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सारे बड़े अर्थशास्त्री बंगाल से ही क्यों आते हैं?

News18Hindi
Updated: October 15, 2019, 3:47 PM IST
सारे बड़े अर्थशास्त्री बंगाल से ही क्यों आते हैं?
अभिजीत बनर्जी

अमर्त्य सेन (Amartya Sen) के बाद अब बंगाल (West Bengal) से ताल्लुक रखने वाले अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) को नोबेल प्राइज (Nobel Prize) मिला है. बंगाल की धरती में ऐसा क्या है कि यहीं से सारे बड़े अर्थशास्त्री आते हैं...

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  • Last Updated: October 15, 2019, 3:47 PM IST
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भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) को अर्थशास्त्र (Economics) के क्षेत्र में इस साल का नोबेल प्राइज (Nobel Prize) दिया जा रहा है. अभिजीत बनर्जी को उनकी पत्नी एस्थर डफलो और माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र का नोबेल प्राइज दिया जाएगा. अभिजीत बनर्जी का ताललुक पश्चिम बंगाल से है. उनका जन्म कोलकाता में हुआ.

अभिजीत के माता-पिता दोनों अर्थशास्त्री रहे हैं. उन्होंने प्रेजीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई की है. उनके पिता इसी कॉलेज के इकोनॉमिक्स डिपार्टमेंट के हेड रहे थे. इसके पहले अमर्त्य सेन को भी अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था. उनका ताल्लुक भी पश्चिम बंगाल से है.

अमर्त्य सेन की पढ़ाई लिखाई भी कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज से ही हुई है. बंगाल से ताल्लुक रखने वाले अर्थशास्त्रियों की भरमार है. इनमें से दो को नोबेल पुरस्कार तक मिल चुका है. सवाल है कि आखिर सारे मशहूर और बड़े अर्थशास्त्री बंगाल से ही क्यों आते हैं? पश्चिम बंगाल में ऐसा क्या है कि इसकी धरती ने इतने महान अर्थशास्त्री दिए हैं?

पश्चिम बंगाल से आने वाले मशहूर अर्थशास्त्री

पहला नाम तो अमर्त्य सेन का ही है. अमर्त्य सेन भारतीय मूल के पहले अर्थशास्त्री हैं, जिन्हें ये सबसे बड़ा सम्मान मिला. अमर्त्य सेन का जन्म कोलकाता से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर शांतिनिकेतन यूनिवर्सिटी परिसर में हुआ था. शांति निकेतन के बाद उन्होंने कोलकाता यूनिवर्सिटी के प्रेजीडेंसी कॉलेज में पढ़ाई की. बाद में उन्होंने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से भी पढ़ाई की. अर्थशास्त्र में अमर्त्य सेन के योगदान को सब जानते हैं.

amartya sen to abhijit banerjee why most of the famous economists are from west bengal
अभिजीत बनर्जी


दूसरा बड़ा नाम अब अभिजीत बनर्जी बन गए हैं. अभिजीत ने कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज के बाद दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है. जेएनयू के बाद उन्होंने हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से भी डिग्री ली है. अभिजीत फिलहाल एमआईटी में पढ़ा रहे हैं. वो हॉवर्ड और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में भी अर्थशास्त्र पढ़ा चुके हैं.इनदोनों के अलावा भी बंगाल से ताल्लुक रखने वाले अर्थशास्त्रियों की भरमार है. एक नाम अमित मित्रा का है, जो टीएमसी से ताल्लुक रखने वाले मशहूर अर्थशास्त्री हैं. इन्होंने भी कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई के बाद अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी से डिग्री ली है. फिलहाल ये पश्चिम बंगाल के वित्तमंत्री हैं.

एक नाम अमिय कुमार बागची का है. इकोनॉमिक हिस्ट्री, द इकॉनॉमिक्स ऑफ इंडस्ट्रीलाइजेशन और डेवलपमेंट स्टडीज पर इन्होंने खूब काम किया है. मुर्शिदाबाद में जन्में बागची ने पहले प्रेजीडेंसी कॉलेज फिर कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की डिग्री ली है.

एक नाम बिबेक देबरॉय का भी है. ये प्रधानमंत्री के इकोनॉमिक एडवाइजरी काउंसिल के चेयरमैन हैं. देबरॉय नीति आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं. बिबेक देबरॉय ने भी प्रेजीडेंसी कॉलेज से पढ़ाई की है. इनके अलावा कौशिक बसु और जयति घोष जैसे मशहूर अर्थशास्त्री भी रहे हैं. जिनका ताल्लुक बंगाल से रहा है.

क्यों बंगाल से ही आते हैं इतने बड़े अर्थशास्त्री

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में बंगाल ने कीर्तिमान बनाया है. इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं. किसी भी तरह का माहौल बनने में कई वजहें शामिल होती हैं.

ब्रिटिश काल में कोलकाता व्यापारिक केंद्र हुआ करता था. ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहीं डेरा डाला था. इसकी वजह से यहां के लोगों का पश्चिम की उदार विचारधारा से मजूबत रिश्ता बना. यहां से कई लोग पढ़ाई लिखाई करने इंग्लैंड और यूरोप के देशों में गए. ब्रिटिश लोगों के प्रभाव में आकर शिक्षा के प्रचार प्रसार का यहां के समाज पर सकारात्मक असर पड़ा. जिसकी वजह से बंगाल बुद्धिजीवियों का गढ़ बना.

amartya sen to abhijit banerjee why most of the famous economists are from west bengal
अमर्त्य सेन


बंगाल की सांस्कृतिक विरासत हमेशा से समृद्ध रही है. यहां के बच्चों को बहुत छोटे से कला, म्यूजिक और संस्कृति के संस्कार दिए जाने लगते हैं. दूसरी बात बंगाली मैथेमेटिक्स में अच्छे होते हैं. अर्थशास्त्र के मुश्किल आंकड़ों को जानने समझने के लिए मैथेमेटिक्स आना जरूरी है. मैथेमेटिक्स में अच्छे होने का उन्हें फायदा मिलता है. वो अर्थशास्त्र की बारिकियों को ज्यादा अच्छे तरीके से समझ पाते हैं.

एक बात ये भी कही जाती है कि बंगाली अपने पूवर्जों के संस्कार, परंपरा और संस्कृति के प्रति काफी जागरूक होते हैं. उनपर अपने पूर्वजों के नाम को आगे बढ़ाने का सामाजिक दबाव रहता है. शायद अर्थशास्त्र की परंपरा को आगे बढ़ाने के काम में कामयाबी इसलिए भी मिल रही है.

एक बड़ी वजह ये है कि कोलकाता और ढाका में आजादी से पहले से कुछेक अच्छी यूनिवर्सिटी है. इसमें कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज का नाम सबसे ऊपर है. अमर्त्य सेन से लेकर अभिजीत बनर्जी तक इस राज्य के तकरीबन हर मशहूर अर्थशास्त्री ने यहीं से पढ़ाई की है. एक बात ये भी कही जाती है कि बंटवारे के बाद कोलकाता की आर्थिक हालत सबसे ज्यादा खस्ताहाल हो गई. जिसकी वजह से राज्य के उर्जावान बुद्धिजीवियों ने सबसे ज्यादा दिमाग इसी क्षेत्र में लगाया.

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First published: October 15, 2019, 3:47 PM IST
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