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एयरफोर्स की परीक्षा में फेल न हुए होते तो मिसाइल मैन नहीं बनते कलाम साहब

मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम
मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम

मिसाइल मैन (Missile Man) के नाम से मशहूर हुए देश के 11वें राष्ट्रति एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) का आज जन्मदिन है. एक गरीब मछुआरे के घर पैदा हुए कलाम साहब ने अपनी प्रतिभा के बल पर कामयाबी की बुलंदियां छुईं...

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 15, 2019, 9:28 AM IST
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आज भारत के मिसाइल मैन (Missile Man) का जन्मदिन है. एक वैज्ञानिक जो अभावों में पला बढ़ा लेकिन अपनी प्रतिभा के बल पर कामयाबी की बुलंदिया छुईं. आसमान की बुलंदिया छूने के बाद भी उसके पैर जमीन पर ही रहे. उनकी सादगी के लोग कायल रहे. वो सही मायने में भारत के सच्चे सपूत थे.

भारत के मिसाइल मैन कहने जाने वाले एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु (Tamilnadu) के शहर रामेश्वरम (Rameshwaram) में हुआ था. एक मछुआरे के घर में पैदा हुए कलाम का बचपन अभावों में बीता. लेकिन उन्होंने बचपन से ही कुछ करने का हौसला पाल रखा था.

अपनी पढ़ाई का खर्च पूरा करने के लिए कलाम ने घर-घर में अखबार बांटना शुरू किया. वो स्कूल के बाद अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए अखबार बांटा करते थे. कलाम साहब मेहनती और प्रतिभाशाली छात्र थे. गणित और भौतिकी उनके पसंदीदा विषय थे. कलाम का सपना इंडियन एयरफोर्स में जाने का था. इसलिए उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. लेकिन नियती में कुछ और ही लिखा था.



जब एयरफोर्स की परीक्षा में फेल हो गए थे कलाम साहब
कलाम साहब इंडियन एयरफोर्स की परीक्षा में बैठे थे. इंडियन एयरफोर्स की परीक्षा में उन्हें मिलाकर कुल 25 उम्मीदवार थे. इसमें से सिर्फ 8 उम्मीदवारों का चयन होना था. एपीजे अबुल कलाम नौवें पोजिशन पर रहे और उनका इंडियन एयरफोर्स में जाने का सपना टूट गया. उस वक्त कौन जानता था कि उनके इस सपने का टूटना सिर्फ उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए अच्छा था. उन्हें और भी बड़ी भूमिका में देश की सेवा करनी थी. इसके बाद कलाम साहब ने जो किया वो इतिहास बन गया.

apj abdul kalam birth anniversary when indias missile man failed in indian airforce exam
एपीजे अब्दुल कलाम


कलाम साहब ने मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरनॉटिकल साइंस की पढ़ाई की थी. जब वो इंडियन एयरफोर्स में जाने से नाकाम रहे तो उन्होंने 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो में नौकरी कर ली. उनके नेतृत्व में ही भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान यानी पीएसएवी -3 बनाया. 1980 में इसी यान से पहला उपग्रह रोहिणी अंतरिक्ष में स्थापित किया गया.

कलाम के नेतृत्व में शुरू हुई स्वदेशी मिसाइल टेक्नोलॉजी पर काम

कलाम के दौर में पूरी दुनिया में नए रक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान चल रहे थे. नए-नए तरीके के हथियारों का निर्माण हो रहा था. उस दौर में मिसाइल टेक्नोलॉजी को किसी भी देश की रक्षा ताकत के बतौर देखा जाता था. भारत के पास मिसाइल टेक्नोलॉजी नहीं थी. और कोई भी देश भारत के साथ इस टेक्नोलॉजी को साझा करने को तैयार नहीं था.

कलाम के नेतृत्व में ही जेश ने अपना पहला स्वदेशी मिसाइल कार्यक्रम की शुरुआत की. इंटीग्रेटेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम की जिम्मेदारी कलाम साहब को दी गई. कलाम साहब ने अपने नेतृत्व में स्वदेशी मिसाइलों की लाइन लगा दी. भारत ने उनके निर्देशन में जमीन से जमीन पर मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल पृथ्वी मिसाइल, जमीन से हवा में मार करने वाली त्रिशूल मिसाइल और टैंक भेदी नाग मिसाइल बनाकर पूरी दुनिया में अपनी मौजूदगी दर्ज करवाई. भारत को एक के बाद एक मिसाइल देने की वजह से वो मिसाइल मैन के तौर पर मशहूर हुए.

apj abdul kalam birth anniversary when indias missile man failed in indian airforce exam
बच्चों के बीच मिसाइल मैन


जब देश के 11वें राष्ट्रपति बने कलाम साहब

साल 1992 से लेकर 1999 तक एपीजे अब्दुल कलाम रक्षा मंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार रहे. इसी दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया. इस परमाणु परीक्षण में कलाम साहब की अहम भूमिका थी.

साल 2002 में उन्हें भारत का राष्ट्रपति चुना गया. उनके राष्ट्रपति बनने की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है. 2002 में तत्कालीन राष्ट्रपति के आर नारायणन का कार्यकाल खत्म हो रहा था. अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए की सरकार के पास उतना बहुमत नहीं था कि अपनी पसंद का राष्ट्रपति बनवा सके. एनडीए सरकार के लिए ये परीक्षा की घड़ी थी.

इसी दौरान समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव ने राष्ट्रपति पद के लिए कलाम साहब का नाम आगे कर दिया. वाजपेयी सरकार ने इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया. कांग्रेस पार्टी के सामने मुश्किल स्थिति आ गई. कांग्रेस पार्टी एक मुस्लिम उम्मीदवार की दावेदारी को खारिज करने का जोखिम नहीं उठा सकती थी. लेफ्ट पार्टियों के साथ बाकी दलों ने भी कलाम की दावेदारी का समर्थन कर दिया. इस तरह से कलाम साहब देश के 11वें राष्ट्रपति चुने गए.

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