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दुनिया का कोई भी शिया बन सकता है अयातुल्ला, ये शर्तें करनी होंगी पूरी

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Updated: January 15, 2020, 5:54 PM IST
दुनिया का कोई भी शिया बन सकता है अयातुल्ला, ये शर्तें करनी होंगी पूरी
वर्तमान में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई भी आयतुल्लाह हैं.

अयातुल्ला (Ayatollah) शब्द आयत और अल्लाह के मेल से बना हुआ है. इसका मतलब होता है अल्लाह की निशानी.

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  • Last Updated: January 15, 2020, 5:54 PM IST
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वर्तमान में ईरान के सर्वोच्च नेता का नाम है सैयद अली हसन खामनेई (Sayyid Ali Hosseini Khamenei) लेकिन पश्चिमी मीडिया उन्हें अयातुल्ला खामनेई ही कहकर पुकारता है. इससे पहले 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति करने वाले सैयद रुहोल्ला मुसावी खामनेई (Sayyid Ruhollah Musavi Khomeini) को भी पश्चिमी देशों का मीडिया अयातुल्ला खामनेई के ही नाम से संबोधित करता रहा. वक्त के साथ ये नाम इन धार्मिक नेताओं पर चस्पा हो गया जबकि वास्तविकता में 'अयातुल्ला' नाम न होकर शिया इस्लाम में एक पद है. आपको जानकर हैरानी होगी कि वर्तमान समय में ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में विख्यात अयातुल्ला अली खामनेई अकेले अयातुल्ला नहीं हैं. देश में और भी कई धार्मिक विद्वान हैं जिन्हें अयातुल्ला का पद मिला हुआ है. लेकिन आम भेड़-चाल के कारण अयातुल्ला नाम को ईरान के सर्वोच्च नेता के नाम के साथ जोड़ दिया गया है.

कैसे बनते हैं अयातुल्ला
अयातुल्ला शब्द आयत और अल्लाह के मेल से बना हुआ है. इसका मतलब होता है अल्लाह की निशानी. दिल्ली में कश्मीरी गेट स्थित शिया जामा मस्जिद के इमाम मोहसिन तकवी कहते हैं कोई भी शिया व्यक्ति अयातुल्ला के पद तक पहुंच सकता है. हालांकि वो कहते हैं कि इस पद पर पहुंचने के लिए कोई इलेक्शन नहीं होता है और न ही कोई ऐसा बोर्ड है जो इसका चयन करता है. अगर किसी व्यक्ति को अयातुल्ला बनना है तो उसे ईरान, इराक या लेबनॉन में कई सालों तक धार्मिक शिक्षण का काम करना होता है. कुरान और शिया इस्लाम से संबंधित मामलों में उसकी जानकारी का स्तर बेहतरीन होना चाहिए. वक्त और अनुभव के साथ उस व्यक्ति को शिक्षण संस्थानों में अयातुल्ला कहा जाने लगता है. इमाम मोहसिन तकवी के मुताबिक इस वक्त ईरान में करीब 100 से ज्यादा अयातुल्ला हैं. लेकिन ईरान का सुप्रीम लीडर बनने के लिए चुनाव होता है. वर्तमान सुप्रीम लीडर 1989 में चुनाव जीतकर ही इस पद पर बैठे थे.

इस्लामिक क्रांति के बाद आयतुल्लाह खामनेई ईरान वापस लौटे थे.
इस्लामिक क्रांति के बाद अयातुल्ला खामनेई (सैयद रुहोल्ला मुसावी खामनेई ) ईरान वापस लौटे थे.


मोहसिन तकवी बताते हैं कि अयातुल्ला से भी ऊपर एक पद माना जाता है जिसे अयातुल्ला हिल उज़्मा कहते हैं. इसका मतलब होता है अल्लाह की बड़ी निशानी. उनके मुताबिक ईरान में फिलवक्त अयातुल्ला हिल उज़्मा की भी संख्या करीब 20 से 25 के आसपास है.

12 इमाम के मानने वालों की संख्या ज्यादा
इमाम मोहसिन तकवी का कहना है कि शिया इस्लाम में मोटे तौर पर अनुयायी 12 इमाम और 6 इमाम में बंटे हुए हैं. हालांकि वो कहते हैं कि अब दुनियाभर के शिया समुदाय में 99 प्रतिशत संख्या 12 इमाम के मानने वालों की ही हैं. 6 इमाम के मानने वालों की संख्या बेहद कम है. भारत में दाऊदी वोहरा और इस्माइली शिया समूह 6 इमामों को मानने वाली ब्रांच से ताल्लुक रखते हैं. 12 इमामों के अनुयायियों का सबसे बड़ा ग्रुप उसूली कहा जाता है. सामान्य तौर पर अयातुल्ला इस ग्रुप से बनते हैं. शिया समुदाय में उसूली के अलावा एक समूह को अखबारी भी कहते हैं. हालांकि इनकी संख्या उसूली ग्रुप के मुकाबले बेहद कम है.
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ईरान के वर्तमान सर्वोच्च नेता सैयद अली हसन खामनेई.


कैसे सुप्रीम लीडर चुने गए वर्तमान अयातुल्ला अली खामनेई
ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सर्वोच्च नेता बने रुहोल्ला मुसावी खामनेई. उनकी मृत्यु 3 जून 1989 को हुई थी. उनकी मृत्यु के ठीक एक दिन बाद सुप्रीम लीडर की पोस्ट के लिए चुनाव हुआ था. ये कोई आम चुनाव नहीं था. इसमें वोटिंग में देश के सर्वोच्च धार्मिक एक्सपर्ट्स को शामिल किया गया था. सैयद अली हसन खामनेई ने चुनाव जीता और उसके बाद करीब 30 साल से वो इस पद पर बने हुए हैं. इससे पहले वो ईरान के राष्ट्रपति भी रह चुके हैं. ईरान के सुप्रीम लीडर का नाम होता है-रहबर-ए-मोअज्ज़म-इंक़लाब-ए-इस्लामी.

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First published: January 15, 2020, 5:07 PM IST
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