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राहुल और सोनिया पर चल रहा इनकम टैक्स का पूरा मामला क्या है?

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Updated: December 4, 2018, 10:05 AM IST
राहुल और सोनिया पर चल रहा इनकम टैक्स का पूरा मामला क्या है?
आयकर विभाग का कहना है कि टैक्स असेसमेंट में राहुल गाँधी ने तथ्यों को छुपाया था.

आयकर विभाग का कहना है कि 'टैक्स असेसमेंट' में राहुल गाँधी ने 'तथ्यों को छुपाया' था.

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  • Last Updated: December 4, 2018, 10:05 AM IST
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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेशनल हेराल्ड से जुड़े इनकम टैक्स मामले में सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा. कोर्ट ने 13 नवंबर को हुई सुनवाई में आयकर विभाग की नोटिस पर रोक लगाने से मना कर दिया गया था. लेकिन राहुल व सोनिया गांधी की याचिका को सुनने के लिए स्वीकृति दी थी. राहुल और सोनिया गांधी ने नेशनल हेराल्ड से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीमकोर्ट में अपील की थी. उन्होंने नेशनल हेराल्ड से जुड़े ‘टैक्स एसेसमेंट’की दोबारा जांच के लिए आयकर विभाग के नोटिस पर रोक की मांग की थी.

इससे पहले इसी मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेताओं की याचिका ये कहते हुए खारिज की थी कि आयकर विभाग कर संबंधी मामलों की दोबारा जांच कर सकता है, चाहे वे पुराने क्यों न हों.

आयकर विभाग ने कांग्रेस के इन नेताओं को वित्तवर्ष 2011-12 के आयकर संबंधी विवरण में यंग इंडिया से हुई आय का जिक्र न करने पर नोटिस भेजा था. इस नोटिस को लेकर कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां आज सुनवाई होनी है. आयकर विभाग का कहना है कि 'टैक्स असेसमेंट' में राहुल गांधी ने 'तथ्यों को छुपाया' है.



सोनिया और राहुल पर क्यों लगे कर चोरी के आरोप?



ये मामला नेशनल हेराल्ड अख़बार से जुड़ा हुआ है. हेराल्ड की स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी. तभी से अखबार को कांग्रेस पार्टी के मुखपत्र की तरह देखा जाता था. अख़बार का स्वामित्व 'एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड' यानी 'एजेएल' के पास था, जो हिंदी और उर्दू अख़बार भी छापता था, इनके नाम 'नवजीवन' और 'क़ौमी आवाज़' हैं.

आज़ादी के बाद क्या बदला?

आज़ादी के बाद पहली बार 1956 में एजेएल को ग़ैर व्यावसायिक कंपनी के रूप में स्थापित किया गया. कंपनी एक्ट धारा 25 के तहत इसे कर मुक्त कर दिया गया. वर्ष 2008 में 'एजेएल' के सभी प्रकाशनों को निलंबित कर दिया गया. इसके चलते कंपनी पर 90 करोड़ रुपए का क़र्ज़ चढ़ा.



 

 

 

 

 

 

 

कैसे शुरु हुआ पूरा मामला?

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने साल 2012 में कर कांग्रेस के नेताओं पर एक याचिका दायर 'धोखाधड़ी' के गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक कंपनी ने सिर्फ़ 50 लाख रुपयों में 90.25 करोड़ रुपए वसूलने का उपाय निकाला, जो सरासर चोरी है. याचिका में आरोप है कि 50 लाख रुपए में नई कंपनी बना कर 'एजेएल' की 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति को 'अपना बनाने की चाल' चली गई.

स्वामी की शिकायत के बाद क्या हुआ?

दिल्ली की एक अदालत ने मामले में चार गवाहों के बयान दर्ज किए और 26 जून, 2014 को अदालत ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित नई कंपनी में निदेशक बनाए गए सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और मोतीलाल वोरा को पेश होने का समन भेज दिया.

कांग्रेस ने क्या किया?

कांग्रेस नेतृत्व ने 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक नई ग़ैर व्यावसायिक कंपनी बनाई जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित मोतीलाल वोरा, सुमन दुबे, ऑस्कर फर्नांडिस और सैम पित्रोदा को निदेशक बनाया गया. 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास 76 प्रतिशत शेयर थे जबकि बाकियों के पास 24 प्रतिशत.



90 करोड़ रुपए के क़र्ज़ का क्या हुआ?

जस्टिस एके चावला और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट की बेंच ने कहा कि 'एजेएल' के पास 90 करोड़ रूपए का ऋण बकाया है जो उसे 'आल इंडिया कांग्रेस कमेटी' ने दिया था. आयकर विभाग ने कहा कि कि राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और आस्कर फर्नांडिस को इस लिए नोटिस भेजे गए क्योंकि उन्होंने वित्त वर्ष 2011-2012 में 'असेसिंग ऑफ़िसर' से तथ्य छुपाए और अधिकारी को सही अवलोकन करने का मौक़ा नहीं मिला. अदालत का कहना था कि 'अगर राहुल गाँधी ने अपने आयकर 'रिटर्न' या अन्य किसी दस्तावेज़ के माध्यम से शेयर ख़रीदने की बात बताई होती तो यह रिकार्ड में होता'.

क्या सही क्या गलत?

अदालत ने भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा राहुल गाँधी और अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ दायर 'कर चोरी' की याचिका को तथ्यपूर्ण मानते हुए कार्यवाही आगे बढ़ाई. आयकर विभाग के वकील का यह भी तर्क था कि जब 'यंग इंडियन' को शेयर आवंटित किए गए उनकी क़ीमत सौ रुपए प्रति शेयर नहीं बल्कि आठ लाख प्रति शेयर से भी ऊपर थी.

कांग्रेस की सफाई

कांग्रेस के नेताओं की अदालत में दलील रही है कि 'यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड' नाम की संस्था को 'सामजिक और दान करम' के कार्यों के लिए बनाया गया है. 'एजेएल' के शेयर ट्रांसफर ग़ैर क़ानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि एक शेयर एक वित्तीय प्रक्रिया थी.

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First published: December 4, 2018, 10:05 AM IST
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