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इटली का वो शहर जहां 19सौ साल पहले पूरी आबादी रातोंरात पत्थर बन गई

News18Hindi
Updated: May 20, 2020, 9:18 AM IST
इटली का वो शहर जहां 19सौ साल पहले पूरी आबादी रातोंरात पत्थर बन गई
साल 1748 में कुछ सैलानी वहां पहुंचे तो देखा कि पूरे शहर में पत्थर की मूर्तियां ही मूर्तियां हैं

इटली (Italy) के नैपल्स की खाड़ी (Bay of Naples) में स्थित ज्वालामुखी का लावा तेजी से बहता हुआ पोम्पई (Pompeii) शहर आ पहुंचा और मिनटों में शहर की पूरी आबादी खत्म हो गई. साल 1748 में कुछ सैलानी वहां पहुंचे तो देखा कि पूरे शहर में पत्थर की मूर्तियां ही मूर्तियां हैं. वे वही लोग थे, जिन्हें ज्वालामुखी के लावे ने मार दिया था.

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चक्रवाती तूफान अम्फान देश में दस्तक दे चुका है. इसके लिए मौसम विभाग से लेकर केंद्र और स्थानीय प्रशासन लगातार तैयारियां कर रहे हैं ताकि तबाही से बच सकें. लेकिन कल्पना करें आज से सदियों पहले की जब प्राकृतिक आपदा के कारण एकाएक ही हजारों जानें चली जाती थीं. ऐसी ही एक आपदा थी ज्वालामुखी का फटना. इटली के पोम्पई शहर को लगभग 19 सौ साल पहले ज्वालामुखी के लावे ने पत्थर में बदल दिया. आज ये शहर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल है.

ज्वालामुखी जिसने शहर को खत्म कर दिया
Mount Vesuvius नाम का ये ज्वालामुखी नेपल्स की खाड़ी में स्थित है. ये अब तक 50 से ज्यादा बार फट चुका है. लेकिन इसका सबसे खतरनाक विस्फोट आज से लगभग 19 सौ साल पहले 79 A.D में हुआ था. बहता हुआ लावा बाढ़ में उफनती नदी की तरह शहर की ओर बढ़ चला था. इतनी ज्यादा गर्मी से शहर के लोगों का खून उबलने लगा था और तुरंत ही उनकी मौत हो गई. इसके बाद से शहर वीरान पड़ा रहा. जब इसकी खोज हुई तो पाया गया कि शहर के लोग जस के तस अलग-अलग पोजिशन में पड़े हुए हैं. जैसे किसी काम करते व्यक्ति की काम के दौरान ही अपनी जगह पर मौत हो गई. एक बैठे हुए बच्चे ने उसी तरह से बैठे हुए दम तोड़ दिया. यानी लावे की गति इतनी तेज रही होगी कि किसी को संभलने या एक जगह इकट्ठा होने तक का वक्त नहीं मिला.

Mount Vesuvius नाम का ये ज्वालामुखी नेपल्स की खाड़ी में है और अबतक 50 से ज्यादा बार फट चुका है




कैसी थी प्राचीन पोम्पई में जिंदगी


करीब 170 एकड़ में फैला हुआ ये शहर उस वक्त इटली का वेकेशन स्पॉट था. दूर-दूर से लोग यहां घूमने के लिए आते. पहाड़ों से 5 मील की दूरी पर बसे इस शहर में सैलानियों के कारण सारी आधुनिक व्यवस्थाएं थीं. जैसे यहां एक बड़ा बाजार था जहां मांस और फल-सब्जियां जैसी चीजें मिलतीं. कई रेस्त्रां थे, यहां तक कि कई थिएटर और एक होटल भी था.

हिस्ट्री वेबसाइ़ट के अनुसार यहां पर एक से बढ़कर एक खूबसूरत घर थे और सड़कें भी आधुनिक तरीके से बनी हुई थीं. सैलानियों के लिए यहां स्पा (तब इसे बाथहाउस कहा जाता था) और वेश्यालय भी थे. इतिहासकारों के अनुसार जब ज्वालामुखी फटा जब शहर में 12000 के आसपास की आबादी रही होगी यानी उस दौर के हिसाब से पोम्पई काफी घनी आबादी वाला शहर था.

करीब 170 एकड़ में फैला हुआ ये शहर उस वक्त इटली का वेकेशन स्पॉट था


लेखक ने पत्र में लिखी आंखोंदेखी
वैसे Mount Vesuvius ज्वालामुखी रातोंरात नहीं बना था. शहर को इसके बारे में पहले से मालूम था. लेकिन चूंकि छोटे-मोटे विस्फोट होते रहते थे, लिहाजा लोगों को उसके आस-पास रहने में कोई खतरा मालूम नहीं होता था. 79 A.D. में जब ज्वालामुखी भयंकर तरीके से फटा, तब अक्टूबर का महीना था. वोल्केनो के फटते ही आसमान धुएं, धूल, राख और गर्म पत्थरों से भरने लगा. सैकड़ों मील दूर बसे लोगों को भी ये दिखाई दे रहा था. प्राचीन रोम के लेखक Pliny the Younger ने दूर से इसे देखा और मान लिया कि दुनिया खत्म हो रही है. उनकी बाद में लिखी चिट्ठियों में इसका जिक्र मिलता है.

जल्द ही ज्वालामुखी के फटने के कारण pyroclastic surge हुआ यानी धूल और चट्टानें 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से चलने लगी और हर चीज इनके नीचे दब गई. रातभर में पूरा पोम्पई शहर लावे के नीचे दबा हुआ था. हालांकि शहर के बाहर के लोग भी इसमें मारे गए और इतिहासकारों का मानना है कि कुल मिलाकर 16000 से ज्यादा जानें गईं. इन आंकड़ों में पड़ोसी शहर Herculaneum की आबादी भी शामिल थी.

ये उस शहर का बच्चा है, जो इसी तरह बैठे-बैठे जम गया, ये मूर्ति अब संग्रहालय में है


इसके बाद सदियों तक इस शहर की किसी ने सुध नहीं ली. साल 1748 में कुछ युवा सैलानी यहां पहुंचे और पत्थर बने शरीरों को देखकर हैरान रह गए. इमारतें वैसी ही वैसी थीं. लोगों के स्केलेटन उसी अवस्था में थे, जैसे वो ज्वालमुखी का लावा आने से पहले रहे होंगे. यहां तक कि सड़कों पर ब्रेड और सब्जियां तक पत्थर में दबे हुए मिले.

माना जाता है कि शहर की बरामदगी के बाद यूरोपभर में उस शहर की वास्तुकला की नकल की गई. अब भी यूरोप के अमीर घरों में “Etruscan rooms” होते हैं, जो पोम्पई के घरों की तर्ज पर बनाए जाते हैं. ये एंटीक होते हैं और इनमें काफी आध्यात्मिक शक्ति मानी जाती है, जो रहने वालों को हमेशा संपन्न और सेहतमंद रखती है.

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First published: May 20, 2020, 9:01 AM IST
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