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क्या हुआ उस देश में, जहां पुरुषों से नाराज महिलाओं ने रोका एक दिन का काम

News18Hindi
Updated: March 12, 2020, 3:08 PM IST
क्या हुआ उस देश में, जहां पुरुषों से नाराज महिलाओं ने रोका एक दिन का काम
मैक्सिको में पुरुषवादी संस्कृति और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध के कारण महिलाओं ने एक दिन के लिए पूरे देश को ही रोक दिया

मैक्सिको में महिलाओं के प्रति भेदभाव ज्यादा है तो वो आए दिनों अपराधों का शिकार भी ज्यादा हो रही हैं. सरकार और देश के पुरुषवादी कल्चर से नाराज होकर मैक्सिको की लाखों महिलाओं ने एक दिन की हड़ताल कर दी. उन्होंने कोई काम नहीं किया. पूरा देश ठहर सा गया

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  • Last Updated: March 12, 2020, 3:08 PM IST
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आप खुद सोचिए क्या होगा अगर देश की महिलाएं एक दिन के लिए अपना कोई काम नहीं करें. हमारे देश में इसका असर काफी गहरा होगा, क्योंकि यहां महिलाएं घर से लेकर आफिस तक तमाम काम करती हैं. एक और देश है जहां बड़े पैमाने पर महिलाएं काम करती हैं. वहां जब महिलाओं ने एक दिन के लिए काम रोका तो वहां अफरातफरी मच गई.
ऐसा इन महिलाओं ने अपना पैसा बढ़वाने के लिए नहीं किया बल्कि देश में पुरुषों की मर्दाना संस्कृति और स्त्रियों के प्रति बढ़ती हिंसा के खिलाफ नाराज होकर किया. उन्होंने अपनी इस हड़ताल का नाम दिया हमारे बगैर एक दिन.

किस देश में हुआ ऐसा
ये काम महिलाओं ने मैक्सिको में किया. वहां पूरा देश महिलाओं के काम नहीं करने के कारण लगभग ठहर गया. अजीब सी स्थिति हो गई. महिलाओं ने ऐसा करके जता दिया कि वो देश का कितना महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.



हड़ताल के जरिए क्या बताने की कोशिश की
मैक्सिको ने महिलाएं देश में बढ़ती मर्दाना संस्कृति और पुरुषों के हिंसक व्यावहार से खिन्न थीं. वहां अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बाद लगातार बड़े प्रदर्शन हो रहे थे. इसी दौरान महिलाओं ने तय किया कि वो एक पूरे दिन देशभर में कहीं काम नहीं करेंगी. दरअसल मैक्सिको में महिलाओं पर हिंसा भी बढ़ती जा रही थी.



मैक्सिको में रोज 10 महिलाओं की हत्या होती है वो भी क्रूरता से. सरकार इसके खिलाफ आमतौर पर सुस्त रहती है


पिछले हफ्ते मेक्सिको के राष्ट्रपति लोपेज ओब्राडोर ने महिलाओं को यह कहकर गुस्से में ला दिया कि विरोध प्रदर्शनों में रूढ़िवादी और उनकी सरकार के अन्य आलोचकों ने घुसपैठ कर ली है.

हड़ताल का असर क्या हुआ
मैक्सिको में ज्यादातर फैक्ट्रियों और दफ्तरों में महिलाएं बड़े पैमाने पर काम करती हैं. लिहाजा फैक्ट्रियों के उत्पादन से लेकर दफ्तरों तक में कामकाज ठहर सा गया. सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में विदेश मंत्रालय में कर्मचारियों के डेस्क खाली दिखाई पड़े. अन्य आफिसों का भी यही हाल दिखा. बसें, ट्रेन और मेट्रो खाली नजर आई. सड़कों पर भी भीड़ कम दिखी.

मेक्सिको के एक बड़े अखबार एल यूनिवर्सल में कॉलम लिखने वाली पाउला रोजास ने अपने लेख के लिए खाली जगह छोड़ दी. उसके बदले महिलाओं के प्रदर्शन का समर्थन करते सिर्फ एक हैशटैग का इस्तेमाल किया. स्कूल बंद पड़े थे. सड़कों पर परिवहन प्रणाली आमतौर पर महिलाएं संभालती हैं. हालांकि कुछ महिलाएं नौकरी पर भी गईं.

महिलाएं मेडिकल यूनिफॉर्म, कारखाने के कपड़े और स्कूल यूनिफॉर्म में विरोध मार्च में शामिल हुईं. आमतौर पर महिलाएं देश में मर्दाना कल्चर और बढ़ती हिंसा से नाराज थीं


हड़ताल के दिन उन्होंने क्या किया
महिलाएं मेडिकल यूनिफॉर्म, कारखाने के कपड़े और स्कूल यूनिफॉर्म में विरोध मार्च में शामिल हुईं. मैक्सिको के साथ चिली में भी महिलाओं ने ऐसा ही किया. प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने ड्रम बजाए और नारेबाजी की. वो नारा लगा रही थीं, "उनकी हिम्मत कैसे होती है कि वह हमें यातनाएं दे, हमारा बलात्कार होता है और कोई कुछ नहीं करता है?"
न्यू यॉर्क टाइम्स लिखता है कि मैक्सिको में महिलाओं की हड़ताल का असर पूरे देश पर नजर आया. हजारों महिलाएं सड़क पर उतर आईं.

आंकड़े क्या कहते हैं
सरकारी आंकड़े कहते हैं कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 137 फीसदी का इजाफा हुआ है. मेक्सिको में कई आपराधिक मामले कभी सुलझ ही नहीं पाते हैं. न्यू यॉर्क टाइम्स लिखता है कि मैक्सिको में रोज तकरीबन 10 महिलाओं की हत्या हो रही है. महिलाओं का आरोप है कि ज्यादातर महिलाओं की हत्याएं काफी क्रूरता से की जा रही हैं. ये कहीं ना कहीं से हमारे कल्चर का हिस्सा भी रहा है.

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First published: March 12, 2020, 3:08 PM IST
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