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जानिए, America किन देशों को मानता है आतंकवाद का गॉडफादर

डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)

अमेरिका के पास एक लिस्ट है, जिसमें उन देशों के नाम हैं, जो आतंकवाद (state sponsor of terrorism list in America) फैलाने में आगे रहे. इस लिस्ट में आने के बाद उस देश को सारी अमेरिकी मदद बंद हो जाती है.

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    हाल ही में अमेरिका ने अफ्रीकी देश सूडान (Sudan) को बड़ी राहत देते हुए राज्य प्रायोजित आतंकवाद (state sponsor of terrorism) की सूची से हटा दिया. माना जा रहा है कि इजरायल को मान्यता देने के बदले अमेरिका ने सूडान को ये इनाम दिया. वैसे अमेरिका की ये सूची लंबी है, जिसमें शामिल देशों के बारे में उसका पक्का मत है कि वे आतंक फैलाने वाले देश हैं.

    सूडान का मामला
    इस देश को अमेरिका ने 1993 में सूची में शामिल किया था. अब इसी साल के अक्टूबर में इस देश ने इजरायल को मान्यता देने पर सहमति दी. साथ ही उसने अपने यहां के आतंकी हमलों में मारे गए लोगों के परिवारों और घायलों की मदद के लिए 335 मिलियन डॉलर देने की भी बात की. इसके बाद ही ट्रंप ने इस आशय का ट्वीट किया था कि वे सूडान को आतंक प्रायोजित करने वाले देशों की सूची से हटा सकते हैं.

    सूडान को अमेरिका ने 1993 में इस सूची में शामिल किया था- सांकेतिक फोटो (CNN)


    अमेरिका के पास इस सूची को State Sponsors of Terrorism लिस्ट कहते हैं. ये वो लिस्ट है, जिसमें शामिल देश किसी भी तरह की अमेरिकी मदद नहीं पा सकते. इसमें कूटनीतिक सहायता, डिफेंस एक्सपोर्ट पर बैन, द्वितरफा इस्तेमाल वाले सामानों के निर्यात पर कड़ाई और कई तरह के वित्तीय पहरे होते हैं. कुल मिलाकर अमेरिका अगर किसी देश को आतंक फैलाने वाला देश मान ले तो उस देश को सुपर पावर के अलावा, उसके मित्र राष्ट्रों से भी खास मदद नहीं मिल पाती है.

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    यही कारण है कि सूडान और कई दूसरे देशों ने खुद को इस सूची से हटाने के लिए कई कोशिशें कीं. सूडान से पहले इराक इस लिस्ट से सबसे पहले हटने वाला देश था. उसे साल 1982 में लिस्ट से हटाया गया. लेकिन 1990 में इस देश ने अमेरिका को दोबारा नाराज कर दिया और दोबारा इस लिस्ट का हिस्सा बन गया. साल 2004 में इसे फिर हटाया गया. तब से इराक लिस्ट से हटा हुआ है.

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    दक्षिण यमन को साल 1990 में अमेरिका ने अपनी इस आतंकी देश वाली लिस्ट से हटा दिया. इसके बदले में दक्षिण यमन को उत्तरी यमन से मिलना पड़ा. अफ्रीकी देश लीबिया भी अमेरिका की हिट लिस्ट में रहा. उसे साल 2006 में हटाया गया. वहीं क्यूबा इस लिस्ट से साल 2015 में हटा है. उसके बाद इन चार सालों में कोई देश सूची में न तो शामिल हुआ, और न ही हटा.

    सूडान के भी हटने के बाद अमेरिका की टैरर लिस्ट में केवल 3 ही देश बाकी हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


    अब सूडान के भी हटने के बाद अमेरिका की टैरर लिस्ट में केवल 3 ही देश बाकी हैं. इनमें से एक है ईरान. इसके साथ अमेरिका का रिश्ता काफी तनावपूर्ण है और दोनों ही देश एक-दूसरे पर हमला करने की खुली चेतावनी देते हैं. हाल ही में अपने मित्र राष्ट्रों के विरोध के बाद भी अमेरिका ने ईरान से व्यापारिक प्रतिबंध न हटाने की बात की. इसके तहत ईरान के साथ हथियार का व्यापार नहीं हो सकता है. खासकर हेलीकॉप्टर और फाइटर मिसाइलें नहीं खरीद सकता. ऐसे में हाल-फिलहाल में इस देश को आतंकी देशों की लिस्ट से हटाने की बात दूर ही है.

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    अमेरिका की आतंक फैलाने वाले देशों की सूची में एक नाम उत्तर कोरिया का है. ये देश साल 1988 में सूची में जुड़ा, फिर हटा और साल 2017 में दोबारा इस लिस्ट में आ गया. अमेरिका के इस देश से भी अच्छे संबंध नहीं.

    ईरान के साथ अमेरिका का रिश्ता काफी तनावपूर्ण है- सांकेतिक फोटो (militarist)


    Country Reports on Terrorism की लिस्ट में बताया गया है कि उत्तर कोरिया ने कई देशों में आतंक फैलाने की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष कोशिश की. उसने आतंकी देशों को हथियार भी बेचे. साथ ही अमेरिका का आरोप है कि अपने दुश्मनों को मारने के लिए ये नर्व एजेंट VX का भी इस्तेमाल करता है, जो कि इंटरनेशनल वेपन कंवेंशन के तहत प्रतिबंधित है, हालांकि उत्तर कोरिया ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया.

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    सीरिया को साल 1979 में इस लिस्ट में शामिल किया गया. इसी दौर में लीबिया भी इस सूची में आया था लेकिन अब वो हट चुका है और सीरिया बाकी है. अरब स्प्रिंग के दौरान बुरी तरह से आतंक से घिरा ये देश वैसे तो अपने-आप में पीड़ित देश है लेकिन इसका एक और चेहरा भी है. यहां पर बड़ी संख्या में आतंकी संगठन हैं, जो पूरी दुनिया में तबाही मचाते रहे. इसके अलावा यहां केमिकल वेपन का भी बड़ा जखीरा है. अमेरिका को डर है कि अगर ये हथियार आतंकी इस्तेमाल करने लगे तो बड़ा नुकसान हो सकता है. यही वजह है कि सीरिया न केवल इस सूची में है, बल्कि इसपर दूसरे देश भी लगातार नजर रखे हुए हैं.

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