इस पॉलिसी के जरिए चीन हथिया रहा है दूसरे देशों की जमीनें

अगर छोटी अर्थव्यवस्थाएं अपनी रुचि का भुगतान करने के लिए पर्याप्त नकद उत्पन्न नहीं कर सकती हैं तो चीनी कम्पनियां उन्हें हथिया लेती हैं.

News18Hindi
Updated: September 4, 2018, 5:07 PM IST
इस पॉलिसी के जरिए चीन हथिया रहा है दूसरे देशों की जमीनें
अगर छोटी अर्थव्यवस्थाएं अपनी रुचि का भुगतान करने के लिए पर्याप्त नकद उत्पन्न नहीं कर सकती हैं तो चीनी कम्पनियां उन्हें हथिया लेती हैं.
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Updated: September 4, 2018, 5:07 PM IST
पिछले साल, चीन को एक बिलियन डॉलर से अधिक के ऋण के तले दबे होने के कारण श्रीलंका ने चीनी सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों को अपना एक बंदरगाह सौंप दिया था. अब चीन अफ्रीका में अमेरिकी सेना के मुख्य बेस जिबूती पर नियंत्रण रखने के बारे में सोच रहा है. अमेरिका ने इस कड़ी आपत्ति दर्ज की है. अमेरिका के विदेश सचिव रेक्स टिलरसन ने 6 मार्च को कहा था कि "चीन अपारदर्शी कॉन्‍ट्रैक्ट्स, हिंसक ऋण प्रथाओं और भ्रष्ट सौदों का उपयोग करते हुए छोटे देशों की संप्रभुता को कम कर उन्हें लम्बे समय के लिए आत्मनिर्भर विकास से वंचित करना चाहता हैं. चीनी निवेश में अफ्रीका के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने की क्षमता है लेकिन इसके तरीकों से देश कर्ज़े में डूबते जा रहे हैं. "

कुछ लोग इस "ऋण-जाल कूटनीति" कहते हैं यानि डेब्ट ट्रैप डिप्लोमेसी. छोटे देशों को बुनियादी ढांचे के लिए सस्ते लोन दें, और अगर छोटी अर्थव्यवस्थाएं अपनी रुचि का भुगतान करने के लिए पर्याप्त नकद उत्पन्न नहीं कर सकती हैं तो चीनी कम्पनियां उन्हें हथिया लेती हैं. चीन एशिया में अपने प्रभुत्व को बनाए रखने और देशों पर नियंत्रण की मंशा को पूरा करने के लिए लगातार कर्ज दे रहा है ताकि ये देश चीन के विरूद्ध कभी आवाज ना उठा सकें.

चीन ने वैश्विक व्यापार नेता बनने और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में परिवहन बुनियादी ढांचे को वित्त पोषित करने की अपनी आकांक्षाओं के लिए "बेल्ट एंड रोड" प्लान बनाया था. वैश्विक संस्थानों में अमेरिका की कमी को तो चीन ने पूरा किया है लेकिन साथ ही चीन को साम्राज्यवादी व्यवहार के आरोपों का भी सामना करना पड़ रहा है.

अमेरिकी थिंक टैंक सेंटर फॉर ग्लोबल डेवेलपमेंट ने चीन के कूटनीतिक कदमों की समीक्षा करते हुए कहा है कि पाकिस्तान, जिबूती, मालदीव, मंगोलिया, लाओस, मोंटेनीग्रो, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान ऐसे मुल्क हैं, जो गोपनीय शर्तों के चलते कर्ज चुकाने में कामयाब नहीं होंगे और चीन के डेब्ट ट्रैप का शिकार हो जाएंगे.



जिन 78 देशों को चीन ने इस योजना में शामिल किया है, उनमें से कई की अर्थव्यवस्था निवेश के लायक नहीं हैं. चीन ने "बेल्ट एंड रोड" प्लान से जुड़े बहुत से देशों कर्ज देकर फंसा लिया है. कर्ज में फंसे देशों ने आवाज उठाना शुरू कर भी दिया है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दावा किया है कि परियोजना में शामिल देशों के साथ चीन का व्यापार 35 हजार करोड़ रुपए बढ़ा है. इसमें डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट 4.2 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है.

"बेल्ट एंड रोड" प्लान की कुछ मुख्य बातें -
बेल्ट एंड रोड "एक विशाल व्यापार और आधारभूत संरचना परियोजना है जिसका उद्देश्य भोगौलिक और वित्तीय रूप से - एशिया, यूरोप, अफ्रीका और ओशिनिया में दर्जनों अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ना है.

इसमें दो भाग हैं: "बेल्ट," जो पुराने सिल्क रोड भूमि मार्ग को पुनर्जीवित करता है, और "सड़क", जो वास्तव में एक सड़क नहीं है, बल्कि विभिन्न महासागरों के माध्यम से एक मार्ग है.

सिल्क रोड यूरोप और एशिया भर में एक प्राचीन भूमि मार्ग था जो व्यापारियों और चीन, फारस और रोमन साम्राज्य जैसे क्षेत्रों से जुड़ा था.

व्यापारियों ने उन सड़कों का ऊंट या घोड़े द्वारा रेशम और अन्य वस्तुओं को परिवहन करने के लिए उपयोग किया.

71 देश (चीन समेत) परियोजना में हिस्सा ले रहे हैं. इनमें पाकिस्तान, पोलैंड, तुर्की, न्यूजीलैंड और रूस शामिल हैं. कुल मिलाकर, ये 71 देश दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद का तीसरा हिस्सा दर्शाते हैं.

चीन ने मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे, परिवहन और ऊर्जा में बेल्ट और सड़क के साथ परियोजनाओं में कम से कम 900 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. इनमें पाकिस्तान में एक गैस पाइपलाइन, हंगरी में एक मोटरवे और थाईलैंड में एक उच्च स्पीड रेल लिंक शामिल है.

चीन से एक मालगाड़ी ट्रेन है जो सीधे कुवोला, फिनलैंड से शीआन, चीन तक जाती है. यात्रा में 17 दिन लगते हैं. चीन का कहना है कि यह समुद्र की यात्रा से तेज है और हवा से सस्ता है.

यह 9,800 किलोमीटर रेलवे चीन से लोडज़, पोलैंड तक इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कपड़े और जूते परिवहन में मदद करता है. इस रास्‍ते पर बर्फ के बावजूद पोलैंड के गुआंग्शी, चीन और मालाज़ेविज़ेज़ के बीच ट्रेन चलतीी हैं.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और नरेन्द्र मोदी (फ़ाइल फोटो)

युद्ध-ग्रस्त सीरिया और यमन ने बेल्ट और रोड का हिस्सा बनने के लिए प्रयास किया है. पिछले नवंबर में, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सीरिया के पुनर्निर्माण के लिए चीन का समर्थन दिया था. ब्रिटेन बेल्ट और रोड का हिस्सा नहीं है, और इसका रुख फिलहाल अस्पष्ट है. चीन की यात्रा से पहले, ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने औपचारिक रूप से परियोजना का समर्थन करने से इनकार कर दिया और कहा कि यह केवल वैश्विक विकास में योगदान तभी देगा यदि यह अच्छी तरह लागू किया गया होता.

अमेरिका बेल्ट और रोड का हिस्सा नहीं है, लेकिन द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद पिछले मई में एक बयान में औपचारिक रूप से इसे मान्यता दी गई थी.

बेल्ट और रोड की आलोचना भी हो रही है. पाकिस्तान के लिए इसे जोड़ने वाले आर्थिक गलियारे में चीन के निवेश का भारत विरोध करता है क्योंकि यह कश्मीर से गुजरता है.

अन्य देशों का कहना है कि बेल्ट और रोड वास्तव में चीन और अन्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच विशेष द्विपक्षीय सौदों की श्रृंखला है, लेकिन इसे बहुपक्षीय परियोजना के रूप में बताया जाता है.

चीन की महत्वाकांक्षाएं एशिया, यूरोप, अफ्रीका और ओशिनिया से भी आगे बढ़ती दिखाई देती हैं. चीन ने "पोलर सिल्क रोड" योजना की भी घोषणा की, जिसका लक्ष्य बुनियादी ढांचे का निर्माण करना और आर्कटिक में शिपिंग मार्गों का पता लगाना है.

2016 में, चीन ने एशियाई इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट बैंक (एक अंतरराष्ट्रीय विकास बैंक) भी स्थापित किया ताकि क्षेत्र में आधारभूत संरचना बनाने में मदद मिल सके. यह लगभग आईएमएफ के एशिया-पैसेफिक के जैसा है. ओबामा प्रशासन की चेतावनियों के बावजूद यूके, जर्मनी और फ्रांस सभी शामिल इसमें शामिल हुए थे.
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