क्या है पोस्टल वोटिंग, जिसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप डरे हुए हैं?

क्या है पोस्टल वोटिंग, जिसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप डरे हुए हैं?
ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि पोस्टल वोटिंग से चुनाव के नतीजे बदल जाएंगे

कोरोना के चलते अमेरिका में पोस्टल वोटिंग (postal voting in American presidential election) की बात हो रही है. हालांकि ट्रंप (Donald Trump) लगातार इसपर हमलावर हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 16, 2020, 3:10 PM IST
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अमेरिका में नवंबर में होने जा रहे राष्ट्रपति चुनाव (presidential election in USA) पर संकट आया हुआ है. कोरोना के बीच ये तय नहीं हो सका है कि किस तरीके से वोटिंग हो, जो सुरक्षित रहे. इस बीच डाक के जरिए वोट देने पर खुद अमेरिकी डाक विभाग ने हाथ खड़े कर दिए. उनका कहना है कि वो सभी मतपत्रों की गिनती की गारंटी नहीं दे सकता. खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मेल-इन वोटिंग (mail-in voting) को गलत बता रहे हैं. उनका कहना है कि इससे चुनाव में धांधली हो सकती है. जानिए, क्या है डाक के जरिए वोटिंग और ट्रंप क्यों इसके खिलाफ हैं.

क्या है पोस्टल वोटिंग
डाक के जरिए वोटिंग एक खास प्रक्रिया है, जिसमें वोटिंग लिस्ट से जुड़े हर मतदाता के पास एक खाली डाक मतपत्र आता है. जहां इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बैलेट पहुंच सके, वहां यही किया जाता है. अगर वोटर किसी कारण से इलेक्ट्रॉनिक तरीका नहीं अपना सकता तो उसे डाक सेवा के जरिए मतपत्र भेजते हैं. कई अमेरिकी स्टेट्स में पहले से ही मेल-इन वोटिंग हो रही है.

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इनमें कोलोराडो, हवाई, ओरेगॉन, वाशिंगटन और यूटाह जैसे राज्य शामिल हैं. इसके तहत इलेक्शन से पहले बैलेट आ जाता है और उसपर अपनी पसंद के कैंडिडेट को भरकर बैलेट भेजना होता है. या ये भी हो सकता है कि वोटर इलेक्शन के रोज पोलिंग बूथ में पहुंचकर उसे ड्रॉपबॉक्स में डाल दे.



अमेरिका में नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं (Photo-pixabay)


क्यों हो रही इसकी बात
कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए इस सिस्टम की बात हो रही है. अमेरिकी प्रशासन और आम लोगों को भी डर है कि पोलिंग बूथ पर वोटिंग के आने से कोरोना संक्रमण तेजी से फैल सकता है. इसलिए ही इस सिस्टम की बात हो रही है. दूसरी ओर अमेरिका डाक सेवा को डर है कि वो सभी मतपत्रों की गिनती नहीं कर सकेगा. हाल ही में पोस्टमास्टर जनरल लुइस डेजोय ने कहा कि मेल-इन-बैलेट से बहुत से अमेरिकी वोटर अपने अधिकार का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे क्योंकि उनके मतों की गिनती ही नहीं हो सकेगी. ऐसा डाक विभाग में पूरे अमेरिका के वोटों की गिनती की क्षमता न होने के कारण कहा जा रहा है.



राष्ट्रपति ट्रंप को डाक व्यवस्था खास पसंद नहीं
ट्रंप पहले से ही इसे धोखेबाज तरीका कहते आए हैं. उनका कहना है कि इससे चुनाव के नतीजों पर असर हो सकता है क्योंकि लोग मेलबॉक्स से बैलेट निकाल सकते हैं. और कई तरह की हेराफेरी कर सकते हैं. अपना डर बताते हुए ट्रंप फिलहाल कुछ समय के लिए चुनाव टालने की बात कह रहे हैं.

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वैसे ये ट्रंप के चाहने से मुमकिन नहीं. हाउस ऑफ रिरिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट मिलकर ऐसा कर सकते हैं. चूंकि सदन में फिलहाल डेमोक्रेट्स ज्यादा हैं इसलिए अगर वे नहीं चाहेंगे तो ऐसा नहीं हो सकेगा.

कोरोना के चलते अमेरिका में पोस्टल वोटिंग की बात हो रही है- सांकेतिक फोटो (Photo-pikist)


तैयारियां शुरू हो गई हैं
यही कारण है कि ट्रंप के विरोध के बाद भी अमेरिका में अभी से डाक द्वारा मतदान की तैयारी शुरू हो गई है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके जरिए अमेरिका के 76 प्रतिशत से ज्यादा वोटर बिना कोरोना के डर के मत दे सकेंगे. वॉशिंगटन डीसी, और 9 दूसरे राज्यों में चुनाव से पहले बैलेट मेल कर दिया जाएगा.

लगभग 33 दूसरे राज्यों में वोटर अपने लिए एब्सेंटी वोटिंग की मांग कर सकते हैं. ये वोटिंग का वो तरीका है, जिसमें वोटर बैलट के लिए रिक्वेस्ट करता है. इसके लिए वोटर को बताना होता है कि चुनाव में वो क्यों पोलिंग बूथ पर नहीं आ सकता. केवल 8 ही स्टेट्स ऐसे हैं जहां पोलिंग बूथ पर जाने की बात हो रही है, हालांकि ये भी आगे चलकर बदल सकता है.

ट्रंप के विरोध के बाद भी अमेरिका में अभी से डाक द्वारा मतदान की तैयारी शुरू हो गई


क्या हैं पोस्टल वोटिंग के साथ समस्याएं 
वैसे डाक द्वारा वोटिंग पर विशेषज्ञों को एक ही डर है. वो डर ये है कि पोस्ट ऑफिसों में फंडिंग की कमी के कारण स्टाफ कम हो सकता है और इससे काउंटिंग में परेशानी हो सकती है. ये भी हो सकता है कि बैलेट सही समय पर पोस्ट ऑफिस न पहुंच सकें. ऐसे में काफी सारे वोटों की गिनती नहीं हो सकेगा, यानी मतदाताओं के वोट बेकार चले जाएंगे.

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चुनाव के मामले में अमेरिका हमेशा से ही पारंपरिक देश रहा है. यहां ईवीएम की बजाए बैलेट को ही तरजीह दी जाती रही. हर बात पर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर भरोसा करने वाले अमेरिकी नागरिक मानते हैं कि ईवीएम हैक किया जा सकता है और पेपर बैलेट ज्यादा भरोसेमंद है, जिसमें उनका वोट वहीं जाता है, जहां वे चाहें. इसके अलावा पेपर बैलेट यहां पर18 वीं सदी से चला आ रहा है इसलिए इसे चुनाव में एक रिचुअल की तरह भी देखा जाता है.
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