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कोरोना संकट के बीच अमेरिका और ईरान में फिर बढ़ सकता है तनाव, जानें क्यों

कोरोना संकट के बीच अमेरिका और ईरान में फिर बढ़ सकता है तनाव, जानें क्यों

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव के हालात बनते दिख रहे हैं

अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव के हालात बनते दिख रहे हैं

एक सैन्य सैटेलाइट (Military satellite) के लॉन्च को लेकर अमेरिकी प्रशासन (Trump Administration) की तरफ से ईरान (iran ) पर तल्ख टिप्पणी की गई है. ईरान ने इसका जवाब अपने चिरपरिचित अंदाज में दिया है. माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव गहरा सकता है.

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    अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो (Mike Pompeo) ने ईरान (Iran) पर सैन्य सैटेलाइट लॉन्च करने को लेकर गुस्सा और चिंता जाहिर की है. साथ उन्होंने यह भी कहा है कि ईरान का ये कदम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन भी है.

    दरअसल ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (Iran's Revolutionary Guards) ने बीते बुधवार को कहा था कि उसने देश का पहला सैन्य सैटेलाइट लॉन्च करने में सफलता उसी वक्त हासिल कर ली थी जब अमेरिका के साथ विवाद चल रहा था.

    कुछ ही महीने पहले था जबदस्त तनाव
    गौरतलब कि कुछ महीने पहले अमेरिका और ईरान के बीच काफी ज्यादा बढ़ गया था. तब अमेरिका ने ईरान के सीनियर मिलिट्री लीडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया था. इसके बाद दोनों देशों के तल्खी इतनी ज्यादा बढ़ गई थी कि ईरान ने गुस्से में एक यात्री विमान पर हमला कर दिया था. हालांकि पहलेपहल ईरान ने इसकी स्वीकारोक्ति नहीं की थी. बाद में अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद ईरान ने गलती मानी थी.

    अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने तल्ख टिप्पणी की है.


    न्यूक्लियर अटैक का भी खतरा!
    अब जबकि ईरान ने उस वक्त को लेकर दावा किया है तो अमेरिका की तरफ से नाराजगी जाहिर की गई है. अमेरिकी अधिकारियों ने चिंता जताई है कि इस सैटेलाइट को प्रक्षेपित करने में इस्तेमाल की गई लॉन्ग रेंज बैलिस्टिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल न्यूक्लियर अटैक के लिए भी किया जा सकता है. ईरान ने अमेरिका की इस बात तीखी प्रतिक्रिया दी है. ईरान का कहना है कि उसने कभी न्यूक्लियर वेपन बनाने का प्रोग्राम नहीं चलाया है. अमेरिकी की तरफ से लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं.

    2015 का प्रस्ताव
    दरअसल साल 2015 में संयुक्त राष्ट्र ने ईरान को आठ वर्षों तक के लिए ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल तैयार करने से दूर रहने को कहा था जो न्यूक्लियर वेपन ले जा सके. इस प्रस्ताव में दुनिया की 6 महाशक्तियां शामिल थीं. अब माइक पोम्पियो का कहना है कि उस प्रस्ताव में शामिल सभी देशों को यूनाइटेड नेशंस में सवाल उठाना चाहिए. उन्होंने पूछा कि क्या ये उस प्रस्ताव का उल्लंघन नहीं है? ईरान को अपने किए की जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी.

    गौरतलब है कि साल 2016 में संयुक्त राष्ट्र की तरफ से ईरान पर लगाए गए ज्यादातर प्रतिबंधों को हटा लिया गया था. तब ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर नजर रखने वाले पर्यवेक्षकों का कहना था कि ईरान ने वादा निभाया है. यह बात पांचों महाशक्तियों ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, चीन, रूस और अमेरिका को बताई गई थी.

    ईरान सैटेलाइट लॉन्च


    अमेरिका ने 2018 में फिर लगाए सख्त प्रतिबंध
    ईरान पर प्रतिबंध लगाने और हटाने के प्रावधान यूनाइटेड नेशंस के 2015 के इसी प्रस्ताव से तय होते हैं. ये बातें 2015 के ईरान न्यूक्लियर संधि में भी हैं. साल 2018 में इस प्रस्ताव को नकारते हुए ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर और कठोर प्रतिबंध लगा दिए थे. जिससे ईरान भड़क उठा था.

    मनोवैज्ञानिक युद्ध!
    रायटर पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में लेबनॉन आर्मी के रिटायर्ड ब्रिगेडियर हिशाम जाबेर का कहना है कि ईरान मनोवैज्ञानिक युद्ध लड़ रहा है. सैटेलाइट लॉन्च कर उसने अमेरिका को संदेश दे दिया है कि हम किसी भी तरह की विपरीत परिस्थिति के लिए तैयार हैं.

    डोनाल्ड ट्रंप ने दी धमकी
    इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर ईरान को धमकी दी थी. ट्रंप ने लिखा था कि अमेरिका की नेवी किसी भी ईरानी गन बोट को खत्म कर देंगी जो उसका रास्ता रोकने की कोशिश करेंगी. हालांकि अभी तक ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि ट्रंप ने ये धमकी किस बात पर दी है. इसके जवाब में ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नए कमांडर हुसैन सलामी ने कहा है कि उन्होंने अपनी नेवी को आदेश दे दिए हैं कि अगर पर्सियन गल्फ में कोई भी अमेरकी जहाज दिखे तो उसे उड़ा दो.

    कोरोना संकट के बीच बढ़ सकता है तनाव
    माना जा रहा है कि कोरोना संकट के बीच अमेरिका और ईरान में तनाव के हालात एक बार फिर बढ़ सकते हैं. ईरान ने सैटेलाइट लॉन्च की घोषणा ऐसे समय में की है जब अमेरिका कोरोना से सबसे बुरी तरह से फंसा हुआ है. खुद ईरान भी बुरी तरह कोरोना की चपेट में है. ऐसे में सैटेलाइट लॉन्च की घोषणा और फिर अमेरिकी की तरफ से आए त्वरित रिएक्शन की वजह से दोतरफा तल्खी बढ़ सकती है. अमेरिका इसे ईरान के खिलाफ माहौल तैयार करने में इस्तेमाल कर सकता है.

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    Tags: America, COVID 19, Donald Trump administration, Iran

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