अपना शहर चुनें

States

वो द्वीप, जिसपर चीन की दशकों से थी नजर, अब अमेरिका बना रहा वहां सैन्य बेस

कोरोना से चरमराई अर्थव्यवस्था के बीच अमेरिका चीन पर लगातार हमलावर है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
कोरोना से चरमराई अर्थव्यवस्था के बीच अमेरिका चीन पर लगातार हमलावर है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

चीन पर नजर रखने के अमेरिकी रक्षा विभाग तिनिआन द्वीप (Tinian island) पर अपना वैकल्पिक सैन्य बेस (alternative military base of America) बनाने जा रहा है. बता दें कि चीन की लंबे समय से इसपर नजर थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 4, 2020, 2:08 PM IST
  • Share this:
कोरोना से चरमराई अर्थव्यवस्था के बीच अमेरिका चीन पर लगातार हमलावर है. ट्रंप प्रशासन ने चीनी उत्पादों के लिए सीमा शुल्क बढ़ा दिया, वीजा नियमों में सख्ती लाई. अब अमेरिका समुद्री रास्ते में भी चीन की घेरने को पूरी तैयारी कर चुका है. खबर है कि उसने चीन के सबसे बड़े एयरबेस के नजदीक तिनिआन द्वीप पर अपना मिलिट्री बेस बना रहा है.

तिनिआन द्वीप नर्दन मरियाना द्वीप समूह के तीन मुख्य द्वीपों में से है. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इसपर से जापान का कब्जा हटाया गया. अब समुद्र के बीचोंबीच जमीन के इस टुकड़े का इस्तेमाल अमेरिका अपने सैनिकों के लिए कर रहा है. गुआन द्वीप के पास स्थित इस द्वीप को वैकल्पिक एयर फोर्स बेस की तरह उपयोग किया जाता है. खासकर अगर कभी गुआन द्वीप समुद्री आपदा से घिर जाए तो अमेरिकी एयर बेस तिनिआन पर शिफ्ट हो जाता है.

ये भी पढ़ें: जानिए, कैसा होगा वो मीट, जो जानवरों को मारे बगैर होगा तैयार



अब अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) ने तिनिआन आइलैंड का भरपूर इस्तेमाल करने की तैयारी कर ली है. यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस बारे में तैयारियां अपने आखिरी चरण में हैं. अमेरिकी मिलिट्री अखबार Stars and Stripes के हवाले से बताया गया है कि द्वीप में क्या तैयारियां चल रही हैं.
अमेरिका तिनिआन द्वीप पर अपना मिलिट्री बेस बना रहा है


इसके मुताबिक तिनिआन द्वीप को इस तरह से बनाया जा रहा है कि यहां कम से कम 12 टैंकर एयरक्राफ्ट रखे जा सकें. साथ ही यहां सालाना लगातार 8 हफ्ते तक मिलिट्री एक्सरसाइज होगी. यहां बता दें कि मिलिट्री एक्सरसाइज या सैन्य अभ्यास इस तरह से किया जाता है, जैसे युद्ध की तैयारी हो रही हो. लगभग हर देश की सेना शांति काल में भी नियमित तौर पर सैन्य अभ्यास करती रहती है. अमेरिका में ये अभ्यास और भी पाबंदी से होता है.

ये भी पढ़ें: भारत के इस प्राइमरी टीचर को मिला अवार्ड, 7 करोड़ का आधा हिस्सा किया दान  

एयर फोर्स प्रमुख जनरल मार्क वेल्श ने अपने पूर्व बयान में कहा था कि तिनिआन को वैकल्पिक बेस की जगह ऐसे बनाया जा रहा है, जहां वायु सेना की ईंधन समेत दूसरी जरूरतें पूरी हो सकें. ये सैन्य बेस युद्ध के हालातों में भी काम आएगा.

ये भी पढ़ें: लंदन में China के नए और बेहद आलीशान दूतावास का क्यों हो रहा विरोध    

माना जा रहा है कि चीन समुद्री रास्ते में खुद को सुपर पावर बनाने की कोशिश में है. इसके लिए वो दुनिया के लगभग हर समुद्री रास्ते में अपने सैन्य बेस तैयार कर रहा है. अमेरिकी रक्षा विभाग की मानें तो चीन गुआन द्वीप पर भी हमला करने की फिराक में है और लंबे समय से इसके लिए रणनीति बना रहा है. हालांकि गुआन लगातार प्राकृतिक आपदाओं से घिरा रहता है इसलिए चीन अब तक ऐसा नहीं कर सका.

चीन के खिलाफ हिंद महासागर में भारत किलेबंदी कर रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


वैसे एशिया-प्रशांत महासागर में अमेरिका चीन को घेर रहा है तो हिंद महासागर में भारत किलेबंदी कर रहा है. अंडमान निकोबार में सैन्य बेस तैयार करना फिलहाल देश की प्राथमिकता में है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस बारे में काफी वक्त से प्लान चल रहा था लेकिन गलवान मामले के बाद इसमें तेजी आ गई. समुद्री मार्ग पर खुद को मजबूत करने के लिए अब Andaman Nicobar Command (ANC) को मजबूत बनाने की बात हो रही है.

बता दें कि ये कमांड साल 2001 में तैयार हुई थी. यह देश की इकलौती कमांड है, जिसमें थल, वायु और नौसेना तीनों का ऑपरेशन कमांडर एक ही है. इस कमांड की 19 सालों से अनदेखी होती रही लेकिन अब चीन को समुद्र का सुपर पावर बनने से रोकने के लिए भारत सरकार इसे पुर्नगठित करने जा रही है.

ये भी पढ़ें: क्या हैं स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें, जिनकी मांग NDA के सहयोगी भी कर चुके?  

भारत अंडमान में इस कमांड को मजबूत कर ले तो चीन के व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता कठिन हो सकता है. साथ ही यहां से चीन की समुद्र में चल रही गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकेगी. अगर कभी युद्ध के हालात बन गए तो चीन को भारत यहीं पर रोक सकेगा. साथ ही चीन की बदमाशी बढ़ने पर भारत उसके खिलाफ कॉमर्स रेडिंग भी कर सकता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज