जानें चार घंटे चलने वाले चंद्रग्रहण में क्या क्या होगा

27 जुलाई को पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बीच के हिस्से से होकर गुजरेगा.

27 जुलाई को पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बीच के हिस्से से होकर गुजरेगा.

27 जुलाई को पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बीच के हिस्से से होकर गुजरेगा.

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पहला चंद्रग्रहण अभी भूले नहीं थे कि साल का दूसरा चंद्रग्रहण आ गया है. यह चंद्रग्रहण 27 जुलाई को होगा. कहा जा रहा है कि यह सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण हो सकता है और पूरे भारत में दिखाई देगा. ग्रहण रात 11:54 से शुरू होकर रात 3:49 बजे खत्म होगा.



4 घंटे से ज्यादा लंबा चलने वाला यह ग्रहण आसानी से देखा जा सकेगा. यह इतने अच्छे से दिखेगा कि आपको किसी टेलिस्कोप जैसे उपकरण की जरूरत नहीं पड़ेगी.



चंद्र ग्रहण से पहले सूतक दोपहर 2 बजे से शुरू हो जाएंगे. ज्योतिषियों की मानें तो चंद्रग्रहण के समय माना जाता है कि भोजन करने से बचना चाहिए. वहीं, सुईं और नुकीली चीजों को भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. इस दिन गुरू पूर्णिमा होने के कारण पूजा ग्रहण के सूतक काल लगने से पहले की जा सकती है.





27 जुलाई को पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी की छाया के बीच के हिस्से से होकर गुजरेगा. पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा जब पृथ्वी की छाया से होकर गुजरता है तो वह नाटकीय रूप से चमकीले नारंगी रंग से लाल रंग का हो जाता है और एक दुर्लभ घटना के तहत गहरे भूरे रंग से और अधिक गहरा हो जाता है. यही कारण है कि पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है और उस समय इसे ब्लड मून कहा जाता है.
क्या होता है चंद्रग्रहण?



साइंस की मानें तो चंद्रग्रहण एक प्रकार की खगोलीय घटना है जिनमें सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक ही सीधी रेखा में आ जाते हैं. इससे चांद सूर्य की उपछाया से होकर गुजरता है, जिससे उसकी रोशनी फिकी पड़ जाती है.



जब सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती हुई पृथ्वी एक सीध में अपने उपग्रह चंद्रमा तथा सूर्य के बीच आ जाती है, तो चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें रुक जाती हैं, और पृथ्वी की प्रच्छाया उस पर पड़ने लगती है, जिससे उसका दिखना बंद हो जाता है. इसी खगोलीय घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है.



सूर्य ग्रहण कैले अलग ?

पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ अपने सौरमंडल के सूर्य के चारों ओर भी चक्कर लगाती है. दूसरी ओर, चंद्रमा दरअसल पृथ्वी का उपग्रह है और उसके चक्कर लगता है, इसलिए, जब भी चंद्रमा चक्कर काटते-काटते सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तब पृथ्वी पर सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से दिखना बंद हो जाता है. इसी घटना को सूर्यग्रहण कहा जाता है.







अगले चंद्रग्रहण कब कब?





हो चुका– जनवरी 31, 2018: पूर्ण ग्रहण. एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, पश्चिमी उत्तरी अमेरिका से दिखा.



जुलाई 27, 2018: कुल ग्रहण. दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया से दिखेगा.



जनवरी 19, 2019: कुल ग्रहण.  उत्तर और दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका से दिखेगा.



जुलाई 16, 2019: आंशिक ग्रहण. दक्षिण अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया से दिखेगा.



नासा 2100 तक चंद्र ग्रहण की भविष्यवाणी करने वाली एक सूची बना के रखता है. वे पिछले चंद्र ग्रहण के बारे में डेटा भी रखते हैं. स्पेस एजेंसी के मुताबिक, 21 वीं शताब्दी के दौरान पृथ्वी को कुल 228 चंद्र ग्रहण का अनुभव होगा.





कितनी तरह के चंद्रग्रहण



सुपरमूनः लोगों के पास दो महीने के भीतर लगातार तीसरी बार सुपरमून देखने का मौका था. इससे पहले 3 दिसंबर और 1 जनवरी को भी सुपरमून दिखा था.



सुपरमून वह खगोलीय घटना है जिसके दौरान चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है और 14 फ़ीसदी अधिक चमकीला भी. इसे पेरिगी मून भी कहते हैं. धरती से नजदीक वाली स्थिति को पेरिगी (3,56,500 किलोमीटर) और दूर वाली स्थिति को अपोगी (4,06,700 किलोमीटर) कहते हैं.



ब्लूमूनः यह महीने के दूसरे फुल मून यानी पूर्ण चंद्र का मौक़ा भी है. जब फुलमून महीने में दो बार होता है तो दूसरे वाले फुलमून को ब्लूमून कहते हैं.



ब्लडमूनः चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया की वजह से धरती से चांद काला दिखाई देता है. 31 तारीख को इसी चंद्रग्रहण के दौरान कुछ सेकेंड के लिए चांद पूरी तरह लाल भी दिखाई दिया. इसे ब्लड मून कहते हैं.



यह स्थिति तब आती है जब सूर्य की रोशनी छितराकर चांद तक पहुंचती है. परावर्तन के नियम के अनुसार हमें कोई भी वस्तु उस रंग की दिखती है जिससे प्रकाश की किरणें टकरा कर हमारी आंखों तक पहुंचती है. चूंकि सबसे लंबी तरंग दैर्ध्य (वेवलेंथ) लाल रंग का होती है और सूर्य से सबसे पहले वो ही चांद तक पहुंचती है जिससे चंद्रमा लाल दिखता है. और इसे ही ब्लड मून कहते हैं.



कुल चंद्रग्रहण: पृथ्वी की पूर्ण (उम्ब्रल) छाया चंद्रमा पर पड़ती है. चंद्रमा पूरी तरह से गायब नहीं होता, लेकिन यह एक गहरे अंधेरे में होता है जिसकी वजह से अगर आप ग्रहण की तलाश में नहीं हैं तो आपको शायद यह दिखे भी न. पृथ्वी के वायुमंडल के माध्यम से गुज़रने वाली कुछ सूर्य की किरणें बिखरी हुई हैं और अपवर्तित हैं या चक्कर लगाई गई है और चंद्रमा पर फिर से ध्यान केंद्रित किया गया है तो यह कुल मिलाकर यह एक मंद चमक देता है. यदि आप चंद्रमा पर खड़े थे, तो सूर्य पर वापस देखकर, आप पृथ्वी के काले डिस्क को पूरे सूर्य को अवरुद्ध कर देखेंगे, लेकिन आप पृथ्वी के किनारों के चारों ओर चमकते हुए परावर्तित प्रकाश की एक अंगूठी भी देखेंगे - यह वह प्रकाश है कुल चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पर पड़ता है.







आंशिक चंद्रग्रहण: कुछ ग्रहण केवल आंशिक होते हैं. कुल चंद्रग्रहण कुल होने के लिए दोनों तरफ से आंशिक चरण के माध्यम से होकर जाता है. आंशिक चरण के दौरान, सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा पूरी तरह से एक साथ नहीं होते हैं, और पृथ्वी की छाया से चंद्रमा से कटा हुआ लगता है.



नासा के मुताबिक, "आंशिक चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी से लोग क्या देखते हैं, इस पर निर्भर करता है कि सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा कैसे रेखांकित होते हैं."



पेनुंब्राल चंद्र ग्रहण: यह ग्रहण का सबसे कम दिलचस्प है, क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी (penumbral) छाया में होता है. अगर आप अनुभवी नहीं हैं, तो संभवतः आप इस प्रभाव को नहीं देख पाएंगे.

चंद्र ग्रहण कैसे देखें



चंद्र ग्रहण सबसे आसान खगोलीय कार्यक्रमों में से एक है. बस बाहर जाओ, देखो और आनंद लो. आपको दूरबीन या किसी अन्य विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, दूरबीनों या एक छोटी दूरबीन चंद्र सतह में डीटेल लाएगी. चांदनी एक ग्रहण के दौरान किसी भी समय के रूप में दिलचस्प है.
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