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अब क्यों किया गया मिशन शक्ति परिक्षण, जानिए ऐसे ही 8 सवालों के जवाब

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

नष्ट किया गया सैटलाइट भारत का ही था, पर उसने काम करना बंद दिया था. निष्क्रिय भारतीय सैटेलाइट को एंटी सैटेलाइट विपन्स (ASAT) के जरिए नष्ट किया गया.

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    भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की तरफ से बनाई गई मिसाइल से एक सैटलाइट को नष्ट किया. जिस सैटलाइट को नष्ट किया वह 'लो अर्थ ऑर्बिट' में था. 'लो अर्थ ऑर्बिट' पृथ्वी की सतह से करीब 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर है. LEO धरती के सबसे पास वाली कक्षा होती है.

    नष्ट किया गया सैटलाइट भारत का ही था, पर उसने काम करना बंद दिया था. निष्क्रिय भारतीय सैटेलाइट को एंटी सैटेलाइट विपन्स (ASAT) के जरिए नष्ट किया गया. इसरो और डीआरडीओ को मिली इस उपलब्धि से जुड़े कई ऐसे सवाल हैं, जिनके सवाल जानने के लिए लोग उत्सुक हैं. जानिए ऐसे ही सवालों के जवाब.

    किस सैटेलाइट से नष्ट किया गया ?
    जिस सैटेलाइट के जरिए निष्क्रिय सैटलाइट को नष्ट किया गया, वह भारत निर्मित है.

    किस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया?
    निष्क्रिय सैटलाइट को नष्ट करने के लिए DRDO के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया गया. बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम का हिस्सा है. इसे इसे एंटी सैटेलाइट विपन्स (ASAT) कहा जाता है.

    क्या है एंटी सैटेलाइट वेपन (ASAT)
    एंटी-सैटेलाइट वेपन मिलिट्री जासूसी के मकसद से तैयार किए गए सैटेलाइट को नष्‍ट कर सकते हैं. अभी तक यह ASAT अमेरिका, रूस और चीन के थी. अब भारत भी इसी कतार में दुनिया का चौथा देश बन गया है.

    क्या इस परिक्षण से अंतरिक्ष में मलबे इकट्ठा होगा?
    इस परिक्षण को निचले वातावरण में किया गया, ताकि अंतरिक्ष में कोई मलबा जमा न हो. फिर भी जो थोड़ा बहुत मलबा हुआ होगा वह कुछ हफ्तों में अपने आप घुलकर धरती पर आ जाएगा.



    ये परिक्षण अब क्यों किया गया ?
    ये टेस्ट तब किया गया जब ये आत्मविश्वास पा लिया और सफलता सुनिश्चित कर ली. ये बात दर्शाती है कि सरकार का इरादा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाना है.

    क्या अब भारत अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ में शामिल हो रहा है ?
    अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ में शामिल होने का भारत का कोई इरादा नहीं है. हमने हमेशा सुनिश्चित किया कि अंतरिक्ष का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्य के लिए किया जाए. हम आउटर स्पेस के हथियारकरण के खिलाफ हैं. अंतरिक्ष आधारित संपत्ति के समर्थन और इसकी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करते हैं.

    क्या ये परिक्षण किसी देश के खिलाफ था?
    नहीं, ये परिक्षण किसी देश के खिलाफ नहीं था. भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं से किसी देश को खतरा नहीं है. न ही भारत अपनी क्षमताओं को किसी के खिलाफ निर्देशित करता है.

    इससे भारत को क्या फायदा है?
    युद्ध की स्थिति में अंतरिक्ष का इस्तेमाल आत्मरक्षा के लिए एक माध्यम के रूप में किया जाता है. उपग्रहों भी सैन्य क्षमता की तरह होते हैं. इसकी मदद से कोई और देश जो भारतीय सीमा में ऑर्बिट में घुसने या अटैक की कोशिश करेगा तो भारत उसे नष्ट कर सकता है. जासूसी उपग्रह अंतरिक्ष से एक मीटर चौड़ी वस्तुओं की पहचान कर सकता है. एसैट वेपन दुश्‍मन को देश की जासूसी करने से रोक सकता है.

    इस परिक्षण को 'मिशन शक्ति' नाम दिया गया है. जिसकी कामयाबी का श्रेय डीआरडीओ और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों को जाता है.

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