकिन हर कोशिका में एक और क्रोमोजोम होता है जो न्यूक्लियस में ना होकर माइटोकांड्रिया नाम के कोशिकांग में पाया जाता है. इस क्रोमोजोम में कोई मिक्सिंग नहीं होती है और इसी के आधार पर पिछली सभी पीढ़ियों का पता लगाया जा सकता है. चूंकि रिप्रोडक्शन के दौरान पिता के स्पर्म में सिर्फ न्यूक्लियस होता है कुछ नहीं, मां के एग का माइटोकांड्रिया ही बच्चे के शरीर में आता है.

इसी आधार पर आज इस दुनिया में मौजूद हर व्यक्ति के शरीर की कोशिकाओं में एक ही मां का माइटोकांड्रिया उपस्थित है. इन माइटोकांड्रिया में समय-समय पर बदलाव आते रहते हैं, जिन्हें म्यूटेशन कहा जाता है. इन म्यूटेशन के होने की गति को वैज्ञानिक नापकर बीते हुए समय का अनुमान लगा लेते हैं. इसी आधार पर कहा जा सकता है कि हम सबकी पर-पर-पर (अनंत) नानी आज से लगभग 2 लाख साल पहले पृथ्वी पर मौजूद थी.

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आज से करीब 450 करोड़ साल पहले यह पृथ्वी अपना आकर ले रही थी. पहले जीव की उत्पत्ति का सुबूत पृथ्वी के जन्म के करीब 40 करोड़ सालों बाद यानी आज से 410 करोड़ साल पहले की ओर इशारा करते हैं. मानव जाति इस विकास की सीढ़ी पर बहुत बाद में आई.



आज का मानव 'Homo sapiens sapiens' प्रजाति का माना जाता है. इससे पहले हमारे कई पूर्वज इस धरती पर राज कर चुके हैं, जिनमें जावा मैन, निएंडरथल मैन, क्रो मैग्नन, होमो इरेक्टस शामिल हैं. पत्थरों से बने पहले हथियारों के अवशेष 25 लाख साल पहले के बताए जाते हैं. तब से लेकर अब तक मानव विकास का चेहरा ही बदल गया है. लेकिन आजकल प्रचलित 'स्क्रीनशॉट्स' की ही तरह हमारे भीतर मौजूद यह माइटोकांड्रिया हमें हमारी कॉमन मां तक पहुंचा चुका है.

तो अगली बार कभी आपको लगे कि इस दुनिया में मौजूद किसी खास देश, धर्म या प्रजाति के लोग आपके दुश्मन हैं, तो याद कर लीजिएगा कि वो कोई गैर नहीं, आपके ही परिवार का हिस्सा हैं.

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