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अंटार्कटिका में छिपा है उल्कापिंडों का खजाना, AI की मदद से बना उनका नक्शा

अंटार्कटिका में छिपा है उल्कापिंडों का खजाना, AI की मदद से बना उनका नक्शा

शोध में पाया गया है कि अंटार्कटिका में 600 जगह ऐसी हैं जहां कुल इतनी तादाद में उल्कापिंड हो सकते हैं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

शोध में पाया गया है कि अंटार्कटिका में 600 जगह ऐसी हैं जहां कुल इतनी तादाद में उल्कापिंड हो सकते हैं. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

पृथ्वी (Earth) पर गिरने वाले उल्कापिंडों (Meteorites) में से जितने भी अभी तक खोजे जा सके हैं उनमें से आधे से ज्यादा उल्कापिंड अंटार्कटिका (Antarctica) में मिले हैं. इसी को देखते हुए शोधकर्ताओं ने एक आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम के जरिए अंटार्कटिका का अध्ययन किया और पाया कि वहां 600 से ज्यादा स्थानों में लाखों की संख्या में उलकापिंड दबे हैं जिन्हें अब तक खोजा नहीं जा सका है. ये उलकापिंड आज भी इस महाद्वीप की बर्फ के नीचे संरक्षित स्थिति में हैं.

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    काफी लंबे समय तक पुरातन काल में पृथ्वी (Earth) पर उल्कापिंडों (Meteroites) की बारिश होती रही. उल्कापिंड हमारी पृथ्वी के साथ साथ हमारे सौरमंडल के इतिहास विशेषकर उसके निर्माण की बहुत सारी जानकारी समेटे रहते हैं. यही वजह है कि हमारे वैज्ञानिक इन उल्कापिंडों की जहां तहां खोज भी करते रहते हैं. इनमें अंटार्कटिका (Antarctica) एक प्रमुख जगह है क्योंकि यहां पृथ्वी पर मिले  उल्कापिंडों में से आधे से ज्यादा अंटार्कटिका में ही मिले हैं. एक  आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम ने सुझाया है कि अंटार्कटिका में कम से कम 600 ऐसे स्थान हैं जहां उल्कापिंडों का ऐसा खजाना दबा है जिसे अभी तक देखा तक नहीं जा सका है.

    600 जगहों पर हैं ऐसे उल्कापिंड
    साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि वैज्ञानिकों के एक आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस का एक प्रोग्राम विकसित किया है जिसने इस छोटे से महाद्वीप में उलकापिंड समृद्ध 600 से स्थान खोजे हैं. इसमें कहा गया है कि अंटार्कटिका में लाखों की संख्या में उल्कापिंड हैं जो अभी तक नही खोजे नहीं गए हैं. इनमें से कुछ तो रिसर्च स्टेशन के काफी नजदीक भी हैं.

    अहम जानकारी के स्रोत होते हैं उल्कापिंड
    अभी तक पृथ्वी पर पाए गए उल्कापिंडों में से 62 प्रतिशत अंटार्कटिका में मिले हैं. यही वजह है कि यह महाद्वीप बाहरी अंतरिक्ष के शोध के लिए एक हॉट जोन की तरह माना जाता है.  उल्कापिंड सौरमंडल की उत्पत्ति के बारे में विशेष जानकारी दे सकते हैं. इसके अलावा पृथ्वी पर जीवन कैसे पनपा जैसे कई सवालों को जवाब इन उल्कापिंडों में हैं.

    बर्फ में संरक्षित
    शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी तक अंटार्कटिका की सतह पर मौजूद उल्कापिंडों में से 15 प्रतिशत से भी कम वैज्ञानिकों द्वारा खोजे जा सके हैं. जब उल्कापिंड अंटार्कटिका की बर्फीली सतह से टकरा, तब वे बर्फ की चादर में लिपट गए थे. समय के साथ इनके ऊपर और बर्फ जमती गई जिससे ये बर्फ की ठोस चादर में लिपटते गए.

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    अंटार्कटिका (Antarctica) की बर्फ की चादर में ये उल्कापिंड हजारों सालों तक दब रहे. (तस्वीर: Wikimedia Commons)

    कुछ महासागर में तो कुछ सतह पर
    शोधकर्ताओं ने बताया कि बर्फ में संरक्षित होने के बाद उल्कापिंड  बर्फ के साथ गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से दूसरी जगहों पर पहुंच गए. अधिकांश उल्कापिंड ग्लेशियर के जरिए महासागरों में मिल गए. केवल कुछ ही उल्कापिंड सतह पर बर्फ की चादर पर ऊपर की ओर वापस आ गए और आज भी यहीं मौजूद हैं.

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    खास इलाकों की पहचान
    शोधकर्ताओं ने सैटेलाइट के आंकड़ों केसाथ मशीन लर्निंग का उपयोग कर इन उल्कापिंडों के खजाने का नक्शा बनाया जिसमें ये उल्कापिंड पूरे महाद्वीप में फैले हैं. इन नक्शों के जरिए उन उल्कापिंडों को क्षेत्रीय अभियानों के जरिए उन इलाकों में  खोजा जा सकता है जिन्हें मीटियोराइट स्ट्रैंडिंग जोन (MSZ) कहा जाता है.

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    उल्कापिंडों (Meteorites) के अध्ययन से पुरातन सौरमंडल और उसकी प्रक्रियाओं की जानकारी मिल सकेगी. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    इनके इलाके की पहचान
    मीटियोराइट स्ट्रैंडिंग जोन में उल्कापिंड सतह पर  हजारों सालों से मौजूद रहे और इस दौरान जो कि बर्फ के साथ बहकर इन एमएसजेड के इलाकों में किनारे तक पहुंच गए और फिर से बर्फ की चादर में चले गए. शोधकर्ताओं ने अब इन जोन की पहचान कर ली है जिनका हिमनदीय और भौगलिक विशेषताएं हैं.

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    शोधकर्ताओं का कहना है कि पृथ्वी की सतह से सीधे तौर पर उपलब्ध होने से ये उल्कापिंड तारकीय और ग्रहविज्ञान संबंधी प्रक्रियाओं की जानकारी देंगे.  इस लिहाज से ये उल्कापिंड औरभी ज्यादा अहम हैं क्योंकि इनकी पुरातन अवस्था में अभी तक किसी तरह का रासायनिक बदलाव नहीं आया होगा.

    Tags: Antarctica, Climate, Earth, Research, Science

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