सड़कों के मामले में चीन से कितना पीछे है भारत

85,000 किलो मीटर तक फैला दुनिया में चीन का सबसे लंबा राजमार्ग है.

News18Hindi
Updated: August 30, 2018, 4:57 PM IST
सड़कों के मामले में चीन से कितना पीछे है भारत
हाइवे के बीच खड़ा पेड़. Photo: Facebook
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Updated: August 30, 2018, 4:57 PM IST
सड़कों का बुनियादी ढांचा देश के विकास का प्रतीक है और नागरिकों की सुरक्षा और संतुष्टि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. वर्ल्ड इको़नॉमिक फोरम के सर्वेक्षण सर्वेक्षण के मुताबिक बहुत कम एशियाई देशों में सबसे अच्छी सड़क बुनियादी ढांचा है.

सिंगापुर एशिया में सड़क बुनियादी ढांचे के मामले में एशिया में शीर्ष स्थान पर है और विश्व स्तर पर दूसरे नंबर पर है.

इसके बाद जापान और ताइवान आते हैं जो दुनिया में  क्रमशः 5वें और 11वें स्थान पर हैं. दक्षिण कोरिया और मलेशिया जो दुनिया में 14वें और 20वें स्थान पर हैं, उन्हें एशिया में सबसे अच्छी सड़कों वाले देशों में गिना जाता है.

बेहतरीन सड़कों के मामले में चीन का दुनिया में 39 वां स्थान है. बढ़ती अर्थव्यवस्था और बढ़ते विकास के कारण यहां अच्छी सड़के हैं. 85,000 किलो मीटर तक फैला दुनिया में चीन का सबसे लंबा राजमार्ग है. ब्रुनेई और श्रीलंका अन्य दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में बेहतर है.

भारतीय सड़कों की स्थिति 51 वें स्थान पर है. थाईलैंड और पाकिस्तान से क्रमश: 60 और 77 पर हैं जो भारत से काफी पीछे हैं.

80में नंबर पर आने वाले भूटान ने सीमा और आधार पर सड़क बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए जरूरतों पर ध्यान दिया है. इसके बाद वियतनाम और लाओस ने देश भर में यात्रा आसान बनाने के लिए सड़क बुनियादी ढांचे के विकास में ज्यादा निवेश नहीं किया है.

कंबोडिया ने 93 वें स्थान पर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्पोराडिक रोड विकास किया है. फिलीपींस की सड़कों को अन्य पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में कम विकसित किया गया है. इसके बाद मंगोलिया 109 और बांग्लादेश 113 पर हैं.

नेपाल में एशिया में सबसे खराब सड़कें हैं. संसाधनों की कमी और पहाड़ी इलाके सड़क के बुनियादी ढांचे में सुधार देश के उद्देश्य में एक बड़ी बाधा बने खड़े हैं.

सांकेतिक तस्वीर.


प्लस्टिक कचरे की सड़कें

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल सड़कों के निर्माण में अनिवार्य करने की योजना बनाई है. इस परियोजना पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी सहमति जताई है. उम्मीद है कि इस बारे में शीघ्र ही आधिकारिक निर्णय हो जाएगा और सड़कों के निर्माण में कोलतार के साथ ही 10 फीसदी प्लस्टिक कचरे का इस्तेमाल हो सकेगा.

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे के इस्तेमाल से तीन फायदे होंगे. इससे शहर, गांव, कस्बों में उड़ते पॉलिथीन और प्लास्टिक के कचरे से निजात मिलेगी, इससे सड़कें ज्यादा मजबूत बनने के साथ लागत भी घटेगी और इससे प्लास्टिक कचरा बीनने वालों को आमदनी का एक जरिया मिलेगा तथा गांव-शहर स्वच्छ होंगे वह अलग.



 

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे में भी इसका इस्तेमाल होना था, लेकिन कुछ तकनीकी एवं प्रशासनिक बाधाओं की वजह से पहले चरण में इसका इस्तेमाल नहीं हो पाया. अब केंद्र सरकार के तीन मंत्रालय इस दिशा में आगे आए हैं, ताकि इस योजना पर अमल किया जा सके.

ऐसा प्रयोग सिंगापुर में पहले किया जा चुका है.
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