कौन थे सफेद मास्क पहने वे लोग, जो रात में घूमकर अश्वेतों का रेप और कत्ल करते?

सफेद मास्क में छिपा ये खुफिया समूह रात में घूमकर अश्वेतों का रेप और कत्ल करता रहा- सांकेतिक तस्वीर (Photo-pixabay)
सफेद मास्क में छिपा ये खुफिया समूह रात में घूमकर अश्वेतों का रेप और कत्ल करता रहा- सांकेतिक तस्वीर (Photo-pixabay)

लबादे पहने और सफेद मास्क लगाए ये लोग रात में घरों पर छापा मारते और अश्वेत लोगों के सिर कलम कर दिया करते थे. लोकप्रियता के चरम पर KKK ग्रुप के 30 हजार लोगों ने अमेरिका की सड़कों पर पैदल मार्च किया था.

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अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिसिया बर्बरता से मौत (George Floyd death in America) के कारण अमेरिका से निकली आग अब पूरी दुनिया में फैल चुकी है. जगह-जगह अश्वेतों के हक के लिए लोग सड़कों पर आ गए हैं. इनमें श्वेत नस्ल के लोग भी बराबरी से शामिल हैं. वैसे गोरे लोगों का एक समूह ऐसा भी है, जो अश्वेत मूल के लोगों पर अपने अत्याचार के लिए बदनाम रहा. इसे कू क्लक्स क्लान या संक्षेप में kkk (Ku Klux Klan) कहते थे. अश्वेत लोगों पर शारीरिक हिंसा को सही बताने और खुद को श्रेष्ठ (white supremacist) मानने वाला ये समूह अब भी दुनिया के कई देशों में खुफिया ढंग से चालू है.

साल 1865 में KKK ग्रुप की शुरुआत हुई. तब अमेरिका में गुलाम प्रथा को खत्म किया जा चुका था. इससे भड़के श्वेत समुदाय के लोगों ने अपना एक समूह तैयार करने की सोची ताकि अश्वेत और खासकर अफ्रीकी मूल के लोगों को नीचा दिखा सकें. मिलते-जुलते विचारों वाले लोगों ने मिलकर टेनेसी में एक सोशल क्लब की तरह इसकी शुरुआत की. इसकी स्थापना के समय कहा गया था कि ये लोकतांत्रिक तरीके से श्वेतों की महानता की पुनर्स्थापना करेंगे. मगर हकीकत में ये एक हिंसा फैलाने वाला संगठन था.

जल्दी ही ये क्लब अंडरग्राउंट मीटिंग्स करने लगा. इनका मकसद साफ था- हिंसा के जरिए अश्वेतों में खौफ पैदा करना ताकि वे दोबारा गुलाम होने की तरफ बढ़ने लगें. जंगलों में इनकी मीटिंग होती. काम सही ढंग से हो, इसके लिए इस ग्रुप में पूरी व्यवस्था थी. यहां तक कि लोगों के पद भी बनाए गए थे, जैसे लीडर को ग्रांड विजार्ट कहते, उससे नीचे वाले को ग्रांड ड्रैगन. जलता हुआ क्रॉस इसका सिंबल था.



जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिसिया बर्बरता से मौत के कारण अमेरिका से निकली आग अब पूरी दुनिया में फैल चुकी है

ये लोग लंबे सफेद चोगे पहना करते. साथ में मुंह पर भी सफेद कपड़ा बंधा होता ताकि चेहरे पहचान में न आएं. वैसे सफेद कपड़े चुनने का एक मतलब खुद को दूसरों से बेहतर दिखाना भी था. ये समूह अपनी क्रूरता के लिए जाना जाता था. वे अफ्रीका के लोगों को कोड़ों या बेल्ट से तब तक मारते, जब तक कि उनका रंग गायब न हो जाए और वे खूनाखून न हो जाएं. रात में ये लोग समूह में निकलते और अश्वेत मूल के लोगों को टारगेट करते थे.

अगर स्त्रियां या लड़कियां हैं तो उनके साथ सामूहिक रेप के बाद उन्हें अज्ञात जगहों पर ले जाया करते. अश्वेत पुरुषों का सिर काट दिया जाता था. उस दौर में काफी सारे श्वेत लोगों ने अश्वेत के साथ अच्छा व्यवहार किया था और उन्हें गुलामी से आजाद किया था. ऐसे श्वेत नस्ल के लोग भी kkk के गुस्से का शिकार बनते.

धीरे-धीरे समूह की लोकप्रियता बड़ी गई. इसमें ऐसे लोग जुड़ते गए जो अश्वतों को खराब माना करते और साल 1920 में पूरी दुनिया में 60 लाख लोग kkk के सदस्य हो चुके थे. वैसे kkk के सदस्यों की हिंसा तीन चरणों में चली थी. पहली बार शुरू होने के तीन सालों के भीतर ही ग्रुप के लीडर ने ही इसे भंग कर दिया क्योंकि ग्रुप के सदस्य बहुत ज्यादा दरिंदगी पर उतर आए थे, जबकि ग्रुप का मकसद अश्वतों में डर जगाना था. साल 1882 में अमेरिकी सरकार ने इस समूह को असंवैधानिक घोषित कर दिया.

माना जा रहा है कि अमेरिका में बढ़ती नस्लवाद के पीछे यही समूह है, जो छिपकर श्वेत लोगों का ब्रेन-वॉश कर रहा है


बाद में साल 1915 में ये समूह दोबारा बना. इस बार ज्यादा तेजी से लोग इससे जुड़े और हिंसा और भी तेज होती गई. माना जाता है कि अगले पांच ही सालों में इसके 4,000,000 सदस्य बन गए. श्वेत लोगों के बीच इसकी लोकप्रियता इतनी ज्यादा थी कि इसका सदस्य बनने के लिए पैसे देने होते. हालांकि साल 1928 में ये ग्रुप एक बार फिर भंग हो गया. तब ग्रेट डिप्रेशन का दौर था. अगले 30 सालों तक ये ग्रुप एकदम शांत रहा लेकिन एकाएक साल 1960 में इसके सदस्य दोबारा दिखने लगे. अमेरिका के कई स्टेट्स में अश्वेतों के साथ हिंसा, गोलीबारी और रेप जैसी बातें होने लगीं. लोग छिप कर क्लान के लिए काम करते रहे. 1965 में राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने क्लान की सदस्यता लेने वाले को गिरफ्तार करने की घोषणा की. इसके बाद से kkk के सदस्य अपने ट्रेडिशनल सफेद मास्क में नजर नहीं आए हैं.

हालांकि माना जा रहा है कि अमेरिका में बढ़ती नस्लवाद के पीछे यही समूह है, जो छिपकर श्वेत लोगों का ब्रेन-वॉश कर रहा है ताकि वे अश्वेतों पर हिंसा करें.

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