क्यों अमेरिका एक के बाद एक बॉर्डर से ही लौटा रहा है चाइनीज सामान?

अमेरिका ने हाल ही में चीन से कपास लेने पर रोक लगा दी- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

अमेरिका (America) के मुताबिक चीन उइगर मुस्लिमों (China Uyghur Muslim) से कपास के खेतों से लेकर सुअर पालन उद्योग में गुलामी करवा रहा है.

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    चीन के शिनजिंयांग प्रांत में उइगरों मुस्लिमों पर शिकंजा और कसता जा रहा है. हाल ही में आई खबर के मुताबिक उइगरों को उनके मजहब के खिलाफ रहने पर मजबूर किया जा रहा है. साथ ही यहां री-एजुकेशन कैंपों में रहते मुसलमानों से जबरन खेतों में काम भी करवाया जा रहा है. कपास के खेतों में उइगरों की गुलामी के संदेह में अमेरिका ने हाल ही में चीन से कपास लेने पर रोक लगा दी.

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन में उइगरों पर हो रही हिंसा पर लगातार बोल रहे हैं. इसके विरोध में ट्रंप प्रशासन ने चीन के खिलाफ कई कदम उठाए. इन्हीं में से एक है चीन से कपास का आयात बंद करना. रॉइटर्स की रिपोर्ट में इस बारे में विस्तार से बताया गया है. इसके अनुसार यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी ने शक जाहिर किया कि चीन से आ रही रुई का बड़ा हिस्सा जो शिनजियांग प्रांत से आया है, उइगरों पर हिंसा का एक उदाहरण है.

    शिनजियांग की रुई उत्पादक कंपनी से कपास लेने पर बैन लगा दिया- सांकेतिक फोटो


    एजेंसी को यकीन है कि उइगर बहुल इलाके में चीन मुस्लिमों से जबरन काम करवा रहा है और इसके बदले में उन्हें कोई पैसे भी नहीं दिए जाते होंगे. यही मानते हुए एजेंसी ने इसी महीने शिनजियांग की रुई उत्पादक कंपनी से कपास लेने पर बैन लगा दिया. शिनजिंयाग प्रोडक्शन एंड कंस्ट्रक्शन कॉर्प्स नाम से ये कंपनी चीन में कपास की सबसे बड़ी उत्पादक है.

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    ट्रंप प्रशासन का ये कदम चीन पर एक और वार है. इससे पहले ट्रंप ने चीन से आए सामानों पर टैक्स बढ़ाने जैसा भी फैसला लिया. साथ ही साथ अमेरिका में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध रखने वालों के लिए वीजा में भी सख्त नियम बनाए जा चुके हैं. साथ ही अमेरिकी लोग खुद भी अघोषित तौर पर मेड इन चाइना के बहिष्कार में लगे हुए हैं.

    बता दें कि अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होम सिक्योरिटी के सेक्रेटरी Kenneth Cuccinelli, जो सीमा से आयातित होने वाले मामलों पर नजर रखते हैं, उन्होंने कहा था कि मेड इन चाइना लिखे हुए उत्पाद असल में एक चेतावनी हैं.

    डिटेंशन कैंप में रहती मुस्लिम महिलाओं के बाल जबर्दस्ती काटे गए- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    इससे पहले जून में भी उइगरों पर चीन की बर्बरता की एक और कहानी सामने आई. यूएस फेडरल अधिकारियों ने बालों के विग और चोटियां जब्त कीं. लगभग 11.8 मैट्रिक टन के ये विग 8 लाख डॉलर से ज्यादा कीमत के थे. चीन से आए इस शिपमेंट के बारे में आशंका है कि डिटेंशन कैंप में रहती मुस्लिम महिलाओं के बाल जबर्दस्ती काटे गए. इस बारे में टाइम से बात करते हुए CBP के एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट कमिश्नर ब्रेंडा स्मिथ ने कहा कि अमेरिका किसी भी तरह के अवैध और अमानवीय तरीके की प्रैक्टिस को बर्दाश्त नहीं कर सकता. इस बयान के बाद शिपमेंट लौटा दी गई.

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    इसके साथ ही अमेरिकन डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स ने अमेरिका को शिनजिंयाग प्रांत की सभी 37 कंपनियों के साथ काम करते हुए सतर्कता बरतने को कहा है. कथित तौर पर इस प्रांत का पूरा उद्योग ही फोर्स्ड लेबर और हिंसा पर आधारित है.

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    शिनजियांग में मुस्लिमों से साथ अत्याचारों की लंबी लिस्ट है. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने साल 2017 की शुरुआत में इनपर कई प्रतिबंध लगाए थे. इनमें लंबी दाढ़ी रखना, सार्वजनिक स्थानों पर नकाब पहनना जैसी बातें शामिल थीं. तर्क था कि ये रोक आतंकवाद के खिलाफ चीन के अभियान के तहत लगाई गई है. नकाब या दाढ़ी वाले उइगर मुस्लिमों पर बसों या दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट में चढ़ने की मनाही की खबरें भी चर्चा में आईं.

    चीन में रिफॉर्म के नाम पर लाखों लोगों को कैंपों में रखा गया- सांकेतिक फोटो (flickr)


    हालांकि ये तमाम हिंसाएं दूसरी कई हिंसाओं के आगे कुछ भी नहीं. रिफॉर्म के नाम पर लाखों लोगों को कैंपों में रखा गया. यहां उनके साथ तमाम तरह की हिंसाएं लगातार हो रही हैं. यूनाइटेड नेशन्स ने खुद माना कि ये चीन सरकार ने शिनजियांग को एक तरह से 'नजरबंदी शिविर' में तब्दील कर दिया है. यहां मुस्लिमों को चीनी भाषा और संस्कृति को मानना सिखाया जाता है. उनसे धर्म बदलने को कहा जाता है और न मानने वालों के साथ शारीरिक हिंसा होती है.

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    अब ये भी खबर बाहर आई कि रीएजुकेशन कैंपों में मुस्लिमों को पोर्क परोसा जा रहा है. बता दें कि मुस्लिम अपनी धार्मिक आस्था के चलते पोर्क कतई नहीं खाते हैं. लेकिन चीन न केवल उन्हें पोर्क खाने पर मजबूर कर रहा है, बल्कि कथित तौर पर शिनजिंयाग प्रांत में सुअर पालन किया जा रहा है और इस काम में भी मुस्लिमों से गुलामी करवाई जा रही है.

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