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कैसे गोमूत्र बेचकर मालामाल हो रही है कंपनियां?

गोमूत्र की इतनी डिमांड है कि गिर औऱ थारपरकर नस्ल की गायों का एक लीटर मूत्र 15-30 रुपए में बिक रहा है.

गोमूत्र की इतनी डिमांड है कि गिर औऱ थारपरकर नस्ल की गायों का एक लीटर मूत्र 15-30 रुपए में बिक रहा है.

गोमूत्र की इतनी डिमांड है कि गिर औऱ थारपरकर नस्ल की गायों का एक लीटर मूत्र 15-30 रुपए में बिक रहा है.

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    गोमूत्र बहुत से रोगों के इलाज में सहायक होता है और गोबर का प्रयोग घर की साफ-सफाई के लिए गांवों में हमेशा से किया जाता रहा है. लेकिन अब गोमूत्र केवल गांव-घर के आंगन में नहीं रह गया है. गोमूत्र बाजार में बिक रहा है और कंपनियां इसके जरिए खूब कमाई भी कर रहीं हैं.

    गोमूत्र बेचने वाली कंपनियां

    ए2 नैचुरल्स नाम की बेंगलूरू बेस्ड कंपनी गोमूत्र को से उसकी बू हटाकर बेचती है. कंपनी की को-फाउंडर राधिका मिगलानी  का कहना है कि 2015   में  कंपनी शुरू करते समय उन्हें लगा था कि लोग गई से जुड़े प्रोडक्ट तो खरीदेंगे लेकिन गोमूत्र की बू से उन्हें परेशानी हो सकती है. इसलिए उन्होंने बू हटाकर गोमूत्र बेचना शुरू किया और अब उनकी वेबसाइट से गायों से जुड़े प्रोडक्ट खूब बिकते हैं.

    वे जब पब्लिक में अपने प्रोडक्ट्स दिखने जाते हैं तो लोगों को गौत्र का शॉट लेने के लिए प्रेरित भी करते हैं.  अलग अलग शॉपिंग पोर्टल्स पर आधा लीटर गोमूत्र 40 रूपए से शुरू कर 150 रूपए तक बिकता है.

    बाबा रामदेव का पतंजलि ब्रांड भी बहुत समय से अपना गोमूत्र बेच रहा है. अब पतंजलि गोमूत्र के ज़रिये फिनाइल भी बना रहा है और बाजार में ला रहा है.

    गुजराती कंपनी काल्व्स एंड लीव्ज़ भी गोमूत्र से जुड़े प्रोडक्ट बेचती है और अब फ्यूचर ग्रुप के साथ मिलकर रिटेल में गोमूत्र की सप्लाई करने वाली है.



    राधिका मिगलानी का दावा है  कि गोमूत्र का  बाजार इस साल 100 करोड़ से भी ज्यादा का हो जाएगा. हालांकि पतंजलि जैसे बड़े व्यापारी रोजाना 10,000 लीटर गाय मूत्र खरीदते हैं, जबकि अलग-अलग इकाइयां 500 लीटर से 25,000 लीटर प्रति माह खरीदती हैं. उनकी कंपनी आयुर्वेदिक डॉक्टरों को एंटीबायोटिक्स की बजाय गाय-आधारित दवाओं को संवेदनशील बनाने की योजना बना रही है, किसानों को रासायनिक से प्राकृतिक खेती में स्विच करने के लिए प्रेरित करते हैं और लोगों को एक गाय आधारित प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने का आग्रह कर रही है. मिगलानी की कंपनी के  पास दुबई से लेकर  वाराणसी और केरल तक के उपभोक्ता हैं.

    बाजार की शुरुआत गोशालाओं से

    गोमूत्र के बाजार की शुरुआत गोशालाओं से ही हो रही है. गोशालाओं से गोमूत्र की इतनी डिमांड है कि गिर औऱ थारपरकर नस्ल की गायों का एक लीटर मूत्र 15-30 रुपए में बिक रहा है.

    जयपुर के कैलाश गुर्जर का कहना है कि जब से उन्होंने दूध के अलावा अपनी गायों का मूत्र बेचना शुरु किया है उनकी आमदनी 30% बढ़ गई है.

    लोग आगे भी इसी गोमूत्र को 50 रुपए  लीटर तक बेच रहे है. किसान कीटनाशक के तौर पर गोमूत्र का इस्तेमाल कर रहे हैं इसलिए गोमूत्र सीधे गोशालाओं से खरीदा जा रहा है.

    अपने जैविक खेती प्रॉजेक्ट के लिए उदयपुर की महाराणा प्रताप युनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलाजी हर महीने 300 से 500 लीटर गोमूत्र का इस्तमाल कर रही है.



    गोमूत्र से पंचायतों की आय 

    मोदी सरकार में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने 2017 में सुझाव दिया था कि गोमूत्र बेचकर पंचायत ड्राई डेयरी के माध्यम से प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय कर सकती है. बस इसके लिए किसानों को ड्राई डेयरी के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ नाबार्ड, ग्रामीण विकास, कृषि, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के सहयोग से एक मॉडल विकसित करना होगा.

    पत्र में कहा गया था कि गैर दुधारू पशुओं, खासकर गौवंश की अनदेखी होती है. लिहाजा ड्राई डेयरी पर ध्यान दिया जाए तो गैर दुधारू गौवंश से भी अच्छा लाभ कमाया जा सकता है. ड्राई डेयरी मॉडल गांव स्तर पर रोजगार सृजन में मददगार साबित हो सकता है. पीएमओ ने इस सुझाव का स्वागत किया था.

    गोमूत्र रिफाइनरी

    जालोर के सांचौर में गोधाम पथमेड़ा की ओर से देश का पहला गौमूत्र रिफाइनरी प्लांट लगाया गया है. गौपालकों को गौमूत्र और गोबर से अच्‍छी आमदनी और गौ मूत्र को लोगों तक पहुंचाने के लिए सांचौर की गोधाम पथमेड़ा गौशाला में इस रिफाइनरी प्‍लांट की स्‍थापना की गई.

    रिफाइनरी में दो रुपए में एक किलो गोबर और 5 रुपए में एक लीटर गोमूत्र बेचा जाता है.



    वे तत्व जिनके कारण गोमूत्र बिक रहा है

    1. यूरिया (Urea) : यूरिया मूत्र में पाया जाने वाला प्रधान तत्व है और प्रोटीन रस-प्रक्रिया का एक उत्पाद है. इसमें शक्तिशाली रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है.



    1. यूरिक एसिड (Uric acid): ये यूरिया जैसा ही है और इसमें भी शक्तिशाली प्रति जीवाणु गुण होते हैं. इस के अतिरिक्त ये कैंसर के तत्वों का नियंत्रण करने में मदद करते हैं.

    2. खनिज (Minerals): मूत्र में खाद्य पदार्थों से व्युत्पद अधिक विभिन्न प्रकार की धातुएं होती हैं.

    3. उरोकिनेज (Urokinase): यह जमे हुये रक्त को घोल देता है, ह्रदय विकार में सहायक है और रक्त संचालन में सुधार करता है.

    4. एपिथिल्यम विकास तत्व (Epithelium growth factor)क्षतिग्रस्त कोशिकाओं और ऊतक में यह सुधर लाता है और उन्हें पुनर्जीवित करता है.

    5. कैंसर रोग विरोधी तत्व (Anti cancer substance): निओप्लासटन विरोधी, एच -11 आयोडोल - एसेटिक अम्ल, डीरेकटिन, 3 मेथोक्सी इत्यादि किमोथेरेपीक औषधियों से अलग होते हैं जो सभी प्रकार के कोशिकाओं को हानि और नष्ट करते हैं. यह कर्क रोग के कोशिकाओं के गुणन को प्रभावकारी रूप से रोकता है और उन्हें सामान्य बना देता है.



    1. नाइट्रोजन (Nitrogen) : यह मूत्रवर्धक होता है और गुर्दे को स्वाभाविक रूप से साफ करता है.



    1. सल्फर (Sulphur) : यह आंत कि गति को बढाता है और रक्त को शुद्ध करता है.



    1. अमोनिया (Ammonia) : यह शरीर की कोशिकाओं और रक्त को सुस्वस्थ रखता है.



    1. तांबा (Copper) : यह अत्यधिक वसा को जमने में रोकधाम करता है.



    1. लोहा (Iron) : यह आरबीसी संख्या को बरकरार रखता है और ताकत को स्थिर करता है.



    1. कैल्सियम (Calcium) : यह रक्त को शुद्ध करता है और हड्डियों को पोषण देता है , रक्त के जमाव में सहायक.



    1. लेक्टोस शुगर (Lactose Sugar): ह्रदय को मजबूत करना, अत्यधिक प्यास और चक्कर में रोकथाम.



    1. एंजाइम्स (Enzymes): प्रतिरक्षा में सुधार, पाचक रसों के स्रावन में बढ़ोतरी.



    1. हिप्पुरिक अम्ल (Hippuric acid) : यह मूत्र के द्वारा दूषित पदार्थो को निकाल देता है.

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