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चांद पर परमाणु संयंत्र लगाने के अमेरिकी ऐलान पर क्यों डरा हुआ है चीन?

साल का सबसे छोटा दिन और सबसे बड़ी रात आज- सांकेतिक फोटो (pixabay)

साल का सबसे छोटा दिन और सबसे बड़ी रात आज- सांकेतिक फोटो (pixabay)

अमेरिका अब चांद पर भी परमाणु संयंत्र (nuclear power plant on moon by America) बनाने की योजना बना रहा है और साल 2027 तक इसके पूरा हो जाने की उम्मीद है. चीन इसपर लगातार चेतावनी दे रहा है.

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    अमेरिका अंतरिक्ष की दुनिया में इतिहास रचने की सोच रहा है. सबसे ज्यादा सैटेलाइटों का मालिक ये देश अब चंद्रमा में भी अपना परमाणु संयंत्र बनाने की योजना बना चुका है. माना जा रहा है कि साल 2027 तक ये प्लान पूरा हो जाएगा और तब अमेरिका को धरती के अलावा चंद्रमा पर भी परमाणु हथियारों से जुड़ी नई खोजें करने का मौका मिल सकेगा. इधर चीन ने अमेरिका के इस प्लान को खतरनाक बताया है.

    अंतरिक्ष में अमेरिका को रूस के अलावा चीन से भी चुनौती मिलने लगी है. ये देखते हुए उसने कुछ नया ही प्लान किया, जिसके तहत चंद्रमा को परमाणु संयंत्र बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि वे न केवल चंद्रमा, बल्कि मंगल पर भी ये योजना बना रहे हैं. उनके मुताबिक इससे स्पेस में हो रहे बदलावों पर करीब से नजर रखने में भी मदद मिलेगी.

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    इधर सुपर पावर बनने की होड़ में चीन अमेरिका के इस प्लान से डरा हुआ है. उसने चेतावनी देते हुए कहा कि उसके ऐसा करने के पीछे किसी खोज का मकसद नहीं, बल्कि वो स्पेस में भी अपना दबदबा चाहता है. चीन के मुताबिक अमेरिका चांद और मंगल पर भी अपनी मिलिट्री तैयार कर रहा है ताकि आगे चलकर स्पेस में अपना राज ला सके.

    स्पेस प्रोग्राम को लेकर ट्रंप काफी ज्यादा आक्रामक रहे हैं- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    दरसअल चंद्रमा में हीलियम-3 की बहुतायत है. ये परमाणु ऊर्जा तैयार करने में उपयोग होता है. यही कारण है कि अमेरिका सीधे अंतरिक्ष में पावर प्लांट बनाने की तैयारी में है. वहीं चीन लगातार कह रहा है कि अमेरिका चंद्रमा पर भी अपनी खदान खोल देगा और उस दूसरे ग्रह पर भी हथियार बनाने में जुट जाएगा. ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में चीनी मिलिट्री एक्सपर्ट सॉन्ग जोंगपिंग ने अपना ये डर जाहिर किया. इसके बाद से चीनी मीडिया में इसपर बात हो रही है.

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    दूसरी तरफ सारी आलोचना को नजरअंदाज करते हुए अमेरिका में इसकी तैयारी शुरू हो गई. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में Space Policy Directive-6 (SPD-6) जारी किया. इस पॉलिसी डायरेक्टिव में ये बात बताई गई है कि अंतरिक्ष में परमाणु शक्ति पर काम करते हुए किन बातों का ध्यान रखा जाना है. इसे स्पेस न्यूक्लियर पावर एंड प्रॉपल्शन (SNPP) कहा जा रहा है.

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    अमेरिका का ये स्पेस प्लान तब सामने आया है, तब चीन के चेंग-5 ने चंद्रमा मिशन पूरा किया और वहां से सैंपल लेकर भी लौटा है. इसी सैंपल में पता चलता है कि चंद्रमा पर हीलियम-3 की अधिकता है, जो परमाणु ऊर्जा बनाने के काम आ सकता है. इसके लिए SPD-6 साइन किए जाने के बाद से चीन भड़का हुआ है. उसका कहना है कि अगर अमेरिका स्पेस में परमाणु संयंत्र खोलेगा तो इससे दूसरे देशों को भी ऐसा करने को बढ़ावा मिलेगा और स्पेस में एक तरह से युद्ध के हालात हो जाएंगे.

    इससे स्पेस में एक तरह से युद्ध के हालात हो जाएंगे- सांकेतिक फोटो (pixabay)


    देखा जाए तो चीन के गुस्से की वजह भले ही बढ़ती अमेरिकी ताकत हो लेकिन उसका डर भी एक तरह से सही है. साल 1979 में यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली ने तय किया था कि चंद्रमा पर भले ही देश पहुंच चुके हों लेकिन वहां पाई जाने वाली चीजें किसी एक देश की संपत्ति नहीं और कोई भी देश इसपर अपना दावा या व्यावसायिक इस्तेमाल नहीं कर सकता है. तो अमेरिका का ये कदम इंटरनेशनल स्पेस नियमों को तोड़ने जैसा ही है.

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    इस बात का एक और पहलू भी है. भले ही अमेरिका अब तक स्पेस के लिए तय इंटरनेशनल नियम मानता रहा लेकिन उसने अब तक ट्रीटी पर औपचारिक तौर पर दस्तखत नहीं किए हैं. इसी साल की शुरुआत में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुराने एग्रीमेंट की जगह एक नया कायदा भी प्रस्तावित किया, जिसे Artemis Accord कहा गया. ट्रंप का सुझाया ये नया नियम पुरानी ट्रीटी से एकदम विपरीत है.

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    स्पेस प्रोग्राम को लेकर ट्रंप काफी ज्यादा आक्रामक रहे हैं. साल 2019 की शुरुआत में ही उनके कहने पर अमेरिका ने स्पेस फोर्स का गठन किया. इस फोर्स का मकसद मिलिट्री स्पेस प्रफेशनल का विकास, मिलिट्री स्पेस सिस्टम तैयार करना है. इसके अलावा स्पेस फोर्स संगठन अंतरिक्ष में अमेरिका और सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए ट्रेनिंग देती है और उपकरणों पर काम करती है.

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