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चीन की वो लेज़र मिसाइल, जो अंतरिक्ष से करेगी अटैक

News18Hindi
Updated: October 11, 2018, 4:46 PM IST
चीन की वो लेज़र मिसाइल, जो अंतरिक्ष से करेगी अटैक
प्रतीकात्मक तस्वीर

चीन के 20 से अधिक शोध संस्थानों और विश्वविद्यालय इसके प्रमुख घटक विकसित कर रहे हैं.

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  • Last Updated: October 11, 2018, 4:46 PM IST
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चीन एक ऐसी सैटेलाइट बना रहा है जिससे निकलने वाली ताकतवर लेज़र मिसाइल सीधे अंतरिक्ष से अटैक करेगी. यह मिसाइल समंदर में 1600 फ़ीट अंदर तक किसी भी चीज़ को निशाना बना सकती है.  माना यह जा रहा है कि टारगेट करके हमला करने वाली मिसाइलों में यह अब तक की सबसे घातक मिसाइल हो सकती है.

समंदर की निगरानी के लिए चीन द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रम का यह लेटेस्ट आविष्कार होगा. गहरे समंदर में छुपी पनडुब्बियों के खात्मे के आलावा इसका इस्तेमाल महासागरों का डेटा एकत्र करने के लिए भी किया जा सकता है.

क्या है यह प्लान?
इस पूरे प्लान का नाम है प्रोजेक्ट गुआनलन, जिसका मतलब है 'बड़ी लहरें देखना'. यानी गहरे से गहरे पानी तक भी पहुंच रखना और यही चीन चाहता है. आधिकारिक तौर पर इसे मई में क़िंगदाओ, शेडोंग में समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए पायलट नेशनल लेबोरेटरी में लॉन्च किया गया था. प्रयोगशाला की वेबसाइट के अनुसार, इसका उद्देश्य दुनिया के महासागरों में चीन की निगरानी गतिविधियों को मजबूत करना है.

वैज्ञानिक प्रयोगशाला में सैटेलाइट के डिजाइन पर काम हो रहा है लेकिन लेकिन चीन के 20 से अधिक शोध संस्थानों और विश्वविद्यालय इसके प्रमुख घटक विकसित कर रहे हैं. इसका मतलब है कि चीन दुनिया की सबसे ताकतवर और सटीक मिसाइल बनाने जा रहा है.

इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे एक रिसर्चर सांग ज़ियाकुआं का कहना है कि जैसी सैटेलाइट हम बनाने की सोच रहे हैं अगर ठीक वैसी ही बन जाती है तो समंदर हमारे लिए पारदर्शी हो जाएगा. हम कहीं भी कुछ भी ट्रैक कर पाएंगे. यह सब कुछ बदल कर रख देगा.

रोशनी और हवा की तुलना में पानी में 1,000 गुना तेजी से धीमी हो जाती है और सूर्य समुद्र की सतह से 200 मीटर से अधिक नहीं जा सकता है. चीन की शक्तिशाली कृत्रिम लेजर बीम सूरज की तुलना में 1 अरब गुना अधिक चमकदार हो सकती है. लेकिन यह परियोजना फिलहाल महत्वाकांक्षी है - नौसेना के शोधकर्ताओं ने हल्की पहचान और सीमा (लिडर) के रूप में जाने वाली तकनीक का उपयोग करके शिकार पनडुब्बियों के लिए लेजर स्पॉटलाइट विकसित करने के लिए 50 साल से प्रयास कर रहे हैं.

कैसे काम करती है?
सैद्धांतिक रूप से, जब एक लेजर बीम एक पनडुब्बी को हिट करती है, तो कुछ तरंगें वापस उछलती हैं. फिर उन्हें सेंसर द्वारा उठाया जाता है और लक्ष्य के स्थान, गति और त्रि-आयामी आकार को निर्धारित करने के लिए कंप्यूटर द्वारा उनका विश्लेषण किया जाता है.

लेकिन वास्तव में, लिडर प्रौद्योगिकी की अपनी सीमाएं हैं. यह  बादल, धुंध, धुंधला पानी- और यहां तक ​​कि समुद्री जीवन जैसे कि मछली और व्हेल से भी प्रभावित हो सकती है.



क्या चीन यह मिसाइल बनाने में कामयाब हो पाएगा?
कुछ शोधकर्ताओं को संदेह है कि चीन अपने डिवाइस के साथ आगे बढ़ने में सक्षम होगा या नहीं. चीनी अकादमी ऑफ साइंसेज में शंघाई इंस्टीट्यूट ऑफ ऑप्टिक्स एंड फाइन मैकेनिक्स के साथ एक लिडर वैज्ञानिक ने कहा, मिसाइल बनाने का यह मिशन असंभव है.

शोधकर्ता ने कहा, आप धरती पर हर जगह नहीं पहुंच सकते. प्रकृति का ख्याल भी रखना ज़रूरी है. 

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First published: October 11, 2018, 3:31 PM IST
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