डायबिटीज़ के बारे में वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

सांकेतिक तस्वीर

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डब्ल्यूएचओ की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में साल 2013 में डायबिटीज़ के मरीज 6.3 करोड़ थे. डायबिटीज़ से 2012 में पूरी दुनिया में 15 लाख लोगों की मौत हुई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 12, 2019, 5:24 PM IST
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डायबिटीज़ वो बीमारी है जिसमें ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है. शक्कर ज्यादा खाने से शरीर में इन्सुलिन की मात्रा बढ़ती है. इन्सुलिन वो हार्मोन है, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित कर खाने को ऊर्जा में बदलता है. जब इन्सुलिन का स्तर लगातार बढ़ता जाता है तो इस हार्मोन के प्रति शरीर संवेदनहीन होने लगता है. नतीजा ये होता है कि खून में ग्लूकोज़ यानी चीनी की मात्रा बढ़ने लगती है. हाई ब्लड शुगर शरीर के हर एक अंग पर असर डालता है. डायबिटीज़, इन्सुलिन प्रतिरोध का अगला स्तर है. इन्सुलिन प्रतिरोधक बनने का लोगों को तब तक एहसास नहीं होता जब तक कि यह डायबिटीज़ में न बदल जाए.

डायबिटीज़ अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन इसकी वजह से बहुत-सी बीमारियां हो सकती हैं. ये पैरों की उंगलियों से लेकर आंख तक को प्रभावित करती है. इससे हड्डियों पर सीधा असर पड़ता है. डायबिटीज़ जन्म के साथ ही बच्चे को भी हो सकती है और ये आनुवांशिक (हैरिडेटरी) भी हो सकती है.

डायबिटीज़ दो तरह की होती है. टाइप 1 और टाइप 2.



-टाइप 1 डायबिटीज़ में इंसुलिन का बनना कम या बंद हो जाता है. इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है. इसके पीड़ितों की हड्डियों की डेन्सिटी घटने लगती है, जो ऑस्टियोपोरोसिस रोग का सबसे बड़ा फैक्टर है.
इसमें पैन्क्रियाज की बीटा कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं. जिसमें इंसु‍लिन बनना सम्भव नहीं. यह जेनेटिक, ऑटो-इम्‍यून या संक्रमण की वजह से हो सकता है. शुगर की मात्रा बढ़ने से मरीज को बार-बार पेशाब आता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर


-टाइप 2 डायबिटीज़ में ब्लड शुगर का स्‍तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. इसे कंट्रोल करना मुश्किल माना जाता है. टाइप 2 डायबिटीज़ के रोगियों को फ्रैक्चर का जोखिम रहता है. इसमें शरीर इंसुलिन सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता.
(इंसुलिन हॉर्मोन के जरिए रक्त कोशिकाओं को शुगर मिलती है. यह शरीर के अन्य भागों में शुगर पहुंचाता है. जिससे कोशिकाओं को ऊर्जा मिलती है.)
इसमें अधिक प्यास लगती है.
पेशाब ज्यादा आता है.
भूख लगती है.
यह बीमारी उन लोगों को अधिक होती है जिनका वजन अधिक होता है.
इसमें मरीज को डायबिटिक रेटिनोपैथी हो जाती है जिससे आंखों की रोशनी में कमी आती है.

डायबिटीज़ के संकेत
-शरीर में ब्लड शुगर लेवल बढ़ने पर बार-बार पेशाब आता है. शरीर में इकट्ठा हुआ शुगर पेशाब के जरिए बाहर निकलता है.
-थोड़ा-सा काम करने पर थकावट महसूस करने लगते हैं.
-शरीर के किसी भी भाग पर खारिश करने से जख्म बन जाता है और जल्दी ठीक नहीं हो पाता तो शुगर लेवल बढ़ा हो सकता है.
-नजर कमजोर होना
-डायबिटीज़ का आंखों पर भी प्रभाव पड़ता है. इससे आंखों के पर्दो को नुकसान होता है.
-घाव जल्दी न भरना.
-बार-बार भूख लगना
-शरीर में शुगर लेवल बढ़ने पर बार-बार भूख लगती है. पहले से ज्यादा खाना खा रहे हैं और फिर भी पेट नहीं भरता तो टेस्ट करा लें.
-भूख में बढ़ौतरी होने पर खाना खाने के साथ वजन भी बढ़ना चाहिए लेकिन शुगर लेवल बढ़ने पर वजन कम रहता है.
-मसूड़ो से खून निकलना या फिर मसूड़ो में सूजन रहने के कारण भी डायबिटीज़ हो सकती है.
-बार-बार मुंह सूखने लगता है. मुंह में नमी की कमी लगती है.

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एक दिन में कितनी चीनी लेनी चाहिए
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दिन में ली जाने वाली कैलरीज़ में शक्कर की मात्रा 10% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. लेकिन अब संगठन ने इसे 5% नीचे करने के लिए कहा है. एक स्वस्थ व्यस्क के लिए इसका मतलब हुआ 16 ग्राम या कहें दो चम्मच चीनी प्रति दिन.

डायबिटीज़ है हड्डियों का सबसे बड़ा दुश्मन
हड्डियों में दो तरह के सेल्स होते हैं. एक ऑस्टियोक्लास्ट्स (वो सेल्स जो बोन टिशू को तोड़ते हैं) और दूसरी ऑस्टियोब्लास्ट्स (वो सेल्स जो हड्डियों के निर्माण में सहायक होते हैं). ग्लूकोज का लेवल बढ़ने से दोनों तरह के सेल्स पर नकारात्मक असर पड़ता है. इसकी वजह से जहां बोन टिशू (हड्डियों के ऊतक) ज्यादा टूटते हैं, ग्लूकोज लेवल को बैलेंस करने वाली दवाओं से भी हड्डियों को नुकसान पहुंचता है. दवाएं हड्डियों को कमजोर करती हैं और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है. उम्रदराज महिलाओं में यह खतरा ज्यादा होता है.

डायबिटीज़ के मरीजों को कैल्शियम और विटामिन-डी से भरपूर खाने की जरूरत होती है. कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट, हरी-पत्तेदार सब्जियां और कैल्शियम से भरपूर तरल चीजें लेनी चाहिए.

डायबिटीज़ कंट्रोल के लिए टिप्स
- ग्रीन टी: रोजाना बिना चीनी के ग्रीन टी पीने से ब्लड शुगर लेवल मेंटेन रहता है. इसमें मौजूद एंटी ऑक्‍सीडेंट शरीर में फ्रीरैडिकल्‍स से लड़ाई करता है, जिससे शुगर कंट्रोल होती है.
-तुलसी की पत्त‍ीः तुलसी की पत्त‍ियों में पाए जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट और ऐसे तत्व पैंक्रियाटिक बीटा सेल्स को इंसुलिन के प्रति सक्रिय बनाती हैं. ये सेल्स इंसुलिन के स्त्राव को बढ़ाती हैं. सुबह खाली पेट दो से तीन तुलसी की पत्ती चबाएं.
- कॉफी: कॉफी का यदि संतुलित मात्रा में सेवन किया जाए तो इसमें मौजूद कैफीन ब्लड में शुगर की मात्रा को काबू में रखता है.
-दालचीनी पाउडरः दालचीनी से इंसुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है. ये ब्लड में शुगर लेवल को कम करने में मददगार है.
-फाइबर: फाइबर खून में मौजूद शुगर को सोखने में सहायता करता है. इसके लिए डायबिटिक पेशेंट को गेहूं, ब्राउन राइस या वीट ब्रेड आदि खाना चाहिए.
-जामुन के बीजः जामुन के बीज भी डायबिटीज़ कंट्रोल करने में फायदेमंद हैं. जामुन के बीजों को सुखाकर, पीसकर, चूर्ण बनाकर खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लें.
-व्यायाम: व्यायाम करना शरीर के लिए लाभदायक तो है ही, साथ ही इससे शुगर की मात्रा भी कंट्रोल में रहती है.

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चीनी ज्यादा खाने से पेट भरने का एहसास खत्म होता जाता है


डायबिटीज़ की परेशानी कम करेगी दालचीनी
एम्स, दिल्ली यूनिवर्सिटी के होम इक्नॉमिक्स विभाग और फोर्टिस सीडीओसी अस्पताल ने भारतीयों पर शोध में पाया रोजाना दालचीनी का 3 ग्राम पाउडर लेने से मोटापे और डायबिटीज़ को काबू में रखा जा सकता है. इससे बढ़े ब्लड प्रेशर और कमर पर जमा होने वाली चर्बी को काबू में रखा जा सकता है. इससे असामान्य कोलेस्ट्रॉल को भी ठीक रखा जा सकता है. रिसर्च के नतीजे अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका 'लिपिड्स इन हेल्थ डिजीज' में छपे हैं.

इस शोध के तहत 130 मरीजों को 16 हफ्ते तक दालचीनी पाउडर दिया गया. हर मरीज को हर दिन 3 ग्राम दालचीनी पाउडर दिया गया. इसका नतीजा ये निकला कि हर मरीज का वजन 3.8 फीसदी तक कम हो गया. शरीर की चर्बी 4.3 फीसदी कम हो गई. कमर का घेरा 5.3 फीसदी तक घट गया. ब्लड प्रेशर 9.7 फीसदी कम हो गया और खून में फास्टिंग ग्लूकोज का स्तर 7.1 फीसदी कम हो गया. खाने में रोजाना दालचीनी का पाउडर शामिल करने से किसी भी मरीज में कोई साइड इफेक्ट नहीं देखा गया.

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में साल 2013 में डायबिटीज़ के मरीज 6.3 करोड़ थे. डायबिटीज़ से 2012 में पूरी दुनिया में 15 लाख लोगों की मौत हुई. विश्व में 2030 तक कई बीमारियों से होने वाली मौतों में डायबिटीज़ सातवां रोग हो सकता है. 14 नवंबर को विश्व में मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है.

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