कितनी बार बीमारियां फैलने पर लाखों जानवरों को मिली मौत की नींद?

स्पेन ने वायरस का बढ़ना रोकने के लिए अपने यहां लगभग 1 लाख ऊदबिलाव मारने का आदेश दिया- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)
स्पेन ने वायरस का बढ़ना रोकने के लिए अपने यहां लगभग 1 लाख ऊदबिलाव मारने का आदेश दिया- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)

स्पेन में लगभग 1 लाख ऊदबिलावों को मारा जा रहा (culling of minks in Spain) है. ये पहली बार नहीं. इससे पहले हर महामारी के दौर में लाखों की संख्या में पशु-पक्षी मारे जाते रहे हैं.

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कोरोना वायरस का संक्रमण पूरी दुनिया में लगातार बढ़ रहा है. इससे अब जानवर भी अछूते नहीं रहे. हाल ही में स्पेन ने वायरस का बढ़ना रोकने के लिए अपने यहां लगभग 1 लाख ऊदबिलाव को मारने का आदेश दिया. स्पेन के एक फार्म में कई ऊदबिलावों के संक्रमित दिखने के बाद ये फैसला किया गया. वैसे ये पहली दफा नहीं, इससे पहले भी किसी महामारी के फैलने पर या ऐसी शंका पर बड़ी संख्या में जानवर मारे जाते रहे हैं. खासकर चीन में ऐसा कई बार हो चुका है.

क्या है नया मामला
उत्तर-पूर्वी स्पेन के अरागॉन प्रांत के एक फार्म में कई कर्मचारी संक्रमित मिले. इसके बाद ऊदबिलावों का भी कोरोना टेस्ट हुआ. इस दौरान वहां लगभग 87 प्रतिशत जानवर संक्रमित मिले. ये देखते हुए जांच के लिए पहुंचे स्वास्थ्य अधिकारियों ने फार्म के सारे ऊदबिलावों को मारने का आदेश दिया. यहां कुल 92,700 ऊदबिलाव हैं, जिसमें से ज्यादातर संक्रमित हो चुके हैं. ऐसे में अगर इनमें से कुछ को भी बचाए रखा गया तो उनसे स्वस्थ इंसानों में कोरोना फैलने का डर बढ़ता है. हालांकि अब तक ये तय नहीं कि संक्रमण आखिर कैसे फैला.

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स्पेन के अलावा नीदरलैंड में भी हजारों ऊदबिलाव मारे जा चुके हैं. मई में कुछेक संदिग्ध मामले आने के बाद डच सरकार ने ये फैसला किया कि जिस फार्म में संक्रमित ऊदबिलाव मिलें, वहां सारों को ही मार दिया जाए.



चीन के वेट मार्केट में जंगली पशु-पक्षी बेचे जाते हैं और खरीदने वाले इन्हें चाव से खाते हैं- सांकेतिक फोटो (Photo-pixabay)


स्वाइन फीवर का डर
इसी तरह से साल 2018 में चीन के सूअरों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर फैला था. लगभग सौ लोग इस संक्रमण का शिकार हुए. इसके बाद 9 लाख से भी ज्यादा सुअरों को मार दिया गया. चीन के कृषि मंत्रालय ने संक्रमण के डर से ये फैसला लिया था. इतनी भारी मात्रा में सुअरों के मारे जाने के बाद चीन में पोर्क इंडस्ट्री में काफी नुकसान भी हुआ था और तब से पोर्क के लिए दूसरे देशों पर चीन की निर्भरता बढ़ गई.

एवियन इंफ्लूएंजा के चलते मिली मौत
एक और बीमारी एवियन इंफ्लूएंजा के दौरान पक्षियों पर कहर बरपा. इसे बर्ड फ्लू भी कहते हैं. भारत में भी इस फ्लू के पहले दौर साल 2006 में लाखों पक्षियों को मारा गया था. साल 2008 में दोबारा फ्लू का प्रकोप हुआ. तब पश्चिम बंगाल में लगभग 43 हजार पक्षी मारे गए. एक अनुमानित आंकड़े के अनुसार देश में ही अब तक इस फ्लू से बचाव के लिए 80 लाख से ज्यादा पक्षी मारे जा चुके हैं.

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ये सारी ही बीमारियां सबसे पहले श्वसन तंत्र पर असर डालती हैं. माना जा रहा है कि इन सारी ही बीमारियों की शुरुआत चीन से हुई. चीन के वेट मार्केट में जंगली पशु-पक्षी बेचे जाते हैं और खरीदने वाले इन्हें चाव से खाते हैं. कई बार मांस के अधपके रह जाने या फिर किसी वजह से इंसानों की आंतरिक संरचना के संपर्क में आने पर उनमें भी संक्रमण बढ़ जाता है.

मीट मार्केट में जानवरों के मांस और ब्लड का ह्यूमन बॉडी से संपर्क होता रहता है


क्यों फैलती हैं बीमारियां
विशेषज्ञ बताते हैं कि मीट मार्केट में जानवरों के मांस और ब्लड का ह्यूमन बॉडी से संपर्क होता रहता है. ये वायरस के फैलने की सबसे बड़ी वजह है. खासकर हाईजीन में थोड़ी भी चूक वायरस के फैलने में मददगार साबित होती है. ये कहीं भी हो सकता है. मसलन इबोला नाम का वायरस अफ्रीका से पूरी दुनिया में फैला. इबोला के वायरस चिंपाजी से ह्यूमन बॉडी में आए थे. अफ्रीका में चिंपाजी को मारकर खाने की वजह से वायरस आदमी के शरीर में पहुंचा और फिर संक्रमण की वजह से ये पूरी दुनिया में फैला.

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चली आ रही संशय की स्थिति
वैसे पहले ये माना जा रहा था कि कोरोना इंसानों तक ही सीमित रहता है और जानवरों पर इसका असर नहीं होता. इसकी एक वजह ये भी थी कि जानवरों में पहले से ही कोरोना मौजूद रहता है. ऐसे में इंसानों के भीतर वायरल लोड इतना नहीं होता कि वे पहले से कोरोना का घर रहे जानवरों को भी बीमार कर सकें. इसी तरह से आम हालातों में जानवरों से इंसानों में भी कोरोना वायरस नहीं आता है, खासकर पालतू जानवरों से. लेकिन अब किसी वजह से जानवरों में भी कोरोना संक्रमण के मामले आने लगे हैं. माना जा रहा है कि ये इंसानों से जानवरों में फैलने लगा है.

रखी जा रही सावधानी
यही देखते हुए अब मांसाहारी मैमल्स पर खास ध्यान रखने की बात हो रही है. अगर किसी स्तनधारी में कोरोना जैसे लक्षण दिखें तो उनकी जांच की बात भी हो रही है. भारत सरकार ने जू में काम करने वाले कर्मचारियों को हाइजीन का ध्यान रखने और जानवरों से दूरी बरतने की हिदायत दी है. आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान ने इस आधार पर देशभर के चिड़ियाघरों को सावधानियों की सूची भी भेजी है. इसमें सावधानी बरतने और संदिग्ध होने पर WHO/OIE/ICMR की गाइडलाइन्स के आधार पर ही टेस्ट कराने को कहा गया है.
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