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कोरोना के इलाज में ये है ट्रंप की पसंदीदा दवा, दुनियाभर में हो रही है लोकप्रिय

News18Hindi
Updated: March 23, 2020, 12:27 PM IST
कोरोना के इलाज में ये है ट्रंप की पसंदीदा दवा, दुनियाभर में हो रही है लोकप्रिय
रहस्यमयी कोरोना वायरस पर भी ये दवा कारगर हो सकती है

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की पसंदीदा दवा का इस्तेमाल कई देशों के डॉक्टर (doctor) कोरोना के मरीजों (coronavirus patients) के इलाज में कर रहे हैं.

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  • Last Updated: March 23, 2020, 12:27 PM IST
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एक तरफ कोरोना वायरस के इलाज की खोज में पूरी दुनिया के वैज्ञानिक लगे हुए हैं तो दूसरी तरफ ट्रंप ने एंटी-मलेरिया ड्रग को इस वायरस की दवा बता दिया. 20 मार्च को हुई एक प्रेस वार्ता में ट्रंप ने Covid-19 पर चर्चा के दौरान कहा कि hydroxychloroquine दवा भी इस वायरस का इलाज बन सकती है. Hydroxychloroquine वही केमिकल है जो मलेरिया की दवा में होता है. ये बात और है कि जब ट्रंप ये बात कह रहे थे, तभी कई हेल्थ ऑफिशियल उन्हें इससे रोकने की कोशिश में लगे थे.

ट्रंप का मानना है कि जैसे मलेरिया एक समय पर गंभीर बीमारी थी, जिसका इलाज आखिरकार इस दवा से किया जा सका, वैसे ही रहस्यमयी कोरोना वायरस पर भी ये दवा कारगर हो सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति के अनुसार वैज्ञानिकों को एक बार इस दवा का इस्तेमाल करके भी देखना चाहिए.
National Institute of Allergy and Infectious Diseases के डायरेक्टर Dr. Anthony Fauci से जब इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि फिलहाल इस बारे में कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है कि ये दवा कोरोना के मामले में कितनी असरदार हो सकती है. बता दें कि कई देशों में डॉक्टर कोरोना के मरीजों के इलाज में मलेरिया की ये दवा इस्तेमाल कर रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप चाहते हैं कि मलेरिया का इलाज करने वाली दवा से ही कोरोना वायरस का इलाज हो सके




कोरोना का संक्रमण 192 देशों में फैल चुका है. मृत्यु का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. ऐसे में तमाम वैज्ञानिकों और संक्रामक बीमारियों पर काम करने वाले हेल्थ एक्सपर्ट्स के बीच ये होड़ है कि कौन सबसे पहले इस बीमारी का इलाज खोज सकता है, जो साथ ही साथ सबसे असरदार भी हो. ऐसे में ट्रंप के बयान और कई देशों के डॉक्टरों के इसके इस्तेमाल के बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या मलेरिया की प्रचलित दवा hydroxychloroquine यहां भी काम आ सकेगी. वैसे ये दवा मलेरिया की ही एक और दवा chloroquine से बनी दवा है जो इस्तेमाल में बिल्कुल सुरक्षित होती है. हर उम्र के लोग और गर्भवती महिलाएं भी मलेरिया के इलाज में इसका उपयोग कर सकती हैं.

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को इसलिए भी पसंद किया जाता है क्योंकि ये ऑफ द शेल्फ दवा है. कंपनियों को पता है कि इसे कैसे बनाया जाए और यहां तक कि इसकी कम लागत वाली जेनेरिक दवाएं भी उपलब्ध हैं. इस ड्रग का ट्रायल सफल है, और मलेरिया पर बेहद कारगर है. ऑर्थराइटिस जैसी बीमारी में सूजन घटाने के लिए भी इसका उपयोग होता है. इन तमाम खूबियों के बाद भी जैसा कि Dr. Anthony Fauci मानते हैं, फिलहाल कोविड-19 के मरीजों पर इस दवा के कारगर असर का कोई सबूत नहीं मिल पाया है.

फिलहाल कोविड-19 के मरीजों पर इस दवा के कारगर असर का कोई सबूत नहीं मिल पाया है


चीनी वैज्ञानिकों ने लैब में सेल कल्चर के दौरान पाया कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा सार्स जैसी बीमारियों में संक्रमण को धीमा कर देती थी. चीन और दक्षिण कोरिया में कुछ मरीजों पर इस दवा का इस्तेमाल भी किया गया. फ्रांस में शोधकर्ताओं द्वारा किए एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश रोगियों में 3 से 6 दिनों के भीतर ये दवा ऊपरी वायुमार्ग को साफ कर देती थी. इसमें समय का काफी महत्व है क्योंकि इलाज के बिना एक मरीज 20 या उससे भी ज्यादा दिनों तक कोरोना का संक्रमण फैला सकता है. ये स्थिति इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि इस दौरान मरीज में लक्षण नहीं भी दिख सकते हैं. इसलिए इलाज के दौरान ये ध्यान रखना भी जरूरी है कि मरीज के संक्रमण फैलाने के समय को कम से कम किया जा सके.

अपने यहां हुए प्रयोग के बाद फ्रांसीसी वैज्ञानिकों ने मलेरिया की दवा की अनुशंसा करते हुए कहा कि कोरोना के इलाज में hydroxychloroquine का इस्तेमाल किया जा सकता है ताकि संक्रमण फैल सकने की रफ्तार कम हो सके. लेकिन वैज्ञानिकों ने प्रयोग में सिर्फ 26 मरीजों को ये दवा दी थी, जो कि कुछ कहने के लिए बहुत छोटी संख्या है. साथ ही इस दवा के कई साइड इफैक्ट भी हैं जैसे सिरदर्द, चक्कर आना, पेट खराब होना. यही वजह है कि डॉक्टर फिलहाल इसके प्रयोग से परहेज कर रहे हैं.

दुनियाभर में बड़ी संख्या में मरीजों पर hydroxychloroquine दवा के कम से कम 6 क्लिनिकल ट्रायल किए जाने की योजना बनाई जा रही है. इस दौरान ज्यादा से ज्यादा कोरोना टेस्ट किए जा रहे हैं ताकि संक्रमित मरीजों को स्वस्थ लोगों से अलग रखा जा सके.

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First published: March 23, 2020, 12:08 PM IST
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