अमेरिका के खिलाफ ईरान के साथ खड़े हैं दुनिया के ये खूंखार आतंकी संगठन

अमेरिका के खिलाफ ईरान के साथ खड़े हैं दुनिया के ये खूंखार आतंकी संगठन
ईरान के साथ दुनियाभर के कुछ खूंखार आतंकी संगठन खड़े हैं

अमेरिका (America) के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर (Proxy War) में ईरान (Iran) को कई देशों में ऑपरेट कर रहे आतंकी संगठनों (terrorist organisation) का साथ मिलेगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 11, 2020, 6:01 PM IST
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अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच के तनाव को कम करने की कोशिशें तेज हुई हैं. ईरान के कुद्स आर्मी के प्रमुख कासिम सुलेमानी (Qassim Soleimani) के अमेरिकी हवाई हमले (American Air Strike) में मारे जाने के बाद एक वक्त युद्ध जैसे हालात बन पड़े थे. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इराक में अमेरिकी सैन्य बेस पर दर्जनों मिसाइलें भी दागीं. उसके बाद भी तनाव कम करने के उपाय जारी है.

कहा जा रहा है कि अमेरिका ने जितना बड़ा नुकसान ईरान का किया है, उसकी भरपाई के लिए ईरान इतने कम पर नहीं मानने वाला है. ईरान अभी और बदले लेगा. ईरान अमेरिका के साथ सीधी लड़ाई में जीत नहीं सकता. इसलिए वो प्रॉक्सी वॉर के जरिए अमेरिका को निशाना बनाएगा. इसके लिए दुनियाभर के कुछ खूंखार आतंकी संगठन ईरान का साथ देंगे.

प्रॉक्सी वॉर में ईरान को मिलेगा इन खूंखार आतंकी संगठनों का साथ
अमेरिका के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर में ईरान को सबसे ज्यादा लेबनान पर भरोसा है. लेबनान का आतंकी संगठन हिजबुल्लाह ईरान के सबसे ज्यादा काम आ सकता है. लेबनान में सिविल वॉर के दौरान 1980 में इस संगठन की स्थापना हुई थी. अब हिजबुल्लाह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑपरेट कर रहा है.
अमेरिका के खिलाफ ईरान के प्रॉक्सी वॉर में हिजबुल्लाह के आतंकियों के इस्तेमाल का अंदेशा सबसे ज्यादा है. ईरान ने इजरायल के खिलाफ जंग में हिजबुल्लाह को हथियार सप्लाई किए थे. गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान हिजबुल्लाह को हर साल 700 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद भी देता है. इसलिए ईरान को उस पर सबसे ज्यादा भरोसा है.



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अमेरिका के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर में ईरान के साथ खड़े हैं कुछ खूंखार आतंकी संगठन


इराक और सीरिया के आतंकी संगठन भी ईरान के साथ
इराक का कताएब हिजबुल्लाह संगठन भी ईरान के साथ खड़ा होगा. कासिम सुलेमानी के साथ कताएब हिजबुल्लाह का एक कमांडर भी अमेरिकी हवाई हमले में मारा गया था. कताएब हिजबुल्लाह के आतंकियों ने ही नए साल के मौके पर इराक में अमेरिकी दूतावास पर हमला बोला था. इराक के इस सशस्त्र संगठन पर कासिम सुलेमानी का बहुत ज्यादा प्रभाव था. ईरान के साथ कताएब हिजबुल्लाह भी अमेरिका से अपने कमांडर की मौत का बदला लेना चाहेगा.

अमेरिका के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर में ईरान को सीरिया की असद सरकार के साथ वहां के आतंकी संगठनों का भी साथ मिलेगा. सीरिया में शिया मिलिशिया (लड़ाकों) के दर्जनों गुट हैं. ये सब ईरान का साथ देंगे. इन सबको ईरान ही हथियारों की सप्लाई करता है.

यमन और फिलीस्तीन के आंतकी गुट भी ईरान के साथ खड़े हैं
यमन के सिविल वॉर में ईरान वहां के हूती विद्रोहियों का साथ दे रहा है. 2015 से वहां हूती विद्रोहियों ने गृहयुद्ध छेड़ रखा है. ईरान इन्हें हथियार, तकनीक, रक्षा सलाह से लेकर हाईटेक ड्रोन्स तक की सप्लाई कर रहा है. यमन के हूती विद्रोही ईरान के साथ हर वक्त खड़े रहेंगे. अमेरिका के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर में भी वो उनका साथ देंगे.

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ईरान ने पिछले दिनों आईएस के साथ सहयोग की बात कही थी


ईरान अपनी सुविधा के हिसाब से फिलीस्तीन के हमास गुट से संबंध रखता रहा है. वैसे तो हमास सुन्नी मुसलमानों का संगठन है. लेकिन ईरान के पैसों और हथियारों की वजह से उसका ईरान के साथ जुड़ाव रहा है. इजरायल को चुनौती देने के लिए उसे ईरान की मदद की जरूरत पड़ती रही है. अब ईरान को उसके मदद की जरूरत है. ऐसे में हमास भी प्रॉक्सी वॉर में ईरान का साथ दे सकता है.

ईरान को अफगानिस्तान के आईएसआईएस का भी साथ मिल सकता है. पिछले साल ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने आईएसआईएस के साथ सहयोग के संकेत दिए थे. विदेश मंत्री ने कहा था कि बिना तालिबान के अफगानिस्तान का भविष्य नहीं हो सकता. सुन्नी संगठन होने के बावजूद आईएस ईरान का साथ दे सकता है.

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