अपने 4 नागरिकों के लिए अमेरिका ने ईरान को दिए थे 2800 करोड़, कौन थे वो लोग?

अपने 4 नागरिकों के लिए अमेरिका ने ईरान को दिए थे 2800 करोड़, कौन थे वो लोग?
भगवान हुनमान की एक मूर्ति उन चुनिंदा चीजों में शामिल हैं जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा हमेशा अपनी जेब में रखते हैं और जब भी खुद को थका हुआ या हतोत्साहित महसूस करते हैं उनसे प्रेरणा पाते हैं. राष्ट्रपति ने साक्षात्कार में यह खुलासा किया था.

दिलचस्प बात ये है कि अमेरिका (America) ने अपने जिन चार नागरिकों के बदले ये रकम चुकाई थी वो सभी ईरान (Iran) के ही मूल निवासी थे. ये लोग अमेरिका में रहते थे और इनके पास अमेरिकी सिटिजनशिप थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 5, 2020, 7:37 PM IST
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अमेरिका (America) और ईरान (Iran) के बीच जंग जैसे हालात बनते जा रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है- हमने 52 ठिकाने चिन्हित कर लिए हैं, अगर अब ईरान ने अमेरिकी नागरिकों या ठिकानों को निशाना बनाया तो हम 52 जगह हमले करेंगे. ट्रंप ने अपने ट्वीट में इन 52 जगहों को प्रतीकात्मक बताया है. उनके मुताबिक ये 52 जगहें उन 52 नागरिक और राजनयिकों की प्रतीक हैं जिन्हें 1979 में ईरान ने बंधक बनाया था. करीब 444 दिनों तक इन लोगों को बंधक बनाकर रखा गया था. लेकिन आखिरकार अमेरिका अपने नागरिकों को बचाने में कामयाब हो गया था. अमेरिकी नागरिकों को ईरान में बंधक बनाए जाने का एक और वाकया साल 2016 में हुआ था. तब ईरान ने चार अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने इसके लिए ईरान को 400 मिलियन डॉलर यानी करीब 2870 करोड़ रुपए कैश दिए थे.

क्या छपा था मीडिया रिपोर्ट्स में
साल 2016 में दुनिया के कई बड़े मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट कर बताया था कि तत्कालीन ओबामा प्रशासन ने करीब 400 मीलियन डॉलर ईरान को 4 नागरिकों के बदले दिए. जिस दिन अमेरिका ने प्लेन से ईरान को ये अमाउंट पहुंचाया उसी दिन चारों नागिरकों को छोड़ दिया गया. भेजी गई करेंसी अमेरिकी डॉलर के अलावा स्विस फ्रैंक्स और यूरो में थी. ये कैश अमाउंट लकड़ी की पेटियों में भेजे गए थे. ओबामा प्रशासन के दौरान की गई इस डील की तब विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी ने काफी आलोचना की थी. तब राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था-ओबामा प्रशासन ने एक बेहद बुरी परंपरा डाली है.





फेल आर्म्स डील को लेकर मांगी रकम


ईरान का आरोप था कि देश के शासक शाह रजा पहलवी के समय में अमेरिका के साथ एक आर्म्स डील हुई थी जो फाइनल नहीं हो पाई थी. उसी समय ईरान ने अमेरिका को पैसे दिए थे लेकिन बाद में वो अमेरिका ने वापस नहीं लौटाए. इस रकम की मांग ईरान काफी समय से कर रहा था.

ओबामा प्रशासन ने नकारा था
हालांकि विपक्षी आरोपों और मीडिया रिपोर्ट्स के बावजूद ओबामा प्रशासन ने ऐसी किसी घटना से इंकार किया था. ओबामा प्रशासन ने कहा था कि हमने ईरान को पैसे नहीं दिए बल्कि कैदियों के बदलाव प्रोग्राम की तहत उन्हें छोड़ा गया है. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में इशारा किया गया था कि ओबामा प्रशासन इस मामले में सही जानकारी नहीं दे रहा है.

बराक ओबामा पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने. साल 2008 में वे डेमोक्रेटिक पार्टी से पहले अश्वेत प्रेसिडेंट चुने गए. यहां तक कि ओबामा ने अपने 2 कार्यकालों के दौरान कई अहम फैसले लिए. कई देशों जिन्हें अमेरिका का घोर विरोधी माना जाता रहा, जैसे ईरान, क्यूबा, ऐसे देशों से भी रिश्ते सुधारे. ओबामा ने इस दौरान भारतीय प्रधानमंत्रियों क्रमशः मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के साथ ग्लोबल स्तर के कई सम्मेलनों में भाग लिया और अहम फैसले लिए.

चारों नागरिक थे ईरान के मूल निवासी
दिलचस्प बात ये है कि अमेरिका ने अपने जिन चार नागरिकों के बदले ये रकम चुकाई थी वो सभी ईरान के ही मूल निवासी थे. इन सभी नागिरकों के पास अमेरिकी नागरिकता थी. इनमें से एक अमेरिका के बड़े अखबार में पत्रकार भी था. दिलचस्प बात ये है कि ये चारों आम नागरिक थे. ये अमेरिका किसी बड़े पद पर बैठे हुए लोग नहीं थे लेकिन फिर इनके लिए इतनी बड़ी रकम अदा की गई.

कौन थे शाह रजा पहलवी
शाह रजा पहलवी ईरान के आखिरी राजा थे और उनके शासन के खिलाफ हुई इस्लामिक क्रांति को दुनिया जानती है. पहलवी को शासन से हटाने के बाद आयतुल्लाह खामनेई का शासन आया. शाह रजा पहलवी के समय तक ईरान के अमेरिका के साथ काफी अच्छे संबंध थे.
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