बॉर्डर पर बसे इस शहर के हिंदू घरों, मंदिरों पर लहरा रहा है पाकिस्तानी झंडा

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Updated: August 20, 2019, 3:50 PM IST
बॉर्डर पर बसे इस शहर के हिंदू घरों, मंदिरों पर लहरा रहा है पाकिस्तानी झंडा
पाकिस्तान स्थित एक मंदिर में हिंदू श्रद्धालु. फाइल फोटो.

पाकिस्तान (Pakistan) में कश्मीर (Kashmir) पर भारत के हालिया फैसले की आलोचनाओं का दौर जारी है, लेकिन पाकिस्तान की हिंदू आबादी (Hindus in Pakistan) का रुख क्या है? पाकिस्तान के सिंध प्रांत के एक शहर का हाल जानें.

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गुजरात से सटे बॉर्डर (Gujarat Border) से कुछ मकानों पर पाकिस्तान का झंडा (Pakistan Flag) लहराने का नज़ारा दिखता है. मकान ही नहीं, मंदिरों के शिखरों पर भी देवी या देवता के झंडे के साथ पाकिस्तानी झंडा दिख जाता है. अस्ल में, भारत के गुजरात राज्य से पाकिस्तान का जो बॉर्डर कच्छ (Kuchh Border) के पास जुड़ता है, वहां पाकिस्तानी हिस्से में बड़ी संख्या में हिंदू (Pakistani Hindu) रहते हैं. थारपारकर ज़िला पाकिस्तान के सिंध प्रांत का वो ज़िला है, जहां लाखों की तादाद में हिंदू रहते हैं. जानते हैं कि इन हिंदू घरों और मंदिर प्रांगणों में पाकिस्तानी झंडा लहराने की वजह और अतीत क्या है.

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सिंध प्रांत (Sindh Province) के सबसे पिछड़े ज़िले के तौर पर गिने जाने वाले थारपारकर (Tharparkar District) की कुल आबादी करीब 17 लाख है, जिसमें से 41 फीसदी से ज़्यादा हिंदू हैं. ये आंकड़ा 2017 की जनगणना का है लेकिन बीबीसी ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के इस ज़िले में हिंदुओं की आबादी मुसलमानों (Hindu Muslim Population) से ज़्यादा है. इसी रिपोर्ट में दर्ज है कि हाल में, गुजरात के बॉर्डर से साफ देखा गया कि इस ज़िले की सीमा में बने शेरांवाली मां के एक मंदिर की छत पर पाकिस्तानी झंडा लहरा रहा था.

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हिंदू घरों पर पाकिस्तानी झंडे लहराने की वजह
थारपारकर के हिंदुओं के घरों, गाड़ियों और कुछ मंदिरों पर भी इस समय में पाकिस्तानी झंडे लहराने का कारण कश्मीर को लेकर बने ताज़ा हालात हैं. भारत ने जम्मू कश्मीर राज्य के पुनर्गठन का जो फैसला किया है, बताया जा रहा है कि उसे लेकर पूरे पाकिस्तान में काफी गुस्सा है. पाकिस्तानी मीडिया समूह ट्रिब्यून की रिपोर्ट को सच मानें तो पाक के सिंध प्रांत में इस फैसले का ज़बरदस्त विरोध किया गया और लोगों व स्थानीय नेताओं ने मिलकर भारत के झंडे, नक्शे के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला भी फूंका था.

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थारपारकर ज़िले में हिंदुओं के आधा दर्जन से ज़्यादा प्रमुख मंदिर हैं. तस्वीर पाक के एक्सप्रेस ट्रिब्यून से साभार.

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इसी रिपोर्ट के मुताबिक इस फैसले के बाद काले दिन के तौर पर जताए गए विरोध प्रदर्शन में पाकिस्तान के हिंदू समुदाय ने खुलकर शिरकत की और पाकिस्तान यानी अपने देश के प्रति वफ़ादारी ज़ाहिर करते हुए भारत के कदम को ग़लत करार दिया. ये भी कहा गया कि पाकिस्तान के हिंदू पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना और कश्मीर के लोगों की भावनाओं के साथ हैं. इन्हीं घटनाक्रमों के चलते पाकिस्तान के हिंदू बहुल सिंध इलाके में जगह जगह पाकिस्तानी झंडे लहराते दिख रहे हैं.

इससे पहले भी क्या लहराए थे झंडे?
पाकिस्तान के हिंदू अपने देश के प्रति समर्थन और भक्ति जताने के लिए इन दिनों अपने घरों और गाड़ियों पर देश का झंडा लगा रहे हैं, लेकिन इसी साल कुछ महीने पहले भी ऐसा हुआ था. जब फरवरी में पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट पर एयरस्ट्राइक की थी, तब भी दोनों देशों के बीच तनाव के हालात बने थे. उस वक्त भी थारपारकर और सिंध के हिंदुओं ने पाकिस्तान के प्रति अपनी देशभक्ति ज़ाहिर करने के लिए ये तरीका चुना था.

ये भी जानें कि कैसा है थारपारकर?
अस्ल में, गुजरात के थार रेगिस्तान के उस पार बसा यह शहर बेहद पिछड़ा इलाका है. यूएन की एक रिपोर्ट में कहा जा चुका है कि यहां की थारपारकर की 87 फीसदी आबादी बेहद गरीबी के हालात में जीती है. ट्रिब्यून के अनुसार पाकिस्तान में करीब 80 लाख हिंदू रहते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा अकेले इसी ज़िले में है. इन तमाम आंकड़ों के बाद ये भी दिलचस्प है कि पिछले कई दशकों में इस ज़िले में कोई बड़ा सांप्रदायिक दंगा तक नहीं हुआ है.

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थारपारकर की 87 फीसदी आबादी बेहद गरीबी के हालात में जीती है.


इसके अलावा यह भी उल्लेखनीय है कि थारपारकर ज़िले के सबसे बड़े चौराहे का नाम कश्मीर चौक है. इसी कश्मीर चौक पर अक्सर बड़े जलसे या प्रदर्शन आदि हुआ करते हैं. इस ज़िले में हिंदुओं के आधा दर्जन से ज़्यादा प्रमुख मंदिर भी हैं. कुल मिलाकर बात ये है कि थारपारकर या पाकिस्तान के हिंदू धर्म और देश दोनों को अलग रखते हुए दोनों में अपनी आस्था ज़ाहिर कर रहे हैं.

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First published: August 20, 2019, 1:58 PM IST
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