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जानिए अल्ताफ बुखारी के बारे में, जो बनने जा रहे थे जम्‍मू कश्‍मीर के नए CM

अल्ताफ बुखारी (image: facebook)

अल्ताफ बुखारी (image: facebook)

अल्ताफ आमतौर पर विवादों से परे रहे हैं. इनके कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस के नेताओं से भी बेहतर संबंध हैं. इसलिए गठबंधन ...अधिक पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सीनियर नेता अल्ताफ बुखारी के बारे में ख़बर थी कि वे वहां के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं. सीएनएन-न्यूज 18 के सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को इस संबंध में नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता उमर अब्दुल्ला के साथ हुई बैठक के बाद सीएम पद के लिए बुखारी के नाम पर सहमति बनी है.

    कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस का गठबंधन
    राज्य में सरकार बनाने की बीजेपी की कोशिशों को झटका देने के लिए कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच सरकार बनाने को लेकर डील हुई है. बुधवार की बैठक के बाद अल्ताफ ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा था, "यह पक्का हो चुका है कि तीनों पार्टियां (कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस) गठबंधन करके राज्य की खास पहचान को बचाए रखने का प्रयास करेंगी."

    बता दें कि 2002 में भी पीडीपी-कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई थी, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बाहर से समर्थन दिया था. यह सरकार पांच साल चली थी.

    1980 में ग्रेजुएट
    अल्ताफ का पूरा नाम सैयद अल्ताफ बुखारी है. बुखारी कश्मीर यूनिवर्सिटी के एग्रीकल्चर कॉलेज, वडोरा से 1980 में ग्रेजुएट हुए. उन्होंने बेचलर ऑफ एग्रीकल्चर साइंस में ग्रेजुएशन की. उनके पिता का नाम सैयद मोहम्मद इकबाल बुखारी है.

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    अल्ताफ बुखारी (फाइल फोटो)


    श्रीनगर जिले की अमीरा कदाल सीट से जीत
    जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव, 2014 में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी. जिसमें अल्ताफ बुखारी श्रीनगर जिले की अमीरा कदाल सीट से जीते थे.

    मुफ्ती का विश्वासपात्र
    बुखारी को पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती का विश्वासपात्र माना जाता है. महबूबा ने पहले इन्हें शिक्षा मंत्री बनाया था. लेकिन बाद में उन्हें वित्त और रोजगार के अतिरिक्त मंत्रालय भी दिए. बुखारी को उनके मजबूत राजनीतिक संपर्कों के लिए जाना जाता है.

    अल्ताफ आमतौर पर विवादों से परे रहे हैं. ये जो गठबंधन (कांग्रेस, पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस का) हो रहा है, इसमें पर्दे के पीछे इनकी खास भूमिका मानी जा रही है. इनके कांग्रेस और नेशनल कान्फ्रेंस के नेताओं से भी बेहतर संबंध हैं. इसलिए गठबंधन सरकार में ये मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं.

    सरकार नहीं बनी तो लगेगा राष्ट्रपति शासन
    मार्च 2015 में पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार बनी थी. तब मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद बने थे, उनके निधन के बाद महबूबा मुफ्ती सीएम बनीं. इस साल 16 जून को पीडीपी-बीजेपी गठबंधन से बीजेपी अलग हो गई थी. जिसके बाद से यहां राज्यपाल शासन लगा हुआ है. 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे हो जाएंगे. इसे और अधिक बढ़ाया नहीं जा सकता है. 19 दिसंबर तक यदि कोई पार्टी सरकार बनाने पर सहमत नहीं होती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लाया जा सकता है.

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    Tags: Jammu and kashmir, Jammu and kashmir politics, Jammu kashmir, Jammu kashmir news, Mehbooba mufti

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