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Annie Besant Birthday: अपने देश के खिलाफ भारत की कैसे हो गईं 'बसंत देवी'

Annie Besant Birthday: अपने देश के खिलाफ भारत की कैसे हो गईं 'बसंत देवी'

एनी बेसेंट (Annie Besant) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस की अध्यक्ष भी बन गई थीं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

एनी बेसेंट (Annie Besant) भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कांग्रेस की अध्यक्ष भी बन गई थीं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

एनी बेसेंट (Annie Besant) पहले लंदन में एक अंग्रेज सामाजवादी के बाद थियोसोफिस्ट बनी. इसके बाद भारत (India) आकर देश के स्वतंत्रता आंदोलन (Freedom Movement) का एक बड़ा चेहरा बन गई थीं.

    सुनने में अजीब लगता है, एक अंग्रेज महिला (British Women) ने अंग्रेजों के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन (Freedom Movement) में भाग लिया. इतना ही नहीं वह आजादी की लड़ाई के दौरान कांग्रेस की अध्यक्ष भी बन गई. यह सच है और ऐसा किया था एनी बेसेंट (Annie Besant) ने. एनी बेसेंट की लंदन से भारत आकर स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने की कहानी बहुत रोचक है. थियोसोफिकल सोसाइटी से लेकर होम रूल लीग आंदोलन में उनकी प्रमुख भूमिका रही थी. वे एक थियोसोफिस्ट, शिक्षाविद, महिला अधिकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता के साथ बहुत कुछ थीं. देश 1 अक्टूबर को उनकी 174वीं सालगिरह पर उन्हें याद कर रहा है.

    बचपन से ही समाज कल्याण के प्रति रुझान
    एनी वुड का जन्म लंदन में एक उच्च मध्यमवर्ग परिवार में हुआ था. आयरिश पृष्ठभूमि होने के कारण वे हमेशा ही आयरिश होम रूल की समर्थक रहीं. बचपन से ही समाज कल्याण के प्रति उनका गहरा रुझान रहा था जो उसके साथ ताउम्र कायम रहा. बीस साल की उम्र में ही उनका विवाह पादरी फ्रैंक बेसेंट हे हो गया. दो बच्चे होने के बाद भी यह विवाह सफल नहीं रहा. शादी के पांच साल बाद एनी अपनी बेटी के साथ अलग हो गईं.

    एक मशहूर वक्ता और समाजसेविका
    जल्द ही एनी वैचारिक स्वतंत्रता, महिला अधिकार, सामाज कल्याण, धर्मनिर्पेक्षता, जनसंख्या नियंत्रण, कामगारों के अधिकार जैसे मुद्दों की पैरोकार हो गईं. उन्होंने नेशनल सेक्यूलर सोसाइटी की सदस्यता भी ग्रहण कर ली जो शासन में चर्च के दखल के खिलाफ थी. इस सब के साथ ही एनी का झुकाव धार्मिक विश्वासों को चुनौती देने का हो गया. इस दौरान वे चर्च के खिलाफ भी लिखने लगीं. वे एक लोकप्रिय वक्ता के रूप में भी मशहूर होने लगी.

    थियोसोफी की ओर झुकाव
    1880 के दशक की शुरुआत में एनी बेसेंट कुछ समय तक आयरिश होम रूल आंदोलन से जुड़ीं. इसके अलावा उन्होंने मजदूरों, कामगारों और  बेरोजगारों के आंदोलनों में उनके लिए काम किया. इस दौरान उन पर मार्क्सवाद का बहुत प्रभाव रहा. 1889 में थियोसोफी धर्म के संस्थापक की किताब की समीक्षा करते समय उनका झुकाव थियोसोफी से हो गया. 1893 में जब स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद में अपना मशहूर भाषण दिया तब एनी ने थियोसोफिकल सोसाइटी का प्रतिनिधित्व किया था.

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    एनी बेसेंट (Annie Besant) अपने जीवन में कई विचारधाराओं से जुड़ी लेकिन समाज कल्याण उसके केंद्र में रहा. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    भारत में आगमन
    1893 में ही एनी बेसेंट पहली बार भारत आईं. लेकिन तब तक थियोसोफिकल सोसाइटी के दो हिस्से हो गए. जिसमें मूल हिस्से की अगुआई एनी बेसेंट ने भी की और इसका मुख्यालय चेन्नई में बनाया गया. इसे थियोसोफिकल सोसाइटी आडयार के नाम से जाना गया. इसके बाद एनी बेसेंट ने अपने ज्यादा ध्यान सोसाइटी के लिए लगा दिया.

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    थोसोफिल सोसाइटी की अध्यक्ष और शिक्षाविद
    जल्दी ही एनी बेसेंट एक क्लेयरवोएंट या दृष्टा हो गईं. उन्होंने पहले इस विषय पर ऑकल्ट कैमिस्ट्री नाम की किताब का भी सहलेखन किया. 1907 में वे सोसाइटी की अध्यक्ष बनीं और यहां से सोसाइटी की शिक्षा का जोर आर्यावर्त पर हो गया. उन्होंने थियोसोफिकल सिद्धांतों के आधार पर बनारस में लड़कों के लिए सेंट्रल हिंदू कॉलेज खोला जिसमें लड़के धार्मिक किताबों के साथ विज्ञान भी पढ़ते थे.

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    गांधी जी ने एनी बेसेंट (Annie Besant) को बसंत देवी नाम दिया था. (फाइल फोटो)

    बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की स्थापना
    1911 में पंडित मदन मोहन मालवीय के साथ मिलकर उन्होंने बनारस में एक सयुंक्त हिंदू यूनिवर्सिटी पर काम करना शुरू किया. साल 2017 में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई जिसमें सेंट्रल हिंदू कॉलेज उसका हिस्सा बना. लेकिन थियोसोफिल सोसाइटी की गतिविधियों के साथ ही एनी  बेसेंट राजनैतिक रूप से भी सक्रिय रहीं. उन्होंने शुरु से ही भारत में स्वराज के पक्ष में लिखा. उन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध को अंग्रेजों की जरूरत को भारत के लिए एक मौका बताया. उससे पहले ही वे कांग्रेस की सदस्यता ले चुकी थीं

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    भारतीय होमरूल लीग
    एनी बेसेंट ने 1916 में बाल गंगाधर तिलक के साथ मिलकर ऑल इंडिया होम रूल लीग की स्थापना की और इसके लिए अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया जिसपर उन्हें कांग्रेस और मुस्लिम लीग का समर्थन मिला. खुद गांधी जी ने उन्हें बसंत देवी नाम दिया था. इसके बाद वे 1917 में वे कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं. बाद में एनी बेसेंट के कांग्रेस नेताओं से वैचारिक मतैक्य नहीं रहे और धीरे धीरे उन्होंने कांग्रेस दूरी तो बनाई लेकिन वे भारतीय स्वतंत्रता की पैरोकार बनीं रही. 1931 में बीमार होने के बाद 20 सितंबर 1933 को, 85 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया.

    Tags: Freedom Movement, History, India, Research

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