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चींटी के दांतों ने बताया, छोटी और ज्यादा कारगर कैसे होगी भविष्य की तकनीक

चींटी के दांतों ने बताया, छोटी और ज्यादा कारगर कैसे होगी भविष्य की तकनीक

वैज्ञानिकों ने चीटीं (Ants) के दांतों की काटने के मजबूत ताकत का अध्ययन किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

वैज्ञानिकों ने चीटीं (Ants) के दांतों की काटने के मजबूत ताकत का अध्ययन किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

चींटी के दांत (Ant Teeth) एक मानव के बाल से भी ज्यादा पतले होते हैं, फिर भी वे बहुत कड़क पत्तियों (Hard leaves) को भी बिना किसी नुकसान के काट सकती हैं. शोधकर्ताओं ने इसी तकनीक (Technology) की पड़ताल की है.

  • News18Hindi
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    आज आधुनिक विकास में तकनीकी (Technology) में बहुत तेजी से बदलाव हो रहे हैं. तकनीक ने सुविधाओं को इतना विस्तार इससे पहले कभी नहीं दिया. इसमें दुनिया को सिमेटने का काम तो किया ही है, हमारे रोजाना इस्तेमाल की चीजों को भी छोटा कर दिया है. इसके बाद भी हमारे वैज्ञानिक रुके नहीं हैं और चीजों को बेहतर गुणवत्ता और क्षमता के साथ छोटा करने में प्रयासरत हैं. इस दिशा में उन्होंने कीड़ों (Insects) के अध्ययन की ओर रुख किया है. हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने चीटियों के दांतों (Teeth of Ants)की विशेषताओं को खोजा है जो बहुत उपयोगी साबित हो सकती हैं.

    कहां से आती है ताकत
    शोधकर्ता विशेषतौर पर इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि आखिर चींटी की दांतों में इतनी ताकत कहां से आती है जो इतने पतले होने के बावजूद भी वे कड़ी पत्तियों को भी काटने में सफल रहते हैं और उन्हें कुछ नुकसान भी नहीं होता. शोधकर्ताओं ने पहले ही चींटी के दांतों और डंको  की तोड़ने, काटने, घिसाव से प्रतिरोध और उनमें जिंक और मैंगनीज पदार्थों की मात्रा की ऊर्जा का पहली बार मापन किया.

    कई आयाम खोल सकता है यह
    साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि चींटी के दांतों में तीखे पन संबंधी बल ऊर्जा बचाव के कई तरीके बता सकता है और यह छोटे जीवों को चीजों को पंचर करने, उन्हें काटने और चीजों को पकड़ने में भी सक्षम बना सकता है जो सामान्य या बायोमिनिरलाइज्ड उपकरणों से पकड़ में नहीं आते  हैं.

    जिंक की मौजूदगी
    चींटी के दांत एक इंसान के बाल से भी काफी छोटे होते हैं, फिर भी बार में ही काटने पर यह कठोर पत्तियों को भी नुकसान पहुंचा जाते हैं. इसकी वजह चींटी के दांतों में जिंक की मौजूदगी ना केवल उन्हें ऐसा करने में सक्षम बनाती है बल्कि आगे होने वाले नुकासन से भी बचाती है. शोध का कहना है कि ऐसा इसलिए संभव है क्योंकि जिंक परमाणु की मौजूदगी बल को समान रूप से वितरित कर देती है.

    खास तकनीक से अध्ययन
    शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि इस विशेषता को मानव निर्मित उपकरणों में लागू किया जा सकता है. चींटी के दांतों  की कारगरता के पीछे के विज्ञान को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने पहले चींटी के जबड़े से उसका दांत अलग किया. इसके बाद उन्होंने एटम प्रोब टोमोग्रापी तकनीक का उपयोग कर दांत के अंदर मौजूद हर परमाणु की स्थिति को सुनिश्चित किया.

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    शोधकर्ताओं ने चींटी (Ants) के दांतों के साथ उसके डंक का भी अध्ययन किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    वह समान वितरण
    शोधकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे थे कि जिंक चींटी के दांतों में कैसे वितरित रहता है और वह कैसे उसे ताकत प्रदान करता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि  जिंक दांतों की सतह पर एक साथ ना होकर नियमित तौर पर सपाट रूप से विकसित होता है. जिससे इसे किसी भी पदार्थ को काटने में आसानी होती है. इसी वजह से जिंक में समान रूप से बल वितरित हो जाता है जिससे उसे काटने में आसानी होती है.

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    मानव दांत भी इतने सक्षम नहीं
    यही वजह है कि चींटी के दांत कठोर पदार्थ भी काटने में सक्षम हो जाता है. अध्ययन में कहा गया है कि यह एक रूपता ही धारदार और सटीक काटने वाला उपकरण बनाती है जो बायोमिनिरल्स से भी ज्यादा कारगर होते हैं. इसी की वजह से दांतों के टूटने की संभावना भी खत्म हो जाती है. कीड़े मानव त्वचा को बिना तोड़े काट सकते हैं. यहां तकि यह मानव दांतों तक से काटना मुश्किल होती है.

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    चींटी (Ants) की कठोर पदार्थ को काटने की मजबूत क्षमता ने शोधकर्ताओं को हैरान किया था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

    लंबे चल सकते हैं उपकरण
    शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि मानव उपकरणों पर लगी जिंक की परत भी उनकी जीवन बढ़ाने के लिए काफी होता है. यह एक काफी सस्ता तरीका हो सकता है. अब शोधकर्ता इस सिद्धांत का परीक्षण अन्य उपकरणों पर करेंगे और इसका उपयोग छोटे उपकरण बनाने में भी करेंगे.जिससे उपकरणों की कारगरता और प्रभावोत्पादकता बढ़ सके.

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    शोधकर्ता अब अपना अध्ययन केवल चींटियों तक ही सीमित नहीं रखेंगे, अब वे अपना अध्ययन  बिच्छूओं और मकड़ियों पर भी आगे शोध करेंगे. उन्होंने उनके डंक आदि के कठोरता, प्रस्थास्था आदि पहले से ही नाप रखी है. कीड़ों और अन्य जीवों ने वैज्ञानिकों को कईतरह के तकनीकी समाधान हासिल करावाए हैं. ड्रोन तकनीक इन्हीं में से एक है.

    Tags: Research, Science, Technology

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