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वो कौन-सा नया एशियाई देश है जो चीन के कर्ज के जाल में फंस गया?

दक्षिण-एशियाई देश लाओस को भी चीन ने उधार में डुबो दिया है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
दक्षिण-एशियाई देश लाओस को भी चीन ने उधार में डुबो दिया है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

चीन (China) यूं ही भारी-भरकम उधार नहीं देता, बल्कि इसके पीछे बड़ी रणनीति रहती है. अब दक्षिण-एशियाई देश लाओस (Laos) भी उसके जाल में फंसा हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2020, 4:48 PM IST
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एक और देश चीन की चालाकी का नया शिकार हुआ है. दक्षिण-एशियाई देश लाओस को भी चीन ने उधार में डुबो दिया है. नतीजा ये हुआ कि लाओस को अपना पावर ग्रिड चीन की एक सरकारी कंपनी को देना पड़ रहा है. कर्ज देकर जाल में फांसने और कर्ज लेने वाले देश की आंतरिक व्यवस्था पर कब्जा करने की ये चीनी नीति काफी पुरानी है.

यूरेशियन टाइम्स ने रॉइटर्स के हवाले से बताया कि लाओस अपना पावर ग्रिड चाइना सदर्न पावर ग्रिड कंपनी को सौंप रहा है. इस बड़े फैसले की वजह है लाओस की डगमगाती अर्थव्यवस्था. देश का विदेशी मुद्रा भंडार कथित तौर पर 1 बिलियन डॉलर से भी नीचे चला गया. ये चीन के लिए एक बढ़िया मौका था कि वो हमेशा की तरह कर्ज के बदले देश में घुसपैठ करने लगे.

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लाओस अपना पावर ग्रिड चाइना सदर्न पावर ग्रिड कंपनी को सौंप रहा है- सांकेतिक फोटो (needpix)




उसने यही किया भी. चीन की सरकार और उसकी कंपनियों ने 150 से ज्यादा देशों को 1.5 ट्रिलियन डॉलर यानी 112 लाख 50 हजार करोड़ रुपये का लोन दिया. साथ ही साथ वो लाओस के भीतर कई विकास कार्यों में जुट गया. जैसे वहां पर चीन की आर्थिक मदद से 6 बिलियन डॉलर की लागत से हाईस्पीड रेल कॉरिडोर बनाया जा रहा है. प्रोजक्ट की कुल लागत का बहुत बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट इम्पोर्ट बैंक ऑफ चाइना ने दिया, वहीं बाकी पैसे भी चीन की सरकारी कंपनियों ने ही लगाए.
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लगातार लोन देने के बाद अब चीन लाओस पर कर्ज चुकाने का दबाव बना रहा है. कर्ज न चुका पाने के कारण ही वहां विदेशी मुद्रा भंडार बुरी तरह से गिरा है. अब लाओस के सामने बड़ा खतरा है कि वो या तो खुद को लोन डिफॉल्टर देश साबित होने दे और फिर किसी भी योजना से अपना बहिष्कार देखे या फिर चीन की बात मान ले.

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यहां बता दें कि वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने हाल ही में लाओस को जंक देश कह दिया है. ये वो अवस्था है जब कोई देश इतना गरीब हो जाए कि उसे कर्ज देने पर सारे कर्ज के डूबने का डर हो. यानी ये दूसरे देशों के लिए एक तरह से खतरे की चेतावनी है कि वे लाओस को पैसे अपनी रिस्क पर दें.

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) ने हाल ही में लाओस को जंक देश कह दिया- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


इन हालातों में चीन वहां के पावर ग्रिड पर कब्जा कर रहा है. लाओस ने खुद ही ये फैसला लिया है ताकि चीन जब तक पावर ग्रिड से मुनाफा कमाए, उसे भी कर्ज चुकाने की मोहलत मिल जाए.

चीन के कर्ज देने और गुलाम बनाने की नीति अर्थव्यवस्था में काफी जानी-पहचानी है. इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के नाम पर पहले कर्ज देना और फिर उस देश को एक तरह से कब्जा लेना, इसे डैट-ट्रैप डिप्लोमेसी (Debt-trap diplomacy) कहते हैं. ये शब्द चीन के लिए ही बना.

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श्रीलंका चीन की कर्ज दो और कब्जा करो की नीति का ताजा उदाहरण है. श्रीलंका ने हंबनटोटा में डेढ़ बिलियन डॉलर के बंदरगाह को बनाने के लिए चीन की मदद ली. बाद में इतना बड़ा कर्ज नहीं चुका पाने के कारण उसे अपने ही हंबनटोटा बंदरगाह को चीन को लीज पर देना पड़ा. नेपाल के साथ भी यही हाल हुआ है. चीन उसे आर्थिक मदद दे रहा है. इस वजह से अब नेपाल की आर्थिक और कूटनीतिक समस्याओं में भी चीन घुसने लगा है.

imran khan
साल 2022 तक पाकिस्तान को चीन को 6.7 अरब डॉलर चुकाने हैं


पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर या सीपीईसी तैयार हो रहा है. इसके लिए भी चीन 80 प्रतिशत से ज्यादा रकम दे रहा है. यहां तक कि काम के लिए कामगार और उपकरण जैसी व्यवस्थाएं भी चीन ने कीं. इस तरह से वो पाक में भी अपने को मजबूत बना रहा है. अंतररराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार साल 2022 तक पाकिस्तान को चीन को 6.7 अरब डॉलर चुकाने हैं. जाहिर है पहले से ही गरीबी की मार झेल रहा पाक ये कर नहीं सकेगा. ऐसे में देर-सवेर वो चीन के बोझ तले दब जाएगा.

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अमेरिकी खुफिया एजेंसी की जानकारियों के आधार पर हार्वर्ड के जमा आंकड़े बताते हैं कि किस विकासशील देश ने चीन से कितनी रकम उधार ले रखी है. इसमें खुले में दिए कर्ज (विकास के नाम पर इंफ्रा में कर्ज) और गुप्त कर्ज दोनों शामिल हैं. इसके मुताबिक दुनियाभर के देशों के पास चीन का 5 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्यादा का उधार है.
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