16 साल की भारतीय छात्रा ने स्पेस ओलंपियाड में किया टॉप, नासा जाने का मिला मौका

इंटरनेशनल स्पेस ओलंपियाड (ISO) में पंजाब के अमृतसर (Amirtsar) की 16 साल की लड़की हिस्सा (Hissaa) ने टॉप किया है जिससे नासा (NASA) ने उसे कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Centre) आमंत्रित किया है.
इंटरनेशनल स्पेस ओलंपियाड (ISO) में पंजाब के अमृतसर (Amirtsar) की 16 साल की लड़की हिस्सा (Hissaa) ने टॉप किया है जिससे नासा (NASA) ने उसे कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Centre) आमंत्रित किया है.

इंटरनेशनल स्पेस ओलंपियाड (ISO) में पंजाब के अमृतसर (Amirtsar) की 16 साल की लड़की हिस्सा (Hissaa) ने टॉप किया है जिससे नासा (NASA) ने उसे कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Centre) आमंत्रित किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 5:54 PM IST
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भारत में प्रतिभाओं का यूं तो अंबार है, लेकिन पहचान बहुत ही कम प्रतिभाशाली लोगों को मिलती है. लेकिन एक कई बार प्रतिभाशाली छात्रों को जब उनकी मेहनत के बल पर बड़ी उपलब्धि मिलती है तो उन्हें यकीन नहीं होता. ऐसा ही हुआ जब 16 साल की पंजाब (Punjab) के अमृतसर (Amritsar) की लड़की ने हाल ही में इंटरनेशनल स्पेस ओलंपियाड (ISO) 2020 में टॉप किया है. इस उपलब्धि के बाद अमेरिका की स्पेस एंजेंसी नासा (NASA) ने उसे अमेरिका (US) के जॉन एफ कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Centre) में आमंत्रित किया है.

कितने अंक हासिल किए
अमृतसर की हिस्सा दसवी कक्षा की छात्रा हैं और वे अमृतसर में डीएवी पब्लिक स्कूल में पढ़ती हैं. द ट्रब्यून कि रिपोर्ट के मुताबिक हिस्सा ने इंटरनेशनल स्पेस ओलंपियाड द्वारा आयोजित प्राथमिक, माध्यमिक और फाइनल टेस्ट में कुल 78.75 प्रतिशत अंक हासिल किए और वरिष्ठ श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया.

केवल अपनी मेहनत के दम पर
हिस्सा की इस उपलब्धि के कारण उन्हें नासा से आमंत्रण मिला है. हिस्सा पहली भारतीय छात्र हैं जिन्हें सीनियर कैटेगरी में यह प्रतिष्ठित स्थान मिला है और उन्होंने यह उपलब्धि केवल अपनी मेहनत के दम पर हासिल की है. इसके लिए उन्होंने बाहर से किसी तरह की कोई कोचिंग नहीं की.



सपने के सच होने जैसा
हिस्सा का कहना है कि यह उनके लिए एक सपने के सच होने जैसा लगा जब उन्हें इसकी आधिकारिक पुष्टि मिली. उन्होंने कहा, “मैं एस्ट्रोफिजिसिस्ट बनना चाहती हूं. मेरा मुकाबला भारत के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा सिंगापुर से लेकर स्विट्जरलैंड तक के छात्रों से था और मैंने पहला स्थान पाया.”

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हिस्सा (Hissaa) को कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Centre) में जाने का मौका मिला है. तस्वीर: Pixabay)


कोविड-19 से प्रभावित हुई पूरी परीक्षा
हिस्सा ने बताया कि उन्होंने ओलंपियाड में पिछेल साल रजिस्ट्रेशन किया था लेकिन कोविड-19 की पाबंदियों के चलते पहला राउंड जनवरी तक खिसक गया था. इसका दूसरा राउंड जून में हुआ था और अंतिम चरण अगस्त में हुआ था. हिस्सा अब कोविड-19 की वजह से पैदा हुए हालात को जल्दी से खत्म होते देखना चाहती हैं, जिससे वे अपनी  स्पेस सेंटर की यात्रा कर सकें.

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माता पिता को श्रेय
हिस्सा का कहना है की उनकी सफलता में उनके माता पिता का अहम योगदान है. हिस्सा के पिता सवराजिंदर पाल सिंह ने इंजीनियर डिग्री हासिल की है और उनकी मां कमलप्रीत कौर  सरकारी स्कूल में एक इंग्लिश टीचर हैं.

क्या रहा माता पिता का योगदान
अपने माता के योगदान के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पिता ने अपने इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि की मदद से उन्हें विज्ञान के बारे में विस्तार से समझाया जबकि उनकी मां ने यह सुनिश्चित किया की उन्हें एस्ट्रोनॉमी की पूरी समझ आ जाए.

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इंटरनेशनल स्पेस ऑलंपियाड स्पेस, साइंस और टेकनोलॉजी पर 5-12 तक के छात्रों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय क्विज प्रतियोगिता है. इसका आयोजन हर साल होता है. इसका उद्देश्य स्पेस, साइंस और टेकनोलॉजी के क्षेत्र की प्रतिभाओं का आकर्षित उन्हें प्रोत्साहन देना है. इसके जरिए ISO का काम बच्चों में स्पेस, साइंस और टेकनोलॉजी का नजरिया जगाना भी है. ISO इन प्रतियोगिताओं के जरिए प्रतिभाशाली बच्चों को आकर्षक पुरस्कार भी देती है.
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