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70 सालों के सबसे बुरे दौर में पहुंच गए हैं अमेरिका-चीन संबंध

News18Hindi
Updated: April 1, 2020, 6:29 PM IST
70 सालों के सबसे बुरे दौर में पहुंच गए हैं अमेरिका-चीन संबंध
कोरोना वायरस को लेकर चीन और अमेरिका में आरोपों का दौर गहरा गया है.

चीन और अमेरिका (China and America) के बीच ट्रेड वार (Trade War) तो पहले ही चल रहा था लेकिन कोरोना वायरस ने दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी और ज्यादा बढ़ा दी है.

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कोरोना महामारी (Corona Pandemic) ने दुनिया को बता दिया है कि बेहद बुरे हालात कैसे होते हैं. इस महामारी की वजह से न सिर्फ दुनिया के देश खुद को बचाने के लिए जूझ रहे हैं बल्कि वैश्विक महाशक्तियों के संबंध अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गए हैं. चीन के वुहान से उपजी इस महामारी ने देश की छवि को वैश्विक स्तर पर आघात पहुंचाया है. इस महामारी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक मंच से चीनी वायरस कहकर पुकारा है. अमेरिका के स्टैंड का चीन लगातार विरोध कर रहा है. माना जा रहा है कि दोनों वैश्विक महाशक्तियों के संबंध बदतर दौर में हैं.

चीन लगा रहा है अमेरिका पर आरोप
VOX न्यूज पर प्रकाशित एक लेख के मुताबिक ट्रंप प्रशासन कोरोना को लगातार चीनी वायरस कहकर अपनी खामियों से पल्ला झाड़ना चाहता है. अमेरिका के आरोपों से गुस्साए चीन की तरफ से कहा जा रहा है कि ये वायरस चीन में अमेरिकी सेना के अधिकारियों ने पहुंचाया है. चीन और अमेरिका के संबंध बीते सालों में ट्रेड वार की वजह से बुरे तो थे ही लेकिन कोरोना वायरस ने इन्हें बदतर हालात की तरफ धकेल दिया है. इसी बीच ब्रिटिश प्रशासन की चीन के बारे में तल्ख टिप्पणी से ये आशंकाएं जाहिर की जाने लगी है कि क्या दुनिया अगला शीत युद्ध देखने वाली है?

क्या कहते हैं एक्सपर्ट



अमेरिका-चीन संबंधों के विशेषज्ञ इवान ऑसनॉस के मुताबिक चीन धीरे-धीरे अमेरिका के नीचे की जमीन खिसका रहा है. अब अमेरिकी लोगों को भी चीन की ताकत का एकाएक एहसास होना शुरू हो गया है. चीन नए वैश्विक नियम लिख रहा है. इवान का कहना है कि जब तक अमेरिका कई चीजों के बारे में अपने लोकतांत्रिक स्वरूप की वजह से सोचता रहता है, चीन वह कर गुजरता है. इवान ने फेस रिकग्निशन टेक्नॉलॉजी के माध्यम से इसे समझाया है. उनका कहना है कि चीन ने अपने यहां बड़े स्तर पर फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. इसे वो बड़े स्तर पर सर्विलांस के लिए इस्तेमाल करता है. चीन को सिविल राइट्स जैसी चीजों से नहीं जूझना है.



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24 गुना बढ़ गई चीनी अर्थव्यवस्था
इवान के मुताबिक 1994 में चीन की अर्थव्यवस्था इटली से भी छोटी थी. अब ये 24 गुना ज्यादा बढ़ गई है. अब ये अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर आ गई है. यानी लड़ाई सीधे टक्कर की है. चीन अब वो हर हथियार आजमा रहा है जिसके जरिए नंबर 1 अर्थव्यवस्था बन सके. चीन ने सीधे तौर पर अमेरिका के वैश्विक व्यावसायिक हितों को चैलेंज किया है.

कोरोना से उबरने को लेकर हो रही चीन की प्रशंसा
कोरोना वायरस के फैलाव को लेकर इवान का कहना है कि यह सच है कि चीन ने शुरुआती स्तर पर सूचनाओं को दबाया. जिस डॉक्टर ने कोरोना के बारे में जागरूक करने की कोशिश की उसे चुप करा दिया. लेकिन यह भी सच है कि एक बार वायरस के संक्रमण की रफ्तार बढ़ जाने पर चीन ने इसे दबाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी. हम उनके उपायों को अत्याचारी बता सकते हैं लेकिन दुनिया में कई जगहों पर इसकी तारीफ हो रही है. जबकि अगर अमेरिका में देखा जाए तो संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाने के बावजूद हमारे इंतजाम ठीक नहीं रहे.

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अपने हितों पर और ज्यादा ध्यान देगा चीन
अब यह तय है कि कोरोना वायरस की वजह से चीन अर्थव्यवस्था ठीक करने के लिए और ज्यादा राष्ट्रवाद पर ध्यान देगा. लेकिन उसके हित सीधे अमेरिका से टकराएंगे. अब दोनों ही तरफ से कोरोना वायरस को लेकर आरोपों का लंबा खेल चलने वाला है. अमेरिका के साथ छवि का भी संकट है. उसे लोकतांत्रिक मूल्यों की बहस को हमेशा तेज बनाए रखना होगा क्योंकि वही उसका सबसे मजबूत पक्ष है. जबकि चीन इस बात से नहीं जूझ रहा है.

बदतर हालात में दिख सकते है चीन-अमेरिका संबंध
इसमें कोई संदेह नहीं कि कोरोना संकट के बाद अमेरिकी चुनावों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के खिलाफ और कठोर स्टैंड लेंगे. संभव है उन्हें इसमें कुछ यूरोपीय देशों को साथ मिले. इससे स्थितियां और बिगड़ेंगी ही. उधर पहले से तैयार बैठा चीनी नेतृत्व अब हर आरोप का जवाब एक नए आरोप से दे रहा है. संभव है आने वाले सालों में दुनिया अमेरिका-चीन संबंध को बेहद बुरे दौर में देखे.

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First published: April 1, 2020, 6:14 PM IST
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