हम पाइल्स के बारे में बात क्यों नहीं करते?

एक अध्ययन के अनुसार, भारत में अनुमानित 4,07,23,288 लोग बवासीर या पाइल्स से पीड़ित हैं.

News18Hindi
Updated: July 10, 2018, 3:10 PM IST
हम पाइल्स के बारे में बात क्यों नहीं करते?
एक अध्ययन के अनुसार, भारत में अनुमानित 4,07,23,288 लोग बवासीर या पाइल्स से पीड़ित हैं.
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Updated: July 10, 2018, 3:10 PM IST
दफ्तर या दोस्तों के साथ पार्टी में अगर बार बार कहने के बाद भी कोई न बैठे तो सबसे घटिया मज़ाक जो किया जाता है वो ये कि - बैठ जाओ भाई, पाइल्स है क्या? और सब ठहाका लगाकर हंस पड़ते हैं.

बीमारियों के बारे में बात करने को लेकर पिछले कुछ सालों में हम बेहद सजग हुए हैं. एड्स और कैंसर जैसी बीमारियों को लेकर दुनिया भर में कैम्पेन चलाए जा रहे हैं. डिप्रेशन और एनज़ाइटी को लेकर बहुत बात होने लगी है. यहां तक कि यौन सम्बंधों से फैलने वाली बीमारियों के बारे में भी लोग जागरूक हो रहे हैं.

लेकिन पेट से जुड़ी ये एक बीमारी ऐसी है जिसका ज़्यादातर मज़ाक ही उड़ाया जाता है. जिसके बारे में आपस में बात भी नहीं की जाती. यहां तक कि  डॉक्टर को दिखने जाने में भी लोगों को शर्म महसूस होती है.

अगर पाइल्स या आसान भाषा में कहें तो बवासीर के बारे में रोज़मर्रा के ज़िंदगी में बात की जाए तो इससे बिलकुल बचा जा सकता है. पाइल्स के बारे में बात करना, पेट के बारे में बात करना है. कहा जाता है कि हमारे शरीर की सारी बीमारियां पेट से ही किसी न किसी तरह जुड़ी होती हैं. पाइल्स भी हमारे पेट से ही जुड़ी है.


आखिर पाइल्स की बीमारी होती क्या है?

पाइल्स को समझने के लिए आपको अपने पेट को समझने की ज़रूरत है. हमारा पेट एक मोटी दीवारों वाला थैली नुमा ऑर्गन है जिसमें खाना जाता है. यह हमारे शरीर का मिक्सर ग्राइंडर भी है. एसिड और ऐंज़ाइम छोड़कर यह खाने को छोटा करता है पेस्ट बनाकर छोटी आंत में भेज देता है.
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छोटी आंत लिवर और पैंक्रियास की मदद से खाने को और बारीक करके पचाती है. यहीं से खाने में मौजूद पोषक तत्व खून के ज़रिये  शरीर को मिलते हैं.

बड़ी आंत में छोटी आंत से जो कुछ बैक्टीरिया या कचरा बचता है वह आ जाता है. जब बड़ी आंत भर जाती है तब वह यह सब रेक्टम में शिफ्ट कर देती है.

रेक्टम ऐनस के ज़रिये इस पूरे कचरे को शरीर से बाहर निकाल देती है.

रेक्टम और ऐनस के बीच होता है ऐनल पैसेज. यही वो जगह है जहां से पाइल्स शुरू होता है.

पाइल्स असल में ऐनल पैसेज में आने वाली सूजन, घाव, अलसर, या बढे हुए मांस को कहते हैं. यह छोटा बड़ा कैसा भी हो सकता है. अंदरूनी या बाहरी भी हो सकता है. सूखा हो सकता है या उसे खून भी आ सकता है. ये घाव आपके ऐनस के 2-4 सेंटीमीटर के भीतर होते हैं लेकिन बाहर आने पर आप उन्हें छूकर महसूस कर सकते हैं.



पाइल्स होने के कारण क्या होते हैं?
पाइल्स का सबसे बड़ा कारण होता है कॉन्स्टिपेशन यानि कब्ज़. कहज जब आपकी आंतों पर ज़ोर डालती है तो पाइल्स होने का खतरा बढ़ जाता है. आपका पेट का खाना जब नीचे आने लगता है तो उसमें माैजूद हानिकारक बैक्टीरिया या तेज़ मसाले जो आप हजम नहीं कर पाते वो रेक्टम और ऐनस के बीच होता है ऐनल पैसेज को नुकसान पहुंचाते हैं.

गर्भवती महिलाओं को भी पाइल्स होने का खतरा होता है क्योकि उनके शरीर पर भी गर्भधारण के दौरान ज़ोर पड़ता है.  बहुत ज़्यादा तेल, मसाले, मिर्च वाला खाना खाने से या मैदे की रोटियां खाने से भी पाइल्स होता है. जिम में बहुत वज़न उठाने से भी पाईल्स होता है.

पाइल्स की चार स्टेज होती हैं -

स्टेज 1 : शुरुआती स्टेज में खास लक्षण दिखाई नहीं देते. पता भी नहीं चलता कि पाइल्स हैं क्योंकि खास दर्द महसूस नहीं होता. इस समय पाइल्स अंदर ही होते हैं.

स्टेज 2: अब मल त्याग के वक्त मस्से बाहर की ओर आने लगते हैं, लेकिन हाथ से भीतर करने पर वे अंदर चले जाते हैं. पहली स्टेज की तुलना में इसमें थोड़ा ज्यादा दर्द महसूस होता है और जोर लगाने पर खून भी आने लगता है.

स्टेज 3: इस स्थिति में मरीज को तेज दर्द महसूस होता है और मल त्याग के साथ खून भी ज्यादा आता है.

स्टेज 4 : दर्द और खून तेज हो जाता है. इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.

आपको पाइल्स है या नहीं?
पाइल्स के लक्षण देखकर जांचें आपको पाइल्स है या नहीं.  मल त्याग करते वक्त दर्द होना. कभी खून निकलना. ऐनस के आसपास सूजन या गांठ सी महसूस होना या खुजली का होना. मल त्याग करने के बाद भी ऐसा लगते रहना जैसे पेट साफ न हुआ हो.



पाइल्स का इलाज

-  डॉक्टर को दिखाएं : जैसे ही आपको यह लगे कि आप पाइल्स से जूझ रहे हैं जल्द ही जूझ रहे होंगे तो तुरंत एक गैस्ट्रोइंटोलॉजिस्ट (वो डॉक्टर जो पेट से जुडी बीमारियां देखता है) को दिखाएं.

- अपने खाने पीने के तौर तरीके तुरंत बदलें. कोशिश करें कि ज़्यादा से ज़्यादा हरी और कच्ची सब्ज़ियां खाएं. खूब फल खाएं. ज़्यादा तेल मसले वाला भोजन न करें. दिन में एक समय सैर ज़रूर करें.

- इसबगोल की भूसी: अगर आपको सुबह मल त्यागने में परेशानी होती है तो रात में इसबगोल की भूसी दूध या गर्म पानी के साथ लें.   रात को बहुत देर से भोजन न करें.

- पानी खूब पियें. ज्यूस पिएं. शराब का सेवन काम करें, न करें तो बेहतर.

राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साईंसिस के शोधकर्ताओं द्वारा एक अध्ययन  के अनुसार, भारत में अनुमानित 40723288   लोग बवासीर या पाइल्स से पीड़ित हैं.  प्रत्येक वर्ष, कम से कम एक लाख नए मामले दर्ज किए जाते हैं, जिससे यह सबसे आम बीमारियों में से एक बन गया है.

अगर आपको पाइल्स है तो इस बात को छुपाएं नहीं. यह बेहद आम बीमारी है और इसका उपचार आसानी से संभव है बशर्ते आप इसे छुपाएं  नहीं. अगर आपको पता चलता है कि आपके आस पास किसी को पाइल्स है तो उसका मज़ाक मिलकुल न बनाएं.  अगर पाइल्स का उपचार न किया जाए तो यह ऐनल कैंसर तक बन सकता है.
First published: July 10, 2018, 9:54 AM IST
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