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    ‘वायुमंडलीय नदियों’ ने अंटार्कटिका के सगारों पर दिखाया असर, बनाया Sea Ice Hole

    अंटार्कटिका (Antarctica) के वेडल सागर में वायुमंडलीय नदियों (Atmospheric Rivers) के कारण एक बड़ा बर्फ का छेद हो गया है. (तस्वीर: Pixabay)
    अंटार्कटिका (Antarctica) के वेडल सागर में वायुमंडलीय नदियों (Atmospheric Rivers) के कारण एक बड़ा बर्फ का छेद हो गया है. (तस्वीर: Pixabay)

    वायुमंडलीय नदियों Atmospheric Rivers) ने अंटार्कटिका (Antarctica) के दक्षिणी सागरों में भी बर्फ का बड़ा छेद (Sea Ice Hole) बना दिया है जबकि अब तक इनका प्रभाव पश्चिमी अंटार्कटिका में ही ज्यादा था.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 12, 2020, 5:18 PM IST
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    ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन ने पूरे विश्व का मौसम बदल कर रखा है. इसके दुष्परिणाम अब स्पष्टता से दिखाई देने लगे हैं. अंटार्कटिका में समुद्री बर्फ पर बड़े छेद बनने का सिलसिला शुरू हो चुका है. इसकी बारे में एक शोध में कहा गया है कि गर्म और नम हवाओं की नदियों (atmospheric rivers) ने अंटार्कटिका (Antarctica) के वेडल सागर (Waddell Sea) की बर्फ में विशाल गड्ढे बनाने में अहम भूमिका निभाई है.

    वायुमंडलीय नदियां
    इन ‘नदियों’ ने इस विशाल महाद्वीप के महासागर के हालातों के साथ ही जलवायु परिवर्तन (Climate Change) को भी प्रभावित किया है.  वैज्ञानिकों ने लंबे, तीव्र गर्म और नम हवाओं की भूमिका का अध्ययन किया जिन्होंने वायुमंडलीय नदियां (atmospheric rivers) कहा जाता है. इन्हीं नदियों के कारण सागर की बर्फ में इतने बड़े छेद दिखाई दे रहे हैं.

    खास तरह के छेद
    शोधकर्ताओं ने अपना अध्ययन अंटार्कटिका के दक्षिणी महासागरीय इलाके के वेडल सगार पर केंद्रित रखा जहां ये समुद्री बर्फ के छेद जिन्हें पॉलीन्यास (polynyas) कहा जाता है, सर्दियों में अनियमित रूप से विकसित हो जाते हैं. इस क्षेत्र में एक विशाल छेद साल 1973 में देखा गया था.वहीं साल 2017 के सर्दियों के अंत में एक और बड़ा छेद ठंड के आखिर में बन गया था.



    कहां से आती हैं ये ‘नदियां’
    साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित अपने तरह के इकलौते अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि 2017 के अगस्त महीने के अंत से सितबंर के बीच में बार बार आने वाले ताकतवर वायुमंडलीय नदियों के कारण समुद्री बर्फीले छेद का निर्माण हुआ. ये ‘नदियां’दक्षिणी अमेरिका के तटों से ध्रुवीय वातावरण में गर्म, नम हवा लाती हैं जिससे  सागर की बर्फीली सतह गर्म हो जाती है और बर्फ पिघलने लगती है.

    ice melting
    अंटार्कटिका (Antarctica) में ही ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का सबसे ज्यादा असर दिखाई दे रहा है.


    पॉलीन्यास का असर
    रटजर्स इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ, ओशीन, एंड एटमॉस्फियरिक साइंसेस में पोस्ट डॉक्टोरल शोधकर्ता काइल मैटिंगली जो इस अध्ययन की सह लेखिका हैं, ने बताया, “ पॉलीन्यास दक्षिणी सागरों के भैतिक और पारिस्थितिकी गतिक को बहुत ज्यादा प्रभावित करते हैं. पॉलीन्यास समुद्री बर्फ में एक बड़ी खिड़की की तरह काम करती हैं. इससे बड़ी मात्रा में ऊष्मा महासागर से वायुमंडल में पहुंचती है. इससे इस इलाके और दुनिया का महासागरीय धारा प्रवाह प्रभावित होता है.”

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    शैवाल प्रस्फुटन में बदलाव
    मैटिंगली ने कहा, “इसके अलावा ये शैवाल प्रस्फुटन के आकर और समय को भी प्रभावित करते हैं. जो समुद्री खाद्य जाल का आधार है. हमारा अध्ययन इन इलाकों में जलवायु परिवर्तन और जलवायु विविधता को बेहतर तरीके से समझने में मददगार साबित होगा.

    अपनी तरह का पहला अध्ययन
    इससे पहले के अध्ययनों ने यह पाया था कि वायुमंडलीय नदियां पश्चिमी अंटार्कटिका की जमीनी बर्फ के पिघलने को प्रभावित करती हैं. लेकिन यह शोध उनके समुद्री बर्फ में छेद करने के प्रभाव का पहला अध्ययन है.

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    अंटार्कटिका (Antarctica) के सागरों पर वायुमंडलीय नदियों (Atmospheric Rivers) के असर का यह पहला अध्ययन है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)


    अंटार्कटिका की जमीन पर
    ये हजारों मील लंबी नदियां होती हैं और समुद्री बर्फीले छेद हजारों वर्ग किलोमीटर का इलाका घेरते हैं, लेकिन आम तौर पर उन इलाकों में होते हैं जहां स्थानीय समुद्रीय बहाव के हालात होते हैं. पश्चिमी अंटार्कटिका में बर्फ की बहुत ही बड़ी चादर जमीन पर है. जो पिघल रही है जिससे दुनिया का औसत समुद्रीतल का स्तर बढ़ता जा रहा है.

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    21वीं सदी में अंटार्कटिका में बर्फ पिघले की दर काफी तेज हो गई है. नेशनल स्नो एंट आस डेटा सेंटर के अनुसार यदि पूरी अंटार्कटिका की बर्फ की चादर पिघल गई तो महासागरों को जलस्तर करीब 200 फीट बढ़ जाएगा. समुद्री जलस्तर बढ़ने और समुद्र तटों पर बढ़ते तूफानों के कारण तटों पर रहने वाले लोगों के लिए पूरी दुनिया में खतरा पैदा हो गया है.
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