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जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राममंदिर-बाबरी मस्जिद परिसर को 3 हिस्सों में बांटा था

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Updated: November 9, 2019, 9:33 AM IST
जब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राममंदिर-बाबरी मस्जिद परिसर को 3 हिस्सों में बांटा था
विवादित परिसर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 3 हिस्सों में बांटने का फैसला दिया था

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने अयोध्या (Ayodhya) में विवादित परिसर (disputed land) को 30 सितंबर 2010 को तीन हिस्सों में बांट दिया था...

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  • Last Updated: November 9, 2019, 9:33 AM IST
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आज अयोध्या (Ayodhya) राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद (Ramjanmbhoomi babri masjid) विवाद पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) फैसला सुनाएगा. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच इस मामले में फैसला सुनाएगी. फैसले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है. अयोध्या में धारा 144 लागू है.

अयोध्या में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवादित परिसर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी. इस मामले में चली सुनवाई के बाद आज फैसले का दिन है. 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राम मंदिर बाबरी मस्जिद विवादित परिसर को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया था. इसमें एक हिस्सा राम मंदिर, दूसरा सुन्नी वक्फ बोर्ड और तीसरा निर्मोही अखाड़े को दिया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी. उसके बाद से सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चली.

कैसे हुआ था राम मंदिर-बाबरी मस्जिद परिसर का बंटवारा

इलाहाबाद हाईकोर्ट की 3 जजों की बेंच ने बहुमत से राम मंदिर-बाबरी मस्जिद परिसर को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला दिया था. कोर्ट ने हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच विवादित परिसर को तीन हिस्सों में बांटने का आदेश दिया. जहां राम लला विराजमान हैं, उस जगह को हिंदू समुदाय को दिया गया था.

60 साल से चले आ रहे विवाद को निपटाते हुए हाईकोर्ट के जज एसयू खान और सुधीर अग्रवाल ने कहा था कि राम मंदिर-बाबरी मस्जिद परिसर में मस्जिद के तीन गुंबदों में बीच का गुबंद, जहां राम लला विराजमान हैं, उस जगह को हिंदू समुदाय को दिया जाता है.

जस्टिस एसयू खान और सुधीर अग्रवाल ने कहा था कि विवादित परिसर की 2.7 एकड़ जमीन को तीन हिस्सों में बांटा जाएगा और इसे सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला पर दावा जताने वाले हिंदू समुदाय को दिया जाएगा.
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when allahabad high court divided ayodhya ram mandir babri masjid disputed land into 3 parts
जहां अस्थायी तौर पर राम लला विराजमान हैं, उस जगह को हिंदुओं को दिया गया था.


जजों की बेंच में एक जज की अलग थी राय

फैसला सुनाने वाले 3 जजों की बेंच में एक जज डीवी शर्मा की इस पर अलग राय थी. जस्टिस शर्मा ने अपने फैसले में कहा था कि विवादित परिसर भगवान राम की जन्मस्थली है. इस स्थल पर मुगल शासक बाबर ने मंदिर को तोड़कर मस्जिद का निर्माण करवाया था. परिसर में स्थित मस्जिद के परीक्षण के बाद ये बात साफ हो जाती है.

जस्टिस एसयू खान ने विवादित परिसर के मैप को सामने रखकर फैसला सुनाया था. इसमें बीच के गुंबद वाली जगह, जहां अस्थायी मंदिर बना है, को हिंदुओं को दिया गया. राम चबूतरा और सीता रसोई को निर्मोही अखाड़े को दिया गया. जस्टिस खान ने अपने फैसले में कहा था कि कोर्ट ने तीनों पक्षों के बीच समान भूभाग का बंटवारा किया है. हालांकि अगर जमीन के बंटवारे में थोड़ा ऊपर-नीचे होता है तो प्रभावित पक्ष को सरकार इस भूभाग के आसपास जमीन उपलब्ध करवाए.

सुन्नी वक्फ बोर्ड को थी फैसले पर आपत्ति

इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने उसी वक्त आपत्ति जताई थी. सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही थी. हालांकि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा था कि कोर्ट के बाहर सेटलमेंट का कोई मामला सामने आता है तो वो इस पर विचार कर सकते हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी


कांग्रेस ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया था. कांग्रेस ने कहा था कि इस फैसले को जीत और हार के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. कांग्रेस ने कहा था कि इस मामले को बातचीत या कोर्ट के फैसले के जरिए ही सुलझाया जा सकता है. कोर्ट ने अपना फैसला दे दिया है. अब इस पर सभी को सहमित जतानी चाहिए.

विश्व हिंदू परिषद ने भी कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई थी. वीएचपी ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि कोर्ट ने अपने फैसले में हिंदुओं की आस्था का ख्याल रखा है. हालांकि बाद में इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गईं. जिस पर सुनवाई के बाद आज फैसला आने वाला है.

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First published: November 9, 2019, 9:33 AM IST
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