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जानिए एक भौतिकविद ने कैसे मापी ब्रह्माण्ड की पूरी सूचना की मात्रा

जानिए एक भौतिकविद ने कैसे मापी ब्रह्माण्ड की पूरी सूचना की मात्रा

सूचना (Information) को एक भौतिक मानते हुए यह गणना की गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सूचना (Information) को एक भौतिक मानते हुए यह गणना की गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

ब्रह्माण्ड (Universe) को जितना अवलोकित किया जा सकता है उसमें कुल कितनी मात्रा की सूचना (Information) है इसकी गणना एक भौतिकविद (Physicist) ने बहुत रोचक तरीके से की है.

    जानकारी या सूचना (Information)  का विज्ञान में कितना महत्व है. इस  सवाल पर कई चौंकाने वाले सिद्धांत पेश किए गए हैं.  जैसे क्या सूचना भौतिक है या इंद्रियों द्वारा महसूस की जा सकती है. या फिर क्या वह पदार्थ और ऊर्जा की तरह भैतिक सच्चाई का एक पहलू है. या फिर वह पदार्थ की पांचवी या छठी अवस्था है. सभी पदार्थ और ऊर्जा में सूचना मौजूद है. इनके अस्तित्व को निर्धारित करने वाले नियम जैसे भार, गति या आवेश सभी सूचना के प्रकार होते हैं. एक वैज्ञानिक सूचना की उस मात्रा (Quantity of Information) का पता लगाया है जो एक पूरे अवलोकन किए जा सकने वाले ब्रह्माण्ड (Universe)  में हो सकती है.

    पहले निकाली इलेक्ट्रॉन में सूचना की मात्रा
    यूके की पोर्टमाउथ यूनिवर्सिटी  भैतिकविद मेल्विन वोप्सन इसी तरह के विचारों पर प्रयोग कर रहे हैं और उन्होंने यह भी पता लगाया है कि एक इलेक्ट्रॉन अपने मे खुद के बारे में कितनी मात्रा की सूचना रख सकता है. इसके  बाद उन्होंने इस गणना का उपयोग कर पूरे ब्रह्माण्ड में फैली हुई सूचना की मात्रा का भी आंकलन कर लिया. वेप्सोन का कहना है कि यह पहली बार है कि अवलोकित किया जा सकने वाले ब्रह्माण्ड की सूचना का मापन किया जा सका है और इसका अंकों में नतीजा भी निकला है.

    एंट्रॉपी और सूचना का माप
    वेप्सन का आकंलन है कि अलोकित ब्रह्माण्ड में हर कण 1.509 बिट्स की सूचना रखता है. इसके लिए उन्होंने क्लॉड शोनन इंफोर्मेशन थ्योरी का उपयोग किया. इस सिद्धांत का संबंध एन्ट्रॉपी या उत्क्रम माप भी कहते हैं, से है. एंट्रॉपी किसी तंत्र में अनिश्चितता की मात्रा को कहते हैं. यह सिद्धांत एंट्रॉपी को सूचना से जोड़ता है. एक संदेश में सूचना की मात्रा का मापन यह बताता है कि संदेश में अनिश्चितिता कितनी कम हो जाती है.

    कैसे मापी जा सकती है सूचना
    अलग अलग संदेशों के अलग अलग मान होते हैं. मिसाल के तौर पर एक सिक्का उछालने के नतीजे की सूचना का जानकारी एक बिट की होती है जब नतीजा टेल्स नहीं हेड्स आता है. लेकिन अगर सिक्के में दोनों ही तरफ हेड हो तो इसके नतीजे की जानकारी 0 बिट होती है क्योंकि इसमें कुछ नया नहीं जुड़ता जो हम पहले से जानते हैं. फिर भी अगर सिक्का सही ना हो और टेल आ जाए तो नतीजा चौंकाने वाला होगा जिससे एक बिट की जानकारी और मिल जाएगी.

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    इस गणना में केवल अवलोकित किया जा सकने वाले ब्रह्माण्ड (Universe) को शामिल किया गया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    कितनी बड़ी है यह संख्या
    वोप्सोन ने इसी सूचना एंट्रोपी  गणनाओं को भार, आवेश और प्रोटोन न्यूट्रॉन के घुमाव (Spin) एवं उनके क्वार्क, इलेक्ट्रॉन पर लागू किया जिससे वह आंकलन कर सके कि वे कितनी सूचनाएं अपने पास रखते हैं. इसके बाद उन्होंने ब्रह्माण्ड में मौजूद कणों की संख्या का पता लगाया और दोनों का गुणा कर दिया. इसके नतीजे के तौर पर उन्हें जो संख्या मिली उसमें 6 के आगे 80 शून्य थे.

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    कम क्यों निकली यह संख्या
    वोप्सोन को जो संख्या मिली वह वास्तव में पिछली गणना कम थी और उन्हें इसकी कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि इससे पहले पूरे के पूरे ब्रह्माण्ड को शामिल किया गया था जबकि इस बार उन्होंने केवल अवलोकिन ब्रह्माण्ड को ही शामिल किया था. इसमें एंटीपार्टिकल्स और प्रकाश बोसोन जैसे बल शामिल नहीं थे.

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    शोधकर्ता का मानना है कि सूचना का भौतिक अस्तित्व डार्क मैटर सहित ब्रह्माण्ड (Universe) के कई रहस्यों पर से पर्दा उठा सकता है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    बोसोन को नहीं किया शामिल
    वोप्सोन का कहना है कि उन्होंने सभी बोसोन को एक बल या अंतरक्रिया करने वाला कण माना है जो सूचना के स्थानांतरण के लिए जिम्मेदार है, ना कि सूचना को जमा करने के लिए. उन्होंने बताया कि वे प्रस्तावित करते हैं कि केवल कणों में रहने वाली सूचना ही स्थायी हो सकती है और उसका बिना शून्य का स्थिर भार होता है, जबकि अंतरक्रिया या बल वाहक बोसोन केवल तरंग रूप में सूचना स्थानांतरित कर सकता है.

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    सूचना का विचार भौतिक है साल 1920 के आसपास से चला आ रहा है. तभी से सूचना सिद्धांत और ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के बीच की कड़ी प्रदर्शित करने वाले प्रयोग हो रहे हैं. वोप्सोन बताते हैं कि ये सिद्धांत इस नियम पर आधारित है कि सूचना भौतिक होती है. वे पहले कह चुके हैं सूचना पदार्थ की पांचवी अवस्था है. यहां तक कि वे यह तक कहते हैं कि सूचना डार्क मैटर भी हो सकती है. वे दलील देते हैं कि यदि प्रकाश कण हो सकता है तो सूचना को भौतिक क्यों नहीं माना जा सकता है.

    Tags: Research, Science, Space

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