Anandi Gopal Birthday : समाज का तिरस्कार झेलकर पहली डॉक्टर बनने वाली महिला

आनंदी गोपाल फिल्म का एक दृश्य

आनंदी गोपाल फिल्म का एक दृश्य

आनंदी बाई जोशी (Anandi Bai Joshi) का नाम महाराष्ट्र में काफी चर्चित रहा है क्योंकि आनंदी गोपाल नाम से श्रीकृष्ण जनार्दन जोशी लिखित उपन्यास और फिर राम जोगलेकर लिखित नाटक मराठी साहित्य (Marathi Arts & Literature) और मंच की परंपरा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 7:38 AM IST
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आज यानी 31 मार्च 1865 को महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित करने वाली महिला आनंदी गोपाल जोशी का जन्म हुआ था, जिन्हें आनंदीबाई जोशी के नाम से भी जाना जाता है. 19वीं सदी में जब भारत में लड़कियों और महिलाओं के लिए पढ़ाई लिखाई किसी अजूबे से कम नहीं थी, तब डॉक्टर बनकर विदेश से लौटी आनंदी गोपाल की कहानी इस तरह दिल को छू लेने वाली है कि उनके जीवन पर आधारित एक से ज़्यादा फिल्में, उपन्यास और नाटक रचे जा चुके हैं.

आनंदी की शादी केवल 9 साल की उम्र में हो गई थी. उस वक्त के भारत के तमाम परिवारों की तरह ही उनका घर बहुत रुढ़िवादी था. शादी के बाद उनका नाम आनंदी गोपाल जोशी हुआ, जिससे वह जानी गईं. गूगल भी आनंदी को डूडल बनाकर पहले याद कर चुका है. लेकिन आनंदी के डॉक्टर बनने की कहानी बहुत रोचक है.

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25 के थे गोपाल और 9 की आनंदी
पुणे में ब्राह्मण परिवार में जन्मी आनंदीबाई की शादी करीब 25 साल के गोपालराव जोशी से हुई थी. आनंदी जोशी की जीवनी मराठी के चर्चित उपन्यासकार जनार्दन जोशी ने लिखी, जिसका हिन्दी सहित कई भाषाओं में अनुवाद भी हुआ. जोशी ने लिखा :

गोपाल को ज़िद अपनी पत्नी को ज़्यादा से ज़्यादा पढ़ाने की रही थी. उन्होंने पोंगापंथी ब्राह्मण-समाज का तिरस्कार झेलकर अपनी पत्नी को सात समन्दर पार भेजा, जब यह पुरुषों के लिए भी निषिद्ध था. लेकिन गोपाल ने उसे पहली भारतीय महिला डॉक्टर बनाकर इतिहास रचा.


शादी के लिए रखी थी शर्त



जोशी ने उपन्यास में लिखा है कि गोपालराव की आनंदी से शादी की शर्त यही थी कि वो पढ़ाई करेंगी. लेकिन इस शर्त में कठिनाई यह थी कि एक तो आनंदी को अक्षर ज्ञान तक नहीं था इसलिए गोपाल को उन्हें क, ख, ग से ही पढ़ाना शुरू करना था और दूसरे पढ़ाई के लिए आनंदी के मायके वाले भी खुशी से राज़ी नहीं थे.

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आनंदी गोपाल के सम्मान में गूगल डूडल से श्रद्धांजलि दे चुका है.


पढ़ाई से जुड़ा था अंधविश्वास

नन्ही सी आनंदी को पढ़ाई से कोई खास लगाव नहीं था क्योंकि परंपरा में ऐसा अंधविश्वास था कि जो औरत पढ़ाई लिखाई करती है उसका पति मर जाता है. आनंदी को गोपाल डांट-डपट कर पढ़ाया करते थे. एक दफा उन्होंने आनंदी को डांटते हुए यह धमकी तक दे दी थी कि अगर उसने पढ़ाई नहीं कि तो वो अपना धर्म बदल लेंगे.

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जोशी के उपन्यास के मुताबिक एक तरफ आनंदी चंचल बालिका थी तो दूसरी तरफ बेहद प्रतिभावान भी. एक किस्सा बताते हैं कि आनंदी के लिए अगली कक्षा की किताबें लाने के बाद गोपाल कुछ दिन के लिए बाहर चले गए थे. लौटने पर आनंदी को खेलते देखकर डांटा तो आनंदी ने बड़ी मासूमियत से तपाक से जवाब दिया, 'सारी किताबें पढ़ चुकी'. इसके बाद आनंदी के डॉक्टर बनने की राह खुलती चली गई.

एक हादसा, एक हौसला और एक इतिहास

आनंदी जब 14 साल की थीं, तब मां बनी थीं. लेकिन केवल 10 दिनों में उन्होंने अपनी नवजात संतान को खो दिया. इस आघात के बाद उन्होंने निश्चय किया कि वह एक दिन डॉक्‍टर बनेंगी. उनके इस संकल्प को पूरा करने के लिए उनके पति लगातार उनके साथ बने रहे.

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उस समय शादीशुदा महिला के लिए अमेरिका जाकर पढ़ाई करना तकरीबन नामुमकिन था. समाज की आलोचना से विचलित हुए बगैर वो अमेरिका गईं. आनंदीबाई ने कोलकाता से पानी के जहाज से न्यूयॉर्क की यात्रा की. उन्होंने पेंसिल्वेनिया के वूमन मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा कार्यक्रम में दाखिले की प्रक्रिया की, जो कि दुनिया में दूसरा महिला चिकित्सा कार्यक्रम था.

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आनंदी गोपाल देश की पहली महिला डॉक्टर थीं, जिन्होंने एमडी की डिग्री हासिल की थी.


1886 में आनंदीबाई ने MD की डिग्री हासिल कर भारत की पहली महिला डॉक्टर बनने का कीर्तिमान रचा. उसी साल के आखिर तक आनंदीबाई भारत लौटीं तो उनका भव्य स्वागत हुआ. कोल्हापुर रियासत के अल्बर्ट एडवर्ड अस्पताल के महिला वार्ड में उन्हें प्रभारी चिकित्सक नियुक्त किया गया था.

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कादंबिनी गांगुली के नाम क्या रहा रिकॉर्ड?

डिग्री और नियुक्ति के कुछ ही समय बाद 26 फरवरी 1887 को आनंदीबाई की मौत 22 साल की उम्र में तपेदिक से हुई थी. वह बतौर डॉक्टर प्रैक्टिस नहीं कर सकीं. यहां कादंबिनी गांगुली का नाम उल्लेखनीय है, जो भारत की वह पहली महिला डॉक्टर कही जाती हैं, जिन्होंने बतौर डॉक्टर सेवाएं भी दीं. फिर भी आनंदी की कहानी भारत की मिसालों में शुमार रही. 1888 में, अमेरिकी नारीवादी लेखक कैरोलिन वेल्स हीली डैल ने आनंदीबाई की पहली जीवनी लिखी थी.
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